थानखम्हरिया। जिसके आंगन में गौ माता का दर्शन न हो और जिसने घर में कुत्ता पाला हो उसके घर में संत को नहीं जाना चाहिये, चाहे वहां उनका कितना भी आदर होता हो। पाटेश्वरधाम के ऑनलाइन सत्संग में रामबालकदासजी ने कहा कि मानस में कहा गया है ज्ञान, गिरा, गोतीत, अज, माया, गुण और गो इन सात बिंदुओं से परे अर्थात भगवान की गति प्राप्त करने के लिये जीव को इन सात चीजों से बचना चाहिये। इनके भी तीन तीन लक्षण बताये गये हैं जो अदृश्य हो, बुद्घि के समझ में आ जाये और जो हमें शाश्वत दिखाई दे। भगवान का स्वरूप सच्चिदानंद है। नर रूप लेने, नर लीला करने के बाद भी भगवान को न सांसारिक माया व्यापती है और न ही वैष्णवी माया। भगवान को इसलिये माया नहीं व्यापती कि वे मायापति हैं, बल्कि शुभ कर्म करने, आदर्श स्थापित करने के कारण माया उनके पास नहीं फटकती। भगवान ने इस लीला के माध्यम से संदेश दिया कि मनुष्य के लिये ऐसा करना संभव है।

गाय और कुत्ता पालन पर प्रकाश डालते हुये महाराज जी ने कहा कि गौपालन को हेय दृष्टि से देखा जाने लगा है। गौ पालन को गरीब, पिछड़े, गंवार लोगों का काम समझा जाने लगा है। गाय को लोग बोझ समझने लगे हैं, वहीं कुत्ता पालना अमीरों की शान समझी जाने लगी है। जितने अच्छे विदेशी नस्ल का कीमती कुत्ता उसका उतना रौब माना जाने लगा है। रसोईघर की पहली रोटी गाय को मिलनी चाहिये झूठन रोटी पर अधिकार कुत्ते का है। पूज्य संत देवाचार्य राजेन्द्र दासजी कहते हैं कि जो कुत्ता पालता है इसके संदर्भ में उन्होंने प्रमाण दिया कि विद्वान जड़ भरत को मृग में आशक्ति होने पर उसे अगले जन्म में मृग शरीर धारण करना पड़ा। हमें संतों की वाणी को आचरण में लाना चाहिए। सब साधन होते हुये भी गांव में गौपालन न करने वालों के यहां संतों को नहीं जाने का नियम लेना चाहिये। ऐसे घरों में पैर न रखने का निर्णय स्वयं बाबाजी ने किया। महाराज जी ने श्रद्घालुओं से अपील की कि वे कुत्ता पालन से परहेज रखें और यदि इसे आवश्यक समझें तो मर्यादा का पालन करे। कुत्ते को रसोईघर, पूजा घर जैसे पवित्र स्थानों से दूर रखें उसके उचित खानपान, रहने की व्यवस्था करें। घर के सदस्य की तरह शारीरिक लाड़, प्यार से बचें। घरों में शुभ सूचक के नाम पर कछुआ, मछली पालन के संबंध में कहा कि ऐसे जंतु स्वछंद न होने, स्वाभाविक भोजन न मिलने तथा अनुकूल वातावरण न मिलने से वे अकाल मौत मरते हैं, इसलिये हमें जीवों को स्वछंद देख प्रसन्न होना चाहिये।

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सुराजी गांव योजना ने बनाया महिला स्वसमूहों को आत्मनिर्भर

फोटो-थान-2

थानखम्हरिया(नईदुनिया न्यूज)। राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरवा व बाड़ी के अंतर्गत ग्राम पंचायत टिपनी में आदर्श गौठान का निर्माण किया गया है। साथ ही गौठान में वर्मी बेड स्थापित किया गया है। वर्मी बेड में वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिये मां महामाया महिला स्वसहायता समूह का गठन कृषि विभाग की एक्सटेंशन रिर्फाम्स आत्मा योजना अंतर्गत पंजीकृत किया गया है।

शुरूआत में महिला समूहों को वर्मी कम्पोस्ट के बारे में जानकारी नहीं थी। फलस्वरूप कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग की एक्सटेंशन रिर्फाम्स आत्मा योजना अंतर्गत जितेन्द्र ठाकुर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, बलवंत डड़सेना ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, लुकेश सेन सहायक तकनीकि प्रबंधक एवं उद्यान विभाग व कृषि विज्ञान केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें वर्मी खाद बनाने की विधि एवं उससे होने वाले फायदे के बारे में विस्तृत रूप से बताया गया, जिससे महिलाओं की रूचि इस विषय में बढ़ी और उन्होंने रूचि लेकर मेहनत की। इनकी मेहनत रंग लाई। इसी मेहनत का परिणाम है कि तैयार 14 क्विंटल वर्मी खाद को विभाग को बेचकर तेरह हजार रुपये की आमदनी प्राप्त हुई साथ ही गौठान में उपलब्ध गोबर खाद को बेस्ट डि कम्पोजर से उपचारित कर चार ट्रैक्टर गोबर खाद तैयार कर दस हजार रुपये की आमदनी प्राप्त की गई। राशि का भुगतान प्राप्त होने पर महिलाओं में काफी प्रसन्नता थी।

शासन की इस महती योजना से न सिर्फ महिलाओं को फायदा हो रहा है, बल्कि जिले के किसानों को भी सही समय पर जैविक खाद उपलब्ध हो रहा है। इस योजना से जैविक खेती को भी बढ़ावा मिल रहा है। लॉकडाउन में शासन की दूरगामी सोच से इस संकट की घड़ी में कोविड 19 के समय भी सुराजी गांव योजना संजीवनी की तरह काम कर रही है।

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युवा रचनाकारों ने विविध रसों की कविताओं से किया सराबोर

थानखम्हरिया(नईदुनिया न्यूज)। नगर की सामाजिक संस्था श्री साईनाथ फाउंडेशन द्वारा आयोजित काव्य-श्रृंखला 'कवितावली' को पूरे देश-प्रदेश में अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। लगातार तीसरे सप्ताह दस युवा व वरिष्ठ रचनाकारों ने विविध विधाओं व रसों में अपनी उत्कृष्ट रचनाओं की प्रस्तुति दी। संस्था के अध्यक्ष व युवा शायर आशीष राज सिंघानिया ने बताया कि इस ऑनलाइन आयोजन का प्रसारण प्रत्येक सप्ताह के अंतिम तीन दिन सायं 6 से 7 बजे के बीच उनके अधिकृत फेसबुक पेज 'आशीष तन्हा' में किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत देश-प्रदेश के युवा व स्थापित कवि-शायरों द्वारा कोरोना महामारी से बचाव की अपील करते हुए स्वरचित रचनाओं की प्रस्तुति दी जाती है। कार्यक्रम प्रभारी हास्य कवि मनोज शुक्ला ने जानकारी दी कि इस श्रृंखला के तीसरे सप्ताह में युवा शायर सुमित शर्मा ने पढ़ा कि -

'गुलों को भूलकर कांटों से प्यार करना है,खां के दौर में जश्न-बहार करना है।नफ़स-नफ़स पे मेरा साथ छोड़ जाती है,जिंदगी फिर भी तेरा एतबार करना है। ओज कवयित्री अन्नपूर्णा पवार आहुति ने ओज की सार्थक पंक्तियां पढ़ते हुए कहा कि हम वंशज महाराणा के, राणी झांसी के अनुयायी, सहन करें सम्मान पे अत्याचार, नहीं ये नौबत आई। युवा शायर आलोक गुप्ता ने पढ़ा जो मेरी आंखों में है मेरे अंदर नहीं दिखता,

खैर! कश्ती के मुसाफिरों को समंदर नहीं दिखता। वरिष्ठ कवयित्री संतोषी श्रद्घा महंत की मधुर पंक्तियां कुछ इस तरह रहीं -इस शहर की धूप से तो छांव अच्छा था,प्यार भाईचारे वाला ठांव अच्छा था। कवि रिकी बिंदास ने देशभक्ति के तराने गाए। इसी तरह युवा लोकगीतकार मिलन मलरिहा, युवा शायर जितेंद्र सुकुमार साहिर व कवयित्री रोशनी पटेल ने भी अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मन मोह लिया। कोरोना महामारी के इस निराशा भरे माहौल में निश्चित ही ऐसे आयोजनों से लोगों में सकारात्मकता का संचार होता है व लोग रचनात्मक गतिविधियों के जरिए स्वयं को व्यस्त रखने हेतु प्रेरित होते हैं।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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