अंशुल तिवारी, भिलाई। पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत मिशन की देश भर में धूम है। चाहे सरकारी प्रयास हों या निजी, सभी अपने-अपने स्तर पर इसे सफल बनाने के लिए जुटे हुए हैं। जुटे भी क्यों ना, आखिर स्वच्छता का संबंध हर व्यक्ति से सीधे जो है। लेकिन भिलाई की वेलफेयर फाउंडेशन 'कोशिश एक पहल' धमधा विकासखंड के ग्राम माटरा में जिस फॉर्मूले का प्रयोग कर रही है, वह कमाल का है। दरअसल, संस्था हर रविवार को माटरा गांव के युवाओं के बीच क्रिकेट मैच कराती है। इसमें नियम के मुताबिक जो टीम हारती है, उसे हफ्ते भर गांव की सफाई करनी पड़ती है। यानी खेल का खेल और स्वच्छता अलग।

माटरा ही नहीं, इससे आसपास के गांवों में भी स्वच्छता को लेकर जागरूकता बढ़ती जा रही है। संस्था इस फॉर्मूले को देश के सामने मॉडल के रूप में पेश करना चाहती है। कहते हैं, तकनीक कठिन काम को भी सरल बना देती है। संस्था ने स्वच्छता को लेकर जिस तरह की पहल शुरू की है, उसका प्रभाव भी नजर आने लगा है। माटरा में होने वाले क्रिकेट मैच को लेकर टीम के युवाओं ही नहीं, गांव के ग्रामीणों, यहां तक कि महिलाओं में भी काफी रोमांच रहता है।

गांव के मैदान में जब दो टीमें उतरती हैं, तो पूरा गांव तालियों से उनका स्वागत करता है। स्वच्छता दूत, स्वच्छता के सिपाही की तरह उनका स्वागत करता है। इसके पहले दोनों टीमें गांव में मार्चपास्ट करती हैं। उद्देश्य यही कि सभी जान जाएं कि मैच शुरू होने वाला है। ऐसा होते ही देखते ही देखते मैदान के चारों तरफ भीड़ जुट जाती है। खास बात यह कि यहां होने वाले मैच में उपविजेता टीम को भी उतना ही सम्मान मिलता है, जितना कि विजेता को।

इसके पीछे वजह यह है कि वही उपविजेता टीम हफ्ते भर गांव की सफाई का जिम्मा उठाती है, जिसका लाभ सभी को मिलता है। डस्टबिन और झाडू बांटकर दुकानदारों को किया प्रेरित संस्था संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए गांव में जरूरी दवाइयां भी बांटती है। गांव की दुकानों और पानठेला संचालकों को कचरा डिब्बा और झाड़ू देने के साथ ही प्लास्टिक का कचरा अलग रखने के लिए बोरी दी है। संस्था के सदस्य नियमित रूप से कचरा इकठ्ठा कर वाहन के जरिए नियत स्थान पर उसे फेंक आते हैं। इससे पहले सभी ग्रामीणों को जुटाकर उन्हें स्वच्छता के प्रति प्रेरित करते हैं।

... तो पूरा देश स्वच्छ हो जाएगा

माटरा स्कूल के शिक्षक एसआर जंघेल कहते हैं कि संस्था ने स्वच्छता का शानदार तरीका निकाला है। इस फॉर्मूले को यदि हर गांव और शहरी मोहल्ला अपना ले तो पूरा देश चकाचक हो जाएगा, वह भी बिना किसी बड़े खर्च के। खेल से तो सेहत सुधरेगी ही, स्वच्छता रहेगी तो बीमारियां करीब नहीं फटकेंगीं।

जागरूकता लाना उद्देश्य

संस्था के सचिव पोषण साहू ने बताया कि गांव की आबादी करीब 25 सौ है। इनमें ज्यादातर श्रमिक और कृषक हैं। स्वच्छता के प्रति लोगों की सोच सकारात्मक हो, यही कोशिश हो रही है। संस्था के हिमांचल मिश्रा बताते हैं कि उपविजेता टीम पर तो शर्त के मुताबिक स्वच्छता की जिम्मेदारी आती है, लेकिन ग्रामीण स्वविवेक से उनके साथ हो लेते हैं। सरपंच देवशरण साहू कहते हैं कि वे हर स्तर पर इन्हें मदद करते हैं।