भिलाई(नईदुनिया प्रतिनिधि)।

पहली बार दल्ली-राजहरा खदान में किसी इस्पात मंत्री ने कदम रखा है। इसका श्रेय धर्मेंद्र प्रधान को जा रहा है। शुक्रवार सुबह 9.30 पहुंचे और दोपहर 3.30 बजे तक खनन प्रक्रिया से लेकर फिनिशिंग तक की बारीकी को निहारते रहे। कर्मचारियों से संवाद किया और हौसला बढ़ाया। साथ ही राजहरा के भविष्य को भी तय कर दिया। कहा-खदान ही सेल की लाइफलाइन है।

खदान को हटा दिया जाए तो सेल घाटे में चला जाएगा। इसलिए इसका फायदा उठाते रहें। 'नए ओर बेनेफिसिएशन' की नींव रखी गई है। यह शुरुआत है। खदान के लिए नई टेक्नोलॉजी को लाया जा रहा है। कई और प्लांट यहां स्थापित किए जाएंगे। फाइंस को बेचकर सेल भारी मुनाफा इसी वित्तीय वर्ष से कमाएगा। इसलिए ज्यादा से ज्यादा खनन करते रहें। खदान के खराब ओर को भी नजर अंदाज नहीं कर सकते। इसे बेहतर करने के लिए और प्लांट लगाए जाएंगे। नई टेक्नोलॉजी से सीलिका का प्रतिशत कम करके घाटे को दूर कर लिया जाएगा। साथ ही फाइंस बेचकर प्रॉफिट बढ़ा लेंगे इसलिए ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्शन करें।

दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे मंत्री दूसरे दिन भिलाई से राजहरा खदान के लिए रवाना हुए। वहां, डीप माइनिंग को करीब से देखा। झरन दल्ली माइंस के बाद दल्ली के व्यू प्वाइंट पर पहुंचे। यहां से खदान और टाउनशिप के नजारे को करीब दस मिनट तक निहारते ही रह गए। इसके बाद 2100 टन प्रति घंटा के जारेट्री क्रसर को देखने गए। यहां जाने का कोई प्रोटोकॉल नहीं था।

खदान वाले बहुत सज्जन, पर्सनल के तो महासज्जन...

कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दौरान मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि खदान का विकास किया जाए। यह सेल की लाइफलाइन है। इसे महत्व देना चाहिए। अधिकारियों को निर्देशित किया कि माइंस के लिए अच्छी योजना बनाकर लेकर आएं। खदान में काम करने वाले कार्मिक कितने सज्जन हैं। कभी कुछ मांगते नहीं हैं। वहीं, पर्सनल डिपार्टमेंट तो महासज्जन है, जो बिना मांगे कुछ देता ही नहीं है। इसलिए खदान के कार्मिकों की व्यवस्था को और बेहतर किया जाए।

साहब! जिंदगी यहीं काटेंगे, लीज दीजिए

कर्मचारियों की तरफ से राजहरा टाउनशिप में हाउस लीज देने की मांग की गई। यह सुनते ही मंत्री ने कहा-माइंस के लिए लीज मांग रहे हैं। यहां के लिए क्यों लीज मांग रहे हैं, भिलाई में मांगो। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कार्मिक का जवाब मार्मिक था। मंत्री से उन्होंने कहा-राजहरा में नौकरी करते हुए जिंदगी कट रही है, इसलिए लीज भी यहीं चाहिए। अधिकारियों के साथ बीएसपी ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष व सेफी चेयरमैन एनके बंछोर भी रहे।

एक और खुलेगा डीएवी स्कूल, सुधरेगा अस्पताल

कर्मचारियों से बातचीत के दौरान सेल चेयरमैन अनिल कुमार चौधरी ने जानकारी दी कि खदान एरिया के लिए कई प्लान है। यहां एक और डीएवी स्कूल खोलने की प्रक्रिया चल रही है। तैयारियां पूरी होते ही इसे चालू किया जाएगा। साथ ही अस्पताल की व्यवस्था को भी बेहतर किया जाएगा ताकि खदान के कार्मिकों को किसी तरह की दुश्वारी न होने पाए। चेयरमैन ने कहा-हां हम मानते हैं कि बगैर खदान सेल में प्रॉफिट संभव नहीं है। वहीं, नगर पालिका की तरफ से भी प्रतिनिधिमंडल मंत्री से मिलकर व्यवस्था बेहतर करने की मांग की।

