दुर्ग। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) नई दिल्ली द्वारा विष्वविद्यालय एवं अन्य शोध संस्थानों में थीसिस की नकल रोकने हेतु कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में जारी ड्राफ्ट के अनुसार अब यदि किसी शोधार्थी की पीएचडी थीसिस में प्लेजियारिज्म अर्थात नकल पाई जाती है तो उस शोधार्थी के साथ-साथ उसके रिसर्च गाइड पर भी कार्यवाही की जाएगी।

हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलसचिव डा.सीएल देवांगन ने बताया कि विश्वविद्यालय में शोधकार्य कर रहे सभी शोधार्थी एवं उनके शोधनिर्देशक को यूजीसी के नए नियमों से अवगत कराया जा रहा है। यूजीसी द्वारा बनाए नए पीएचडी नकल रोकने संबंधी ड्राफ्ट में शोधार्थियों एवं उनके शोधनिर्देशकों पर तीन चरणों में पेनाल्टी लगाने का प्रावधान किया गया है। यह पेनाल्टी शोधार्थी द्वारा की गई नकल की प्रकृति एवं उसके प्रतिशत पर आधारित होगी।

यूजीसी के अनुसार प्रथम लेवल की पेनाल्टी में शोधार्थी द्वारा प्रकाशन हेतु उपलब्ध कराए गए शोधकार्य को वापस लेना होगा। वह एक वर्ष की अवधि तक कोई भी शोध निष्कर्ष को कहीं प्रकाशित नहीं कर सकेगा। द्वितीय लेबल की पेनाल्टी में शोधार्थी द्वारा प्रकाशन हेतु उपलब्ध कराए गए शोध कार्य को वापस लेने के साथ-साथ दो वर्ष तक कोई भी शोधकार्य को न कर पाने संबंधी पेनाल्टी का प्रावधान है। साथ ही सेवा में कार्यरत् शोधार्थी एवं शोध निर्देशक की एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी जा सकती है। इसके अलावा व शोधनिर्देशक दो वर्ष तक किसी भी शोधार्थी का रिसर्च गाइड नहीं बन पाएगा।

शोधकार्य के प्रकाशन पर तीन वर्ष का प्रतिबंध

तीसरे लेवल की पेनाल्टी में शोधार्थी द्वारा प्रकाशन हेतु प्रस्तुत शोधकार्य के प्रकाशन पर तीन वर्ष तक प्रतिबंध रहेगा तथा सेवारत शोधार्थी एवं शोधनिर्देशकों के दो वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी जा सकने का प्रावधान यूजीसी ने किया है। इसके अतिरिक्त वह शोधनिर्देशक तीन वर्षों तक किसी भी शोधार्थी का रिसर्च गाइड नहीं बन पाएगा। यूजीसी ने यह निर्णय शोधकार्य में नवीन अवधारणाओं के समावेश हेतु किया है। इसके लिए प्रत्येक शोध संस्थान को प्लेजियारिज्म डिसीप्लीनरी अथॉरिटी (पीडीए) का गठन करना होगा। यह अथारिटी शोधकार्य के मुख्य बिन्दुओं सारांश, संक्षेपिका हाइपोथीसिस, अवलोकन, शोध परिणाम एवं शोधनिष्कर्ष, सुझावों आदि में नकल की सूक्ष्‌मता से जांच करेगी। नकल का पता लगाने यूजीसी से अनुमोदित साफ्टवेयर भी उपलब्ध है।

इसके अतिरिक्त शोध संस्थानों में एकैडेमिक मिस्कंडक्ट पैनल (एएमपी) का गठन भी अनिवार्य किया जा रहा है। यदि किसी शोधार्थी के विरूद्ध पीएचडी थीसिस नकल की शिकायत विश्वविद्यालय अथवा शोध संस्थान को लिखित रूप से प्राप्त होगी। तो सर्वप्रथम उसका प्रारंभिक तौर पर परीक्षण एएमपी कमेटी करेगी तथा यह कमेटी अपनी रिपोर्ट पीडीए कमेटी को सौंपेगी। प्रत्येक शोधार्थी को अपनी पीएचडी थीसिस जमा करते समय उसकी मौलिकता का प्रमाणपत्र देना अनिवार्य है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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