भिलाई। नईदुनिया प्रतिनिधि

भिलाई टाउनशिप में बिजली व्यवस्था का जिम्मा अब बीएसपी के पास नहीं होगा। जल्द ही इसे बिजली विभाग को हैंडओवर कर दिया जाएगा। सेल चेयरमैन भिलाई से जाते-जाते इस प्रस्ताव को मंजूरी दे गए हैं।

मंजूरी मिलते ही नगर सेवाएं विभाग के उच्चाधिकारी आगे की कवायद में जुट गए हैं। जल्द ही इसका सर्कुलर जारी कर दिया गया है। इससे बीएसपी कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। गैर बीएसपी कर्मियों की तरह उनकी भी बिजली बिल हाफ कर दी जाएगी। राज्य सरकार की योजना का लाभ उठा सकेंगे।

भिलाई इस्पात संयंत्र के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड सेल के चेयरमैन अनिल कुमार चौधरी ने बिजली व्यवस्था को हैंडओवर करने पर सहमति दी। इसे जल्द से जल्द अमल में लाने का निर्देश भी दिया। अधिकारियों का दावा है कि सेल से अनुमति मिल चुकी है। कागजी प्रक्रिया को पूरा करते हुए नई व्यवस्था अमल में लाई जाएगी।

बिजली कंपनी को विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था सुपुर्द करने पर बीएसपी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इससे बीएसपी को काफी बचत होगी। तनाव से मुक्ति मिलेगी और जिन क्षेत्रों में कटियामारी और ओवरलोड से दिक्कत है, वहां सिस्टम पटरी पर आ जाएगा।

बता दें कि करीब तीन माह पूर्व दुर्ग कलेक्टर की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। बिजली कंपनी व बीएसपी के आला अफसरों ने इस पर चर्चा कर टाउनशिप की बिजली व्यवस्था हैंडओवर करने की बात पर सहमति जता दी थी। लेकिन सेल बोर्ड से अनुमति का इंतजार था। भिलाई दौरे पर आए चेयरमैन ने खुद इसे स्वीकृति दे दी है। अब सारी अटकलों पर विराम लग गया है।

55 करोड़ से ज्यादा हो सकते हैं खर्च

बिजली कंपनी के मुताबिक बीएसपी की सप्लाई लाइन ही केवल बिजली कंपनी के काम आएगा। ट्रांसफार्मर, सब स्टेशन के इन्फ्रास्ट्रक्चर में बदलाव करना ही पड़ेगा। बिजली कंपनी यह बदलाव नार्म्स के हिसाब से करेगा। बिजली कंपनी को चार सौ से अधिक ट्रांसफार्मर लगाने होंगे। वहीं कुछ खुर्सीपार व कैंप क्षेत्र में लोड का वास्तविक आंकलन संयुक्त टीम द्वारा भी कराया जाएगा। इस क्षेत्र में संभावना से ज्यादा ट्रांसफार्मर व संसाधन लग सकता है। बिजली कंपनी ने लगभग 55 करोड़ खर्च का आंकलन किया है, जो पांच से दस करोड़ बढ़ सकता है।

चार जोन में बंटेगा टाउनशिप, चाहिए भवन भी

टाउनशिप में बिजली कंपनी द्वारा बिजली की सप्लाई व्यवस्था हाथ में लेने के बाद उसके रखरखाव आदि को लेकर कार्यालय भी खोलना होगा। इसके लिए बीएसपी के क्षेत्र में उसे भवन भी चाहिए होगा। इस भवन को बीएसपी किराए से उपलब्ध कराएगा अथवा कोई अन्य व्यवस्था होगी। इसे लेकर भी अधिकारियों ने चर्चा की है। परन्तु इस पर फिलहाल कोई ठोस फैसला नहीं हो पाया है। बिजली कंपनी को नई व्यस्था के मुताबिक कर्मचारियों और अधिकारियों की भी जरूरत होगी। बताया जा रहा है कि कम से कम चार जोन में पूरे क्षेत्र को बांटना होगा।

