भिलाई। नईदुनिया प्रतिनिधि

भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) में निर्मित रेल पटरी से सेलम स्टील प्लांट में बर्तन बनाया जा रहा है। भारतीय रेलवे के मानक पर खरा नहीं उतरने वाली पटरी को गलाकर स्टेनलेस स्टील के बर्तन बनाए जा रहे हैं। इससे भारतीय इस्पात प्राधिकरण-सेल की इकाई सेलम संयंत्र को उच्च गुणवत्तायुक्त कच्चा माल उपलब्ध हो रहा है। स्टील के बर्तन की गुणवत्ता भी सुधर रही है। सेल की छवि बेहतर हो रही है। साथ ही भिलाई इस्पात संयंत्र में डंप रेल पटरी की निकासी होने से जगह खाली हो रही है।

भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारी बता रहे हैं कि कोरोना संक्रमण काल की वजह से रेलवे ने छोटी साइज की रेल पटरी की मांग कम कर दी है। इससे रेल पटरी परिवहन का भार भी कम हो गया। अब यार्ड में रखी रेलवे द्वारा खारिज पटरी को बाहर निकाला जा रहा है। पहले फ्रेश पटरी भेजने की प्रक्रिया में इस ओर सफलता नहीं मिल पा रही थी। अब मौका मिलते ही इस काम को तेजी से किया जा रहा है।

बीएसपी रोज करीब एक हजार टन से ज्यादा रेल पटरी तमिलनाडु स्थित सेलम स्टील प्लांट को भेज रहा है। बताया जा रहा है कि यार्ड में करीब 30 हजार टन से ज्यादा पटरी डंप है। फ्रेश रेल पटरी की कीमत प्रति टन 60 हजार रुपये है। कोरोना संक्रमण काल की वजह से रेलवे की परियोजनाओं पर विराम लगा हुआ है। रेलवे भिलाई इस्पात संयंत्र को रेल पटरी का आर्डर भी कम दे रहा है। ऐसे में बीएसपी अपने यहां डंप रेल पटरी को बेचकर जगह खाली कर रहा है।

अधिकारी बता रहे हैं कि स्टेनलेस स्टील में क्रोमियम और मैगनीज का मिश्रण होता है। भिलाई इस्पात संयंत्र निर्मित रेल पटरी में मैगनीज होता है। रेल पटरी को गलाने के बाद सिर्फ क्रोमियम मिलाकर इसको बर्तन के लायक तैयार करते हैं। इससे सेल को सस्ते दर पर कच्चा माल उपलब्ध हो रहा है।

सेलम को पटरी भेजने का है ये तीन कारण

0भिलाई इस्पात संयंत्र का स्टाक यार्ड खाली करना है ताकि फ्रेश रेल पटरी रखने में दिक्कत न हो

0सेल की इकाई होने से सेलम को देते हैं प्राथमिकता, खुले बाजार में भी बिक रहा माल

0रेलवे से आर्डर कम होने पर गोदाम खाली करना हुआ आसान, पहले होती थी दिक्कत

आप भी जानिए कामर्शियल रेल पटरी के बारे में

भिलाई इस्पात संयंत्र के जनसंपर्क विभाग का कहना है कि भारतीय रेलवे मानक के अनुरूप ही रेल पटरी लेती है। अनुबंध के मुताबिक भारतीय रेलवे को दी जाने वाली पटरी किसी और को नहीं बेच सकते हैं। ढलाई के दौरान रेलवे को लगता है कि पटरी में कहीं कुछ कमी है तो उसे वह बाहर कर देती है। इस पटरी को कामर्शियल रेल पटरी बोलते हैं। फिर, इसे कहीं भी बेचा जा सकता है। निजी कंपनियां भी इसे अपने इस्तेमाल के लिए खरीदती हैं। इसी पटरी को सेलम स्टील भेजा जा रहा है, जिससे वहां स्टेनलेस स्टील का बर्तन बनाया जा रहा है।

सेलम निर्भर है सेल इकाइयों पर

भारतीय इस्पात प्राधिकरण-सेल के अधिकारी बता रहे हैं कि सेलम स्टील प्लांट के पास न खदान है और न ही एकीकृत संयंत्र जैसी सुविधा। वह दूसरी इकाइयों पर निर्भर है। सेलम के आर्क वेल्डिंग फर्नेस में रेल पटरी व अन्य को गलाकर बर्तन का उत्पादन किया जाता है। भिलाई इस्पात संयंत्र सेलम को स्लैब लंबे समय से भेजता रहा है। अब इसमें रेल पटरी को भी शामिल किया जा चुका है। स्लैब से ही स्टील की चादर आदि का उत्पादन होता है।

वर्जनः

भिलाई इस्पात संयंत्र सेलम प्लांट को स्लैब के साथ कामर्शिल रेल पटरी भेज रहा है। इससे बीएसपी के साथ सेलम को आर्थिक रूप से फायदा हो रहा है। बीएसपी की जगह खाली भी हो रही है। सेलम पूरी तरह से दूसरी इकाइयों पर निर्भर है। यहां की पटरी से वहां बर्तन का उत्पादन किया जा रहा है।

सुबीर दरिपा, महाप्रबंधक-जनसंपर्क विभाग-बीएसपी

इन आंकड़ों को भी जानिए

17,980ः टन कार्मिशयल रेल पटरी अक्टूबर तक भेज चुके

30,000ः टन से ज्यादा कामर्शियल रेल पटरी डंप होने का अनुमान

2,500ः टन स्लैब और रेल पटरी एक रैक से सेलम भेजते हैंज

60ः टनः रेल पटरी एक वैगन में आता है, 40 वैगन से एक रैक बनता है

Posted By: Nai Dunia News Network

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