भिलाई। नेहरू नगर स्थित सीएएफ की सातवीं वाहिनी के श्वान प्रशिक्षण केंद्र में खोजी कुत्तों को पहली बार नारकोटिक और रेस्क्यू की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके पहले यहां पर सिर्फ स्नीफिंग और ट्रैकिंग की ही ट्रेनिंग दी जाती थी।

18 दिन पहले यहां पर बेल्जियन शेफर्ड नस्ल के 10 पिल्लों का जन्म हुआ है। इसके अलावा लेबराडोर नस्ल के तीन पिल्ले दान में मिले हैं। उन सभी को यहां पर ट्रेनिंग दी जाएगी।

बता दें कि श्वान प्रशिक्षण केंद्र अब तक सिर्फ स्नीफिंग और ट्रैकिंग की ही ट्रेनिंग दी जाती थी। स्नीफिंग में विस्फोटक, बारूद व अन्य सामान खोजने और ट्रैकिंग में चोरी, हत्या व लूट के संदिग्धों तक पहुंचना सिखाया जाता है। लेकिन, पहली बार कराई जा रही नारकोटिक और रेस्क्यू की ट्रेनिंग में बिल्कुल नई चीजें सिखाई जाएंगी।

नारकोटिक की ट्रेनिंग में उन्हें चरस, ब्राउन शुगर, हेरोइन और गांजा जैसे मादक पदार्थों को सूंघकर खोजने की ट्रेनिंग दी जाएगी। ये रेलवे स्टेशन और प्रदेश के सीमाओं पर जांच के दौरान काफी मददगार साबित होंगे।

वहीं रेस्क्यू की ट्रेनिंग में किसी मलबे या सामान के ढेर के नीचे दबे लोगों को खोजना सिखाया जाएगा। इनकी मदद से किसी की जान बचाई जा सकेगी। वहीं कहीं छिपे अपराधियों को भी खोजा जा सकेगा।

रेस्क्यू ट्रेनिंग के बाद तैयार श्वान एसडीएआरएफ और एनडीआरएफ के अभियान में काफी मददगार साबित होंगे। यहां उल्लेखनीय है कि गरियाबंद जिले में पदस्थ मैगी नाम की मादा श्वान ने 18 दिन पहले 10 पिल्लों को जन्म दिया है। जिनकी छह महीने बाद ट्रेनिंग शुरू होगी।

वहीं दुर्ग आइजी विवेकानंद सिन्हा ने लेबराडोर नस्ल के दो पिल्लों जेठू और शांति को दान में दिया है। इसके अलावा राकी नाम एक और लेबराडोर दान में मिला है। इन्हें इनकी उम्र के आधार पर प्रशिक्षित किया जाएगा। श्वान प्रशिक्षण केंद्र में पिछली बार 23 पिल्लों का जन्म हुआ था। जो ट्रेनिंग के बाद अलग-अलग जिलों में तैनात हैं।

विभिन्न जिलों में कुल 89 श्वान हैं तैनात

सीएएफ सातवीं वाहिनी के श्वान प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षित 89 श्वान अभी प्रदेश के विभिन्न जिलों में पदस्थ हैं। इनमें से कुल 16 श्वान अगले डेढ़ साल के भीतर सेवानिवृत्त हो जाएंगे। तब तक दान में मिले और जन्मे पिल्लों का प्रशिक्षण पूरा जाएगा और वे खाली हुए जिलों में पदस्थ कर दिए जाएंगे।

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इस बार भी यहां पर 10 पिल्लों का जन्म हुआ है। इस बार प्रशिक्षण में दो नई चीजें जोड़ी जा रही हैं। कुछ श्वानों को हम नारकोटिक और रेस्क्यू की ट्रेनिंग देंगे। इसके पहले यहां पर सिर्फ स्नीफिंग और ट्रैकिंग की ही ट्रेनिंग दी जाती थी। पहली बार नारकोटिक व रेस्क्यू की ट्रेनिंग होगी।

-विजय अग्रवाल, सेनानी सातवीं वाहिनी छसब

Posted By: Nai Dunia News Network

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