भिलाई। नईदुनिया प्रतिनिधि

भिलाई इस्पात संयंत्र में ट्रेनिंग को सेवा काल में जोड़ने का मामला औद्योगिक परिवार में लंबित है। करीब पांच माह बाद भी कारपोरेट से कोई निर्देश प्राप्त न होने के कारण मामला जस का तस बना है। 2008 के पूर्व कर्मियों के कर्मियों का मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है।

इस्पात श्रमिक मंच ने इस मामले को कॉर्पोरेट ऑफिस से पत्राचार करने का निर्णय लिया है। महासचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि प्रबंधन ने 2010 के अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त ऐसे कर्मचारियों जो तकनीकी शिक्षा प्राप्त है और जिनका प्रशिक्षण अवधि सेवाकाल में नहीं जोड़ा जा चुका है। उनके मामले के जल्द निराकरण के लिए कारपोरेट में अप्रूवल के लिए फाइल भेजी है। भिलाई इस्पात संयंत्र में 2010 में अनुकंपा नियुक्ति प्रावधान के तहत उधा शिक्षित कर्मियों को भी एस-1 ग्रेड में ज्वाइनिंग दी गई थी। किंतु उनकी ट्रेनिंग को सेवाकाल में नहीं जोड़ा गया था। दोनों पक्षों ने उम्मीद जाहिर की है कि इस मामले में जल्द सकारात्मक निर्णय सामने आएगा।

वरिष्ठता हुई प्रभावित, सेल का ध्यान तक नहीं

मंच के अध्यक्ष भावसिंह सोनवानी ने बताया कि वर्ष 2008 में सेल स्तर की परीक्षा से भर्ती हुए करीब डेढ़ सौ कर्मचारियों की वरिष्ठता ट्रेनिंग को सेवाकाल में जोड़ने के आदेश के दायरे से बाहर होने के कारण प्रभावित हुई है। वर्ष 2010 में ज्वाइन करने वाले एसीटी कर्मी वर्ष 2008 में ज्वाइन करने वाले कर्मियों से सीनियर हो गए। इसी तरह डिप्लोमा इंजीनियर्स की बैच में भी वरिष्ठता की समस्या आ चुकी है। इस मामले को प्रबंधन के समक्ष पूर्व में उठाया गया था। प्रबंधन ने भी उसे स्वीकार करते हुए एक प्रपोजल सेल मुख्यालय भेजा था। इस अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

यूनियन ने सौंपी प्रभावितों कर्मियों की लिस्ट

इस्पात श्रमिक मंच ने बताया कि प्रबंधन ने वरिष्ठता प्रभावित होने के मामले में यूनियन से कर्मचारियों की सूची मांगी थी। इस्पात श्रमिक मंच के पदाधिकारियों ने प्रबंधन को ऐसे कर्मचारियों की सूची सौंपी थी। प्रभावित कर्मियों के तुलनात्मक अध्ययन के बाद स्थानीय प्रबंधन ने कारपोरेट ऑफिस इस बाबत एक फाइल भेजी थी, जिस पर अब तक कार्यवाही लंबित है।

डिग्रेडेशन की मार झेल रहे सभी कर्मियों को मिले राहत

मंच पदाधिकारियों का कहना है कि सेल में डिग्रेडेशन के कारण कर्मियों का काफी नुकसान हुआ है। सेल में भिलाई इस्पात संयंत्र में सर्वप्रथम डिग्रेडेशन लागू किया गया था। वर्ष 2003 के बाद से अपने मूल कैडर से 12 साल तक नीचे ज्वाइन करने वाले कर्मियों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रबंधन को ट्रेंनिंग को सेवाकाल में जोड़ने का लाभ 2003 से लागू किया जाना चाहिए। आज 2003 के बाद ज्वाइन करने वाले कर्मचारियों को प्रमुख यूनियनों से सिवाय आश्वासन और दिलासा के कुछ और नहीं मिला है। 2008 के बाद आदेश लागू होने से इन कर्मियों की वरिष्ठता प्रभावित ही हुई है।

Posted By: Nai Dunia News Network