डी-नोटिफिकेशन के बाद हैंडओवर होगी व्यवस्था

बीएसपी के पास वर्तमान में बिजली बेचने का लाइसेंस है। बिजली कंपनी को यह सप्लाई व्यवस्था सौंपने से पहले बीएसपी को अपना लाइसेंस नियामक आयोग के पास सरेंडर करना पड़ेगा। इसके लिए बीएसपी को संपूर्ण क्षेत्र, उपभोक्ता की संख्या, लोड व लाइसेंस सरेंडर करने की वजह भी बतानी होगी। इसके आधार पर ही नियामक आयोग डी-नोटिफिकेशन करेगा। बीएसपी के पास बिजली बेचने का अधिकार नहीं रह जाएगा और बिजली कंपनी अपनी व्यवस्था कर पाएगी।

कटियामारी व ओवर लोड से जर्जर हो रहे ट्रांसफार्मर

बीएसपी खुर्सीपार और कैंप क्षेत्र में बिजली की सप्लाई कर तो रहा है परन्तु उसे अपने कर्मचारियों के अलावा अन्य अवैध कब्जाधारियों से बिजली का एक रुपये भी नहीं मिल रहा है। इतना ही नहीं कटियामारी की वजह से बीएसपी के ट्रांसफार्मर और अन्य संसाधनों का नुकसान हो रहा है। ओवरलोड होने के कारण ट्रांसफार्मर जलने की घटनाएं आम हैं। इसे देखते हुए बीएसपी ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर सेल को प्रपोजल भेजा था कि कॉलोनी की बिजली व्यवस्था बिजली कंपनी को दे दी जाए। रिलायंस को उक्त व्यवस्था देने की तैयारी थी, सर्वे भी हुआ। रिलायंस ने कैंप व खुर्सीपार क्षेत्र को लेने से इंकार कर दिया था। इसलिए दोबारा राज्य की बिजली कंपनी को यह जिम्मा देने की तैयारी है।

बिजली चोरी को रोकना पड़ी चुनौती

बिजली कंपनी खुर्सीपार व कैंप में बिजली चोरी की घटना से वाकिफ है। कंपनी जानती है कि यहां नुकसान ज्यादा है, इससे बचने तगड़ा बजट खर्च करना होगा। कंपनी का मानना है कि पूरे बीएसपी क्षेत्र में बिजली योजनाओं के क्रियान्यवयन में दिक्कत आ रही है। कैंप, खुर्सीपार के अलावा रुआबांधा के मायानगरी क्षेत्र प्रशासन के निर्देश के बावजूद अब तक बिजली कनेक्शन नहीं दिया जा सका, क्योंकि पूरा क्षेत्र बीएसपी का है। और राज्य बिजली नियामक आयोग के तहत छग राज्य बिजली कंपनी की तरह बीएसपी भी एक लाइसेंसी है। उसके क्षेत्र में अनुमति के बगैर बिजली कंपनी न सप्लाई नहीं दे सकता है।

कैंप-खुर्सीपार से शुरू हुई थी बात

बिजली कंपनी ने बीएसपी प्रबंधन को कुछ माह पूर्व पत्र लिखकर जानकारी मांग चुका है कि आखिर खुर्सीपार व कैंप क्षेत्र को ही प्रबंधन क्यो बिजली कंपनी को सौंपना चाह रहा है। यह भी कहा गया है कि प्रबंधन उक्त क्षेत्र के अलावा टाउनशिप को भी बिजली व्यवस्था के लिए बिजली कंपनी को सौंप दें। जिससे किसी तरह की दिक्कत भी नहीं आएगी और जनसुविधा के लिए भी बेहतर होगा। यह पत्र बिजली कंपनी के दुर्ग ईडी कार्यालय से बीएसपी सीईओ को भेजा जा चुका है।

एक नजर में बीएसपी की बिजली व्यवस्था

10 सेक्टर टाउनशिप के और दो पटरी पार क्षेत्र में

36 हजार से अधिक बिजली कनेक्शन

200 किलोमीटर बिजली तारों का जाल

35 मेगावाट औसतन बिजली खपत

(नोटः बीएसपी एवं बिजली कंपनी के ट्रांसफार्मर केपेसिटी अलग-अलग है)

अब बिजली कंपनी को करनी होगी यह तैयारी

20 करोड़ लागत में नया इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना

50 से अधिक लगाने पड़ेंगे नए ट्रांसफार्मर

04 सब स्टेशन 33/11 केवी क्षमता के बनाने होंगे

01 डिवीजन और कम से कम छह जोन का निर्माण

50 मेगावाट लोड होने का अनुमान