Chhattisgarh News : अंशुल तिवारी नईदुनिया, भिलाई। आइआइटी भिलाई के विद्यार्थियों ने एक ऐसा गेमिंग एप बनाया है जो खेलने वाले द्वारा बार-बार दोहराई जा रहीं गलतियों की गणना और विश्लेषण कर अल्जाइमर (भूलने की बीमारी) का पता लगाएगा। इससे व्यक्ति को वक्त रहते इलाज कराने में मदद मिलेगी। यह एप बनाकर विद्यार्थियों ने हैकथॉन में एक लाख रुपये का पहला पुरस्कार भी जीता है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) भिलाई की इंस्टीट्यूट इनोवेशन काउंसिल (आइआइसी) द्वारा स्मार्ट इंडिया हैकथॉन (एसआइएच) में भाग लेने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया। आइआइसी के सदस्य डॉ. धीमान साहा ने बताया कि संस्थान के बीटेक विद्यार्थियों ने न केवल इसमें भाग लिया, बल्कि टीम ने खिताब भी अपने नाम किया है। छात्रों ने अल्जटेक नाम का एक मोबाइल गोमिंग एप्लीकेशन तैयार किया।

यह एप व्यक्ति की मेमोरी, हाथ और आंख के समन्वय, अमूर्त सोच आदि का परीक्षण करता है। यह गेम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करता है। गेम के जरिए खेलने वाले की याद रखने की क्षमता, गलतियों के दोहराब का विश्लेषण किया जाता है। टीम के मुखिया अशिताभ मिश्रा के अनुसार यह गेम एप भारत में अल्जाइमर के अनुसंधान की क्षमता रखता है। इसके अलावा यदि कोई रोगी जोखिम में है तो एप्लीकेशन बीमारी को पहचान कर निकटतम प्रमाणित न्यूरो चिकित्सकों और डॉक्टरों के बारे में भी जानकारी देता है।

अलग करने के विचार ने बनाया अव्वल छप्पन घंटे की चुनौतीपूर्ण हैकथॉन से जूझने के बाद टीम ने यह खिताब और एक लाख रुपये नकद पुरस्कार भी जीता। टीम लीडर अशिताभ ने बताया कि जब हैकथॉन में हिस्सा लेने के लिए कहा गया तो टीम ने तय किया कि कुछ अलग करेंगें और यूजर बेस्ड काम किया जाए।

सभी ने अल्जाइमर पर काम करना तय किया। इसके बाद टीम के सदस्यों ने अल्जाइमर से संबंधित अध्ययन किया। आइआइटी भिलाई के निदेशक प्रो.रजत मूना ने कहा कि विद्यार्थियों के तकनीकी इनोवेशन से भविष्य में दुनियाभर के लाखों लोगों को प्रभावित करने वाली पुरानी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी से लड़ने में मदद मिलेगी। एप बनाने वाली आइआइटी भिलाई की डेवलपर टीम में रोहित कर, स्मर्णा पंकंती, हेमंत मीणा, शुभम अग्रवाल, पवन कुमार और अशिताभ मिश्रा शामिल रहे।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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