भिलाई। बीएसपी कर्मियों को रिटेंशन और लाइसेंस पद्धति में मकान लेने में परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। बीएसपी वर्कर्स यूनियन कार्यालय में बैठक के दौरान कर्मचारियों ने इसकी शिकायत की।

उन्होंने आरोप लगाया कि रिटेंशन एवं लाइसेंस में आवास देने के नाम पर बीएसपी प्रबंधन का रवैया उचित नहीं है। वर्षों संयंत्र को सेवा देने वाले कर्मचारियों का साथ अन्याय हो रहा है।

बीएसपी वर्कर्स यूनियन कार्यालय में बैठक में बताया गया कि कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने पर जब कुछ कर्मचारी अपनी परिवारिक या मेडिकल परेशानियों के कारण बीएसपी के मकान को रिटेंशन में या लाइसेंस में लेते हैं तो प्रबंधन उनके एनपीएस नेशनल पेंशन स्कीम से मिलने वाली राशि को रोक देती है जो कि पूर्णता गलत है। रिटेंशन पालिसी के माध्यम से जब कर्मचारियों को मकान दिया जाता है तो उसके लिए बीएसपी प्रबंधन कर्मचारी से आठ नौ लाख रूपये तक जमा करवाता है।

यूनियन ने कहा कि रिटेंशन होने वाले कर्मचारियों से आठ से नौ लाख तक प्रबंधन द्वारा लिया जा रहा है। तथा उसके गवाह के रूप में दो नियमित कर्मचारियों से भी हस्ताक्षर कराया जा रहा है इसके पश्चात ऐसे कर्मचारियों का नेशनल पेंशन स्कीम एनपीएस के तहत मिलने वाली राशि को रोके जाना बहुत ही गलत है।

यूनियन इस संबंध में क्षेत्र के सांसद के माध्यम से लोकसभा में प्रश्न उठाएगा क्या एनपीएस की राशि कोई भी कंपनी अपने किसी भी नियम के तहत रोक सकता है। बैठक में अध्यक्ष उज्जवल दत्ता, महासचिव खूबचंद वर्मा, अतरिक्त महासचिव दिल्लेश्वर राव, कार्यकारी महासचिव शिवबहादुर सिंह, उपाध्यक्ष अमित कुमार बर्मन, उप महासचिव सुरेश सिंह, जितेंद्र यादव सहित अन्य रहे।

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बीएसपी को उद्योग संचालकों ने बताईं समस्याएं

भिलाई। इस्पात भवन में लघु उद्योग भारती के सदस्यों ने बीएसपी के ईडी, एमएम से मुलाकात की। लघु उद्योग भारती, प्रदेश महामंत्री सीपी दुबे ने समस्याओं को रखा।

उन्होंने अचानक से कीमतों में हुई वृद्धि से उत्पन्ना हुई, एमएसएमई की परेशानियों का विवरण दिया गया। ईडी ने आरपीएन के विषय में पूर्विचार करने का अश्वासन दिया। लघु उद्योग भारती, इंडस्ट्रीयल इकाई के सचिव अवि सहगल ने उद्यमियों के साथ नरमी से बर्ताव करने की बात कही।

बताया गया कि अचानक ही लागू कर देने से उद्योमियों को जो परेशानियां आ रही हैं। लघु उद्योग भारती, इंडस्ट्रीयल इकाई के अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह ने प्रस्ताव दिया कि गया कि जब तक कैटेगोरिसेशन पूरी तरह से लागू करने योग्य नहीं हो जाता क्यों ना इस पर स्टे लगा कर पुराने तरीके से ही टेंडर प्रक्रिया चलने दें।

लघु उद्योग भारती, इंडस्ट्रीयल इकाई के उपाध्याक्ष योगेश गुप्ता ने तपन कुमार, सीजीएम से अनुरोध किया कि यदि बीएसपी हम एमएसएमई के साथ समय समय पर चर्चा करती रहेगी तो दोनो की परेशानियां कम होंगी और कम समय में बेहतर कार्य कर सकेंगे। मनोहर शर्मा ने प्रदेश महामंत्री से महिला उद्यमियों के रजिस्ट्रेशन पर ध्यान देने का आग्रह किया।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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