दुर्ग (नईदुनिया प्रतिनिधि)। रेल पटरियों पर जल्द ही साइकिल दौड़ती नजर आएगी। रेलवे ने विशेष तरह की साइकिल तैयार किया है, जो केवल ट्रैक पर ही दौड़ेगी। इसके लिए विभागीय अधिकारियों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल में साइकिल को लेकर मंथन भी शुरू हो गया है। विभागीय आदेश आने के बाद साइकिल को ट्रैक पर दौड़ाया जाएगा।

गैंगमैन अभी रोजाना रेलवे ट्रैक पर पैदल ही चलते हैं। साइकिल आने के बाद गैंगमैन और ट्रैकमैन को भारी भरकम झोला उठाने से छुटकारा मिलेगा। साथ ही समय की भी काफी बचत होगी। वर्तमान में गैंगमैन व ट्रैकमैन रेल की पटरियों में आई खराबी को दुरुस्त करने के लिए कई किलोमीटर का सफर पैदल ही तय करते हैं, ताकि कहीं रेल की पटरियों में खराबी हो तो उसे दुरुस्त किया जा सके। बता दें कि रेलवे के एक सिविल इंजीनियर द्वारा हाल ही में ट्रैक मेंटेनेंस के लिए साइकिल तैयार करने का वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हुआ है। इस साइकिल की मदद से कई किमी तक ट्रैक मेंटेनेंस में गैंगमैन व ट्रैकमैन को सुविधा मिलने की बातें भी कही जा रही है। इस साइकिल का उपयोग रायपुर रेल मंडल में हुआ तो गैंगमैन व ट्रैकमैन को काम में सुविधा मिलेगी।

0 रोजाना 15 किलोमीटर का पैदल सफर

रायपुर रेल मंडल में गैंगमैन व ट्रैकमैन की संख्या करीब 650 हैं। ट्रैकमैन व गैंगमैन को रोजाना 15 किलो मीटर पैदल चलकर पटरियों का निरीक्षण करना होता है। निरीक्षण के दौरान कोई खामियां मिलती है तो उसे मौके पर ही सुधारते हैं। इसके बाद आगे बढ़ते हैं। ट्रैकमैन व गैंगमैन को 15 किलोमीटर का सफर करने में छह से सात घंटे लग जाते हैं। यहीं नहीं कंधे पर भारी भरकम झोला भी उठाना पड़ता है। उक्त साइकिल रेल मंडल में आने से ट्रैकमैन व गैंगमैन को काफी राहत मिलेगी। साथ ही अपने कार्यों को आसानी से अंजाम दे सकेंगे।

0 इस तरह किया गया है तैयार

बता दें कि अजमेर रेलवे जोन में साइकिल से ही ट्रैक को मेंटेनेंस किया जा रहा है। साइकिल को बनाने में रेल कार्ट के दो पुराने पहिये और लोहे के दो पाइपों का उपयोग हुआ है। लोहे के पाइप को हिसाब से काटकर इसमें रेल कार्ट के पुराने पहियों को जोड़ दिया गया। उसी को एक पुरानी साइकिल से नट बोल्ट के साथ जोड़ा गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार साइकिल पर दो व्यक्ति बैठ सकते हैं। इसकी औसत गति 10 किलोमीटर प्रति घंटा है, लेकिन इसे अधिकतम 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी चलाया जा सकता है। साइकिल ज्यादा वजन भी नहीं है। यदि पटरी पर चलाते वक्त जब सामने से काई गाड़ी आ रही हो तो इसे उठाकर साइड में रखा जा सकता है।

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ट्रैक मेंटेनेंस में रेल साइकिल का उपयोग करने का कोई आदेश नहीं आया है। आदेश आने के बाद ही इस ओर काम किया जाएगा। वर्तमान में ट्रैकमैन व गैंगमैन पैदल ही पटरियों का निरीक्षण करते हैं।

-शिव प्रसाद पंवार, पीआरओ, रायपुर

Posted By: Nai Dunia News Network

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