भिलाई। जी हां इसे आप चक दे इंडिया कह सकते हैं। कहानी वैसी ही है, गांव की लड़कियां वह भी कबड्डी, सुनकर लोगों को आश्चर्य होता होगा, पर भिलाई चरोदा निगम क्षेत्र के गांव मोरिदा की तीस लड़कियों ने न केवल विलुप्त होती कबड़ी को जिंदा कर दिया,बल्कि लोगों की सोच भी बदल दी। इसके पीछे कमाल रहा इनके कोच जितेंद्र सारथी का।

मोरिद भिलाई तीन चरोदा का ग्रामीण वार्ड है। वैसे तो यह गांव खेल, सांस्कृति, धार्मिक, साहित्यिक, राजनीतिक मामले में बेहद जागरूक माना जाता है। इस गांव में कभी कबड्डी के प्लेयर हर घर में थे। गांव की कबड्डी टीम का बड़ा जलवा था। दूर-दूर तक धाक थी, पर एक समय ऐसा आया कि धीरे-धीरे कबड्डी खत्म होता गया। कबड्डी का स्थान क्रिकेट ने ले लिया।

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कोच ने टीम को निखारा

चक दे इंडिया याद है न आपको। कैसे एक हाकी कोच लड़कियों को का मनोबल बढ़ाकर भारतीय टीम को हाकी में विश्वविजेता बना देता है। ठीक वैसा ही प्रयास कर रहे हैं जितेंद्र सारथी। पूर्व कबड्डी खिलाड़ी। जितेंद्र का सपना था कबड्डी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने का, पर ऐसा हो नहीं सका। मोरिद के मीडिल स्कूल में स्वीपर की नौकरी लग गई। स्कूल की छोटी-छोटी बधिायों में उन्होंने अपना सपना ढूंढा। स्कूल प्रबंधन को तैयार किया। गांव के सनद साहू व राजू नेताम का साथ मिला। दस साल पूर्व तीस बच्चियों को लेकर एक टीम बनाई। नाम दिया नवीन बालिका कबड्डी क्लब मोरिद। रोज शाम इन बधिायों की प्रेक्टिस शुरू हुई।

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दो की नौकरी, दस खेल चुकी हैं नेशनल

डेली प्रेक्टिस व खुद बच्चियों में लगन का नतीजा रहा है कि आज इनमें से दो लड़कियां कीर्ति सारथी व तामेश्वरी साहू की स्पोर्टस कोटे में सरकारी नौकरी लग गई। तामेश्वरी व कीर्ति के साथ-साथ ज्योति साहू, तारिणी सारथी, मनीषा यादव, सुमन निषाद, मौसमी ठाकुर, त्रिवेणी बाग, चित्ररेखा सिन्हा, तृप्ति ठाकुर नेशनल खेल चुकी है। इसमें मौसमी ठाकुर तो स्कूली गेम खेलों इंडिया खेलो में दो दो बार सिल्वर मैडल जीत चुकी है। त्रिवेणी बाग संभावना वाली खिलाड़ी है।भिलाई-चरोदा पालिका के पूर्व अध्यक्ष व कबड्डी के पूर्व नेशनल प्लेयर शशिकांत बघेल द्वारा संचालित भिलाई चरोदा निगम कबड्डी संघ से भी यह लड़कियां कबड्डी खेलती है।

वर्जन

-आसपास कही भी लड़कियों की टीम नहीं है। मोरिद की लड़कियां कमाल कर रही है। ओपन व स्कूली दोनों खेल में अच्छा प्रदर्शन कर रही है।

शशिकांत बघेल, अध्यक्ष

भिलाई चरोदा निगम कबड्डी संघ

-लड़कियों में खेलने का जुनून देखकर उन्हें प्रोत्साहित किया। लड़कियों में प्रतिभा है। घर वालों व ग्रामीणों ने भी प्रोत्साहित किया।

जितेंद्र सारथी, कोच

-गांव में बच्चे कबड्डी खेलते थे। उन्हें देखकर मैंने भी खेलना शुरू किया। पता चला कि मोरिद में लड़कियों को कबड्डी सिखाया जाता है, तब से यही खेल रही हूं।

तारणी साहू, नेशनल प्लेयर

-मामा ने प्रोत्साहित किया। तब हम लड़कियों ने खेलना शुरू किया। बचपन से ही जुनून था। जितेंद्र सर से काफी कुछ सीखने को मिला।

कीर्ति सारथी, नेशनल प्लेयर

Posted By: Nai Dunia News Network

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