गोद लिए गए बच्चों और बेटियों से भी मिले

राजहरा स्थित बीएसपी आदिवासी छात्रावास में संयंत्र द्वारा गोद लिए गए आदिवासी छात्रों से मुलाकात की।

रावघाट व राजहरा के वनांचल क्षेत्रों से बीएसपी के सीएसआर गतिविधियों के तहत प्रतिवर्ष गोद लिए जाने वाले बीस नर्सिंग छात्राओं से मुलाकात की।

महिला समाज की अध्यक्ष मैत्री सूत्रधार, सेक्रेटरी ज्योति वर्मा, कोषाध्यक्ष राजेश्वरी पसीने, उपाध्यक्ष चैताली मंडल, अरुणा रमेश ने स्वागत किया।

खदान क्षेत्र में जगन्नाथ मंदिर का भूमि-पूजन किया। वहीं, अंतागढ़ में संयंत्र एवं डीएह्वी द्वारा संचालित अंग्रेजी माध्यम स्कूल के छात्रों और शिक्षिकाओं से भी मिले।

माइंस में चल रहे सीएसआर गतिविधियों और कार्यों की जानकारी प्राप्त की।

रिसर्च और जटिल प्रक्रिया को अपनाया

सिलिका में कमी लाने के लिए विकसित समाधान खोजने के लिए बीएसपी ने आरडीसीआईएस को परियोजना सौंपी थी। इसने बेंच स्केल टेस्ट वर्क के आधार पर फ्लो शीट विकसित किया।

इस फ्लो शीट को राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) हैदराबाद के अनुसंधान व विकास केंद्र के द्वारा दल्ली माइंस के मटेरियल को (-) 10 मिमी के 15वें सेम्पल पर पायलट स्केल टेस्ट के माध्यम से सत्यापित किया गया था।

इसके बाद कंसल्टेंट सीईटी-रांची द्वारा टेंडर स्पेसिफिकेशन तैयार किया गया।

सीएसडब्ल्यूपी दल्ली में बेनेफिसिएशन सुविधाएं प्राप्त करने के लिए यह परिजोजना की अनुमानित लागत 153.87 करोड़ होगी। अवार्ड शुरू करने से लेकर इसके स्थापना कार्यक्रम 20 महीने का होगा।

नए बेनेफिसिएशन प्लांट की विशेषताएं

सिर्फ -10 मिमी फाइंस के लिए बेनेफिसिएशन प्रक्रिया की जाएगी, क्योंकि इसी में गैंग कंटेंट (एल्यूमिना और सिलिका) सबसे अधिक पाया जाता है। प्रस्तावित प्लांट की इनपुट क्षमता लगभग 900 टीपीएच है।

बेनेफिसिएशन संयंत्र के लिए सेवाओं के क्षेत्र में साइज सेपरेशन उपकरण, डी-स्लाइमिंग उपकरण और मेगनेटिक सेपरेशन उपकरण के अलावा आवश्यक सहायक उपकरण शामिल होंगे।

-10 मिमी फाइंस की वास्तविक फीड में आयरन का प्रतिशत 55 से 59 प्रतिशत तक प्राप्त होगा। प्रस्तावित बेनेफिसिएशन संयंत्र के आउटपुट (-10 मिमी बेनेफिसिएटेड फाइंस) में परिकल्पित आयरन का प्रतिशत 64 प्रतिशत से अधिक या उसके बराबर होगा।

इसके अंतर्गत प्रक्रिया जल जीरो डिस्चार्ज सिद्घांत में होगी। इस प्रक्रिया में उपयोग किए गए पानी को रिसाइकल करके पुनः उपयोग किया जाएगा।

Posted By: Nai Dunia News Network