भिलाई। Bhilai News: जिले के देहात क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हरी सब्जियों की खेती की जाती है, लेकिन अभी यहां के व्यापारी लोकल बाजार से ज्यादा ओडिशा, झारखंड, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में सब्जी भेज रहे हैं। इसके पीछे यह कारण है कि लोकल बाजार की तुलना में व्यापारियों को अन्य प्रदेशों में सब्जियों की ज्यादा कीमत मिल रही है। यहां से लौकी, भांटा, कुम्हड़ा, कुंदरू, टमाटर और मिर्ची जैसी हरी सब्जियों का निर्यात किया जा रहा है। यहां की तुलना में सब्जियों को बाहर भेजने पर तीन से चार रुपये किलो तक ज्यादा का मुनाफा हो रहा है। इसलिए व्यापारियों ने अन्य प्रदेशों में निर्यात पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।

बता दें कि हर साल अक्टूबर के बाद से हरी सब्जियों की कीमतों में गिरावट का दौर चालू हो जाता था, लेकिन इस बार नवंबर के एक सप्ताह बीतने के बाद भी यहां के लोगों को सब्जियों की कीमत में कोई खास राहत नहीं मिली है। इसका कारण यह है कि जिले के करीब 100 से अधिक सब्जी उत्पादक अभी ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, झारखंड और आंध्रप्रदेश तक सब्जियों का निर्यात कर रहे हैं।

व्यापारियों के यहां की मंडी की तुलना में अन्य प्रदेशों में ज्यादा कीमत मिल रही है। इसलिए वे ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए बड़े पैमाने पर सब्जियों का निर्यात कर रहे हैं। सब्जी व्यापारियों का कहना है कि नवंबर के आखिर तक सब्जियों की पैदावार बढ़ने पर उसकी कीमतों में भी कमी होने की उम्मीद है। यहां उल्लेखनीय है कि जिले के सब्जी उत्पादक लौकी, कुम्हड़ा, भांटा, टमाटर, कुंदरू और मिर्ची जैसी हरी सब्जियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन करते हैं। अभी इन्हीं सब्जियों को अन्य प्रदेशों में भी भेजा जा रहा है।

सब्जी की ज्यादा कीमतों का यह भी कारण

कुछ ही चिल्हर विक्रेता हैं जो सीधे बाड़ी से सब्जी लाते हैं। मंडी के थोक व्यापारी और दलाल बाड़ियों से काफी ज्यादा मात्रा में सब्जी उठाते हैं। वे अपना मुनाफा कमाकर चिल्हर व्यापारियों को सब्जी देते हैं। इसके बाद चिल्हर व्यापारी अपना मुनाफा जोड़कर ग्राहकों को बेचते हैं। इस तरह से सब्जी की कीमत दोगुनी से भी ज्यादा हो जाती है। उदाहरण के तौर पर देखें तो बाड़ी में लौकी पांच से छह रुपये किलो मिल रहा है, लेकिन वो ही सब्जी आम ग्राहकों को 15 से 20 रुपये में खरीदनी पड़ रही है। ऐसी ही स्थिति अन्य हरी सब्जियों को लेकर है।

इन सब्जियों में इतने का कमा रहे मुनाफा

सब्जी कीमत (स्थानीय बाजार में) कीमत (अन्य प्रदेशों में)

लौकी पांच से छह रुपये प्रति किलो सात से आठ रुपये प्रति किलो

भांटा 20 से 22 रुपये प्रति किलो 24 से 25 रुपये प्रति किलो

कुम्हड़ा 10 से 12 रुपये प्रति किलो 13 से 14 रुपये प्रति किलो

कुंदरू 15 से 17 रुपये प्रति किलो 18 से 20 रुपये प्रति किलो

टमाटर 450 रुपये प्रति कैरेट 650 रुपये प्रति कैरेट

अन्य प्रदेशों में यहां की सब्जियों की मांग ज्यादा है। साथ ही यहां की तुलना में कीमत भी अच्छी मिल जाती है। इसलिए यहां से ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, झारखंड और आंध्रप्रदेश तक सब्जियां जाती हैं। इसके बाद भी यहां की मंडियों में भी पर्याप्त सब्जियां जा रही हैं।

- रितेश टांक, अध्यक्ष फल-सब्जी उत्पादक संघ

Posted By: Himanshu Sharma

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