किशोर तिवारी-बेमेतरा। जिले के किसान कोरोना के आपदा को अवसर में बदल रहे हैं। तस्वीर शिवनाथ नदी किनारे सिमगा पुल केपास की है। जहां 27 एकड़ जमीन में किसान टमाटर की खेती कर रहे हैं। इस साल खेतों में टमाटर की पैदावार अच्छी होने से हरियाली छाई हुई है। किसान टमाटर की खेती कर न केवल खुद ही मुनाफा कमा रहे हैं। बल्कि लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। एक महीने पहले टमाटर केदाम नहीं मिलने से किसान, सड़क, खेतों में टमाटर को फेंक रहे थे। क्योंकि किसानों को लागत तो दूर तोड़ने तक केदाम नहीं मिल रहे थे। अभी जिले में लाकडाउन लगा हुआ है। जिससे सब्जियों केदाम बढ़ चुकेहैं। काम बंद होने और सब्जियों केदाम बढ़ने से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

छत्तीसगढ़ के देसी टमाटर की दिल्ली, पटना, पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा डिमांड

किसान धनेश्वर साहू बताते है कि 27 एकड़ में टमाटर की खेती कर रहे हैं। जिसमें करिश्मा, श्रेया, युवराज सहित 10-12 किस्म केटमाटर की बुआई किए है। प्रतिदिन 20 क्विंटल टमाटर तोड़ते हैं। लाकडाउन के कारण लोकल की अपेक्षा दूसरे राज्यों में अच्छी डिमांड व कीमत मिल रही है। दिल्ली, पटना, पश्चिम बंगाल, गुवाहाटी में छत्तीसगढ़ केदेसी टमाटर की डिमांड सबसे ज्यादा है। प्रति कारटन 250 से 300 रुपये में बिकती है। एक कारटन में 22 किलों की पैकिंग की जाती है। हर दिन किसान को ढाई लाख रुपये की आमदनी हो रही है। वहीं, महीने में 70-80 लाख रुपये तक किसान कमा रहे हैं।

ड्यूटीरत जवानों, अधिकारियों को निश्शुल्क दे रहे टमाटर

लाकडाउन में अधिकारियों और जवानों की ड्यूटी लगाई गई है। जवानों को किसान धनेश्वर निश्शुल्क टमाटर सहित अन्य सब्जी दान कर रहे हैं। वे कहते हैं हमारे घर के लोग सुरक्षित रहे इसलिए जवान, अधिकारी, डाक्टर जोखिम उठाकर काम कर रहे हैं। खाने पीने की परेशानी न हो इसके लिए सौभाग्य समझकर सेवा कार्य कर रहे हैं। किसान की बाड़ी में गरियाबंद जिले केदेवभोग के करीब 60 मजदूर यहां काम करते हैं। इसके अलावा औरेठी, बेमता, सिमगा, दुलदुला सहित 10 गांवों के लोग बाड़ी में काम कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। जिले केसाजा विकासखंड तथा बेरला विकास खंड के किसान भी काफी तादाद में तथा काफी बड़े रकबे में सब्जी की खेती कर केवल न अपनी आजीविका चला रहे हैं, बल्कि ग्रामीणों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं। हालांकि शुरुआती दौर में लाकडाउन केबने हालात केचलते किसानों ने कुछ निराशा देखी गई, किंतु अब परिस्थिति विपरित होने केबावजूद भी इस तरह से हौसला किसानों ने दिखाई है, जो निश्चित रूप से यह किसानों की मेहनत का ही परिणाम है कि आज वह आपदा को अवसर में बदलने में कामयाब हुए हैं।

किसानों ने अनाज का बंपर उत्पादन कर निभाई अपनी भूमिका

जिस तरह से सब्जी उत्पादक किसानों ने आपदा को अवसर बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी तथा स्वयं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करते हुए ग्रामीणों को रोजगार भी उपलब्ध कराया कुछ इसी तरह के हालात जिले के अनाज उत्पादक किसानों का भी है, जो कि विपरीत परिस्थितियों में हार न मानते हुए जिस लगन व मेहनत से खेतों में अपनी फसल पैदा कर देश की अर्थव्यवस्था को संभालने में कोई कसर बाकी नहीं रखी निश्चित रूप से वह दिन याद आती है जब देश के पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री ने यह नारा दिया था जय जवान जय किसान, इस बात को पूरी तरह सार्थकता करते हुए किसानों ने जो कर दिखाया है उसे पूरी दुनिया सलाम भी कर रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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