भिलाई, नईदुनिया प्रतिनिधि। भिलाई इस्पात संयंत्र का इस्पात उत्पादन लौह अयस्क की कमी की वजह से प्रभावित हो रहा है। लगातार उत्पादन का ग्राफ भी गिरता जा रहा है। संकट के दौर में दल्ली-राजहरा खदान से अच्छी खबर आ रही है। यहां डेम में डंप करीब 12 लाख टन से ज्यादा लौह अयस्क का कचरा इसी महीने बाहर निकाला जा सकता है।

स्लाइम बेनिफिसिएशन यूनिट-एसबीयू में प्रोसेसिंग करके उच्च क्वालिटी का फाइंस आसानी से निकाला जा सकेगा। फाइंस के साथ अन्य रसायनिक मटेरियल का मिश्रण करके सीधे ब्लास्ट फर्नेस में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे बड़ी राहत यह होगी कि आरएमडी से मंगाए जा रहे फाइंस पर निर्भरता खत्म होनी शुरू हो जाएगी। रॉ-मटेरियल डिवीजन-आरएमडी से इस वक्त करीब 1200 रुपये प्रति टन भाड़ा देका फाइंस भिलाई लाया जा रहा है। इसकी सीधेतौर पर बचत हो सकेगी।

बीएसपी जनसंपर्क विभाग के डीजीएम सुबीर दरिपा बताते हैं कि आयरन ओर की कमी नहीं है। फाइंस को लेकर समस्या है। इसका समाधान भी राजहरा से हो जाएगा। उम्मीद है कि इसी महीने वहां फाइंस तैयार करने वाला सिस्टम चालू कर लिया जागएा। फाइनल टेस्टिंग अंतिम चरण में है।

फर्नेस-1 में पांच दिनों में औसत 1738 टन उत्पादन

ब्लास्ट फर्नेस-8 का उत्पादन इस वक्त सबसे ज्यादा हो रहा है। इसके बाद फर्नेस-7, 6 और एक का नंबर है। फर्नेस-4 व 5 कैपिटल रिपेयर पर है। बीएसपी प्रबंधन का कहना है कि संयंत्र की धमन भट्ठी क्रमांक-1 सुचारू रूप से प्रचालन में है। इसका उत्पादन बढ़ाया जाएगा। वर्तमान में बंद करने की कोई योजना नहीं है। पांच सितंबर को फर्नेस-1 ने 1540 टन हॉट मेटल का उत्पादन किया। सितंबर के प्रथम पांच दिनों में औसत दैनिक उत्पादन 1738 टन रहा।

नक्सली धमकी के बाद छत्तीसगढ़ में अब सांसदों की सुरक्षा का होगा रिव्यू

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम में रायगढ़ जिला राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित