भिलाई (ब्यूरो)। उप मुख्य श्रमायुक्त के 10 हजार रुपए घूस लेते सीबीआई के हाथों रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद श्रमायुक्त की कुर्सी खाली है। नतीजतन बीएसपी कर्मियों द्वारा उप मुख्य श्रमायुक्त (केन्द्रीय) की न्यायालय में दायर परिवादों पर सुनवाई नहीं हो पा रही है। अधिकतर मामले बीएसपी कर्मियों की सुविधाओं में कटौती के हैं।

मामले जिन पर अटकी है सुनवाई

बीएसपी के यूनियनों द्वारा लगाई गई आईडी

इनसेंटिव स्कीम- इस्पात श्रमिक मंच ने बीएसपी कर्मचारियों को मिलने वाली मंथली इनसेंटिव स्कीम को पुनरीक्षित करने के लिए परिवाद दायर किया था। इसमें कहा गया था कि सन्‌ 2007 से मंथली इनसेंटिव स्कीम रिवाइज नहीं हुई है, इसे रिवाइज किया जाए।

परिणाम- इस मामले में संयंत्र कर्मचारियों को कोई राहत नहीं मिली है, उन्हें पूर्व की तरह ही पुराने बेसिक का 20 प्रतिशत इनसेंटिव दिया जा रहा है, जबकि नए बेसिक पर इसे देने की मांग की जा रही है।

एचआरए- सीटू ने संयंत्र कर्मचारियों द्वारा टाउनशिप के आवासों को खाली करने के बावजूद उन्हें हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) नहीं देने को लेकर परिवाद दायर किया था। इसमें कहा गया था कि कर्मचारियों को एचआरए नहीं मिलने से काफी क्षति हो रही है।

परिणाम- बीएसपी कर्मचारियों-अधिकारियों को एचआर के रूप में काफी राशि मिलती थी, जिसे अब नहीं दिया जा रहा है। जबकि कार्मिक बीएसपी के आवासों में नहीं रह रहे हैं।

ईएल इनकैशमेंट- एटक द्वारा कर्मचारियों को पिछले दो सालों से बंद की गई अवकाश नगदीकरण (ईएल इनकैशमेंट) व्यवस्था को फिर से शुरू करने की मांग की गई। इसमें कर्मचारी बचे हुए अवकाश को बेचकर उसका लाभ ले सकता था।

परिणाम- संयंत्र कर्मचारियों को अवकाश नगदीकरण के माध्यम से पूरे एक माह की तनख्वाह मिल जाती थी, जिसे बंद कर दिया गया है। इससे कर्मचारियों को आर्थिक क्षति हो रही है।

बायोमैट्रिक सिस्टम- इंटक ने भिलाई इस्पात संयंत्र में बायोमैट्रिक सिस्टम लगाकर हाजिरी लेने की प्रथा का विरोध करते हुए परिवाद दायर किया था। इस मामले में श्रमायुक्त द्वारा बीएसपी को निर्देश दिए गए थे। इसमें कहा गया था कि यूनियनों से चर्चा किए बगैर इसे लगा नहीं सकते।

परिणाम- श्रम न्यायालय में परिवाद दायर करने के बावजूद प्रबंधन ने सभी जगह बायोमैट्रिक सिस्टम लगा दिया है। कई विभागों में अभी भी इसे लगाया जा रहा है।

सेवानिवृत्ति अवकाश नगदीकरण- भिलाई इस्पात कर्मचारी यूनियन ने संयंत्र से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के अवकाश नगदीकरण की