भिलाई। नईदुनिया प्रतिनिधि

श्रीराम कथा के पांचवें दिन रविवार को कैंप-1 स्थित तीन दर्शन मंदिर परिसर में आयोजित कथा में कथावाचक ने श्रीनारद व मनु सतरुपा के प्रसंग का वर्णन किया, जिसे सुन भक्तों ने जयकारें लगाए। कथावाचक ने कहा वैदिक संहिताओं में भी मनु को ऐतिहासिक व्यक्ति माना गया है।

श्रीराम कथा के दौरान तीन दर्शन मंदिर परिसर में कथावाचक संजेश्वरीदेवी ने संगीतमय श्रीराम कथा का वर्णन करते हुए श्रीनारद के बारे में बताया कि बड़े-बड़े महात्माओं के अंदर ऐसा मोह उत्पन्ना हो जाता है कि वे हंसी के पात्र बन जाते है। नारद के कामदेव पर विजय प्राप्त के बाद वे अहंकारी हो गए थे, जिसका निवारण श्रीविष्णु भगवान ने किया। कथावाचक कहा कि प्रभु कृपा से ही मोह भंग हो सकता है। श्रीराम कथा के पांचवें दिन कथावाचक ने मनु सतरुपा की कहानी का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि मनु शतरुपा सृष्टी के पहले मनुष्य थे, उनसे ही सृष्टि का संचार हुआ है। मनु का जन्म भगवान ब्रह्मा के मन से हुआ माना जाता है। मनु का उल्लेख ऋग्वेद काल से ही मानव सृष्टि के आदि प्रवर्तक और समस्त मानव जाति के आदि पिता के रूप में किया जाता है। इन्हें आदि पुरुष भी कहा गया है। वैदिक संहिताओं में भी मनु को ऐतिहासिक व्यक्ति माना गया है। संजेश्वरी देवी ने बताया कि एक बार मनु को बैराग्य जीवन व्यतित करने का सुझा तक उन्होंने अपनी पत्नि सतरुपा के साथ जंगल में तप करने चले गए बहुत दिनों की तपस्या के बाद उन्होंने प्रभु को प्राप्त किया।