भिलाई, नईदुनिया प्रतिनिधि। भिलाई इस्पात संयंत्र के ठेका श्रमिकों का शोषण अब रोकने में कामयाबी मिल सकती है। केंद्र सरकार द्वारा जारी वेज कोड को लेकर नई उम्मीद जग गई। समय पर वेतन नहीं मिलने और न्यूनतम वेतन में कटौती का टेंशन खत्म होने जा रहा है। अगर, कोई ठेकेदार पूरा वेतन समय पर नहीं देता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी तय है।

नए नियम के तहत ठेकेदार और एजेंसी को ही साक्ष्य देने होंगे कि श्रमिक को पूरा वेतन और सुविधाएं दी जा रही है। ऑनलाइन पेमेंट को अनिवार्य कर दिया गया। अब श्रमिक को किसी तरह का साक्ष्य देने की जरूरत नहीं, इसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी पर होगा।

भिलाई इस्पात संयंत्र में करीब 35 हजार ठेका श्रमिक हैं। ये उत्पादन प्रक्रिया से लेकर प्रोजेक्ट तक काम कर रहे हैं। इनकी सबसे बड़ी समस्या ये थी कि न्यूनतम वेतन का केस दर्ज नहीं किया जाता था। राज्य सरकार और केंद्र सरकार के श्रम मंत्रालय के बीच इनका मामला अटका रहता था। एक-दूसरे पर मामला टाल दिया जाता था। नियमित कर्मचारियों को लेकर कोई समस्या नहीं थी। लेकिन ठेका श्रमिकों के सामने बड़ी अड़चन थी।

इसका फायदा ठेका एजेंसी और ठेकेदार आसानी से उठाते रहे। इससे न तो समय पर वेतन मिल पाता था और न ही न्यूनतम वेतन का भुगतान होता था। भिलाई इस्पात संयंत्र के ही कई विभागों में श्रमिक को उनका न्यूनतम वेतन न देकर कम दिया जाता है। इसकी शिकायत तक मंत्रालय में दर्ज नहीं हो पाती थी।

बीएसपी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता ने का कहना है कि सरकार का यह फैसला श्रमिक हित में है। इसको लेकर यूनियन श्रमिकों के बीच जागरुकता अभियान चलाएगी। लंबित सभी प्रकरण को श्रम कार्यालय तक ले जाने का दावा किया है।

वेज कोड के बारे में ये भी जानिए

जिस कंपनी में दस से ज्यादा श्रमिक होंगे, वहां वेज कोड लागू होगा

पांच घंटे भी काम कराने पर पेमेंट तय कराना होगा

तय तारीख पर ही वेतन का भुगतान करना होगा

दिहाड़ी करने वालों को दसी दिन पेमेंट करना होगा

सप्ताह के अंत में साप्ताहिक काम करने पर वेतन देना होगा

समय पर वेतन नहीं देने पर जुर्माना लगाया जाएगा

जरूरत कटौती के साथ ही वेतन देने की समय सीमा तय

मामलों का निपटारा करने के लिए एक या एक से अधिक अधिकारी रखने होंगे

वेतन घटाने, बोनस न देने, वेतन की कटौती के मामलों में साबित करने की जिम्मेदारी नौकरी देने वालों की होगी

पहले छह माह के भीतर ही शिकायत का प्रावधान था, अब दो साल तक शिकायत की जा सकती है

हर पांच साल में न्यूनतम वेतन वृद्घि करना अनिवार्य है

वेतन देने के लिए टेक्नोलॉजी यानी ऑनलाइन पद्घति अपनानी होगी

ये चार एक्ट हुए सामाहित

मिनिमम वेजेज एक्ट

पेमेंट ऑफ वेजेज एक्ट

पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट

इक्युअल रैम्यूनरेशन एक्ट

श्रमिक नहीं मालिक सिद्घ करेंगे ईमानदारी

यूनियन का कहना है कि सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इसमें मालिक पर नकेल कसी गई है। मालिक को ही सिद्घ करना होगा कि वह न्यूनतम वेतन समय पर दे रहा है। बकायदा, इसका साक्ष्य देना होगा। असंगठित क्षेत्र में इससे काफी राहत मिलेगी। अब वेतन विसंगति को दूर किया जा सकेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि केंद्र द्वारा तय होने वाली न्यूनतम राशि से कम कोई भी राज्य न्यूनतम राशि तय नहीं कर सकता।

न्यूनतम 18 हजार वेतन की जगी उम्मीद

बीएसपी कर्मचारियों का कहना है कि न्यूनतम वेतन हजार वेतन देने की उम्मीद जग गई है। बदलते प्रावधान के तहत कहीं न कहीं श्रमिकों को बड़ा लाभ मिल सकता है। कुछ आशंकाएं भी जताई जा रही है। वहीं, न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर सकारात्मक सोच भी जाहिर की जा रही है। बता दें कि इस बिल में श्रमिकों के वेतन से जड़े चार मौजूदा कानूनों-पेमेंट्स ऑफ वेजेस एक्ट-1936, मिनिमम वेजेस एक्ट-1949, पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट-1965 और इक्वल रेमुनरेशन एक्ट-1976 को एक कोड में शामिल करने की तैयारी है। कोड ऑन वेजेज में न्यूनतम मजदूरी को हर जगह एक समान लागू करने का प्रावधान है। इससे हर श्रमिक को पूरे देश में एक सामान वेतन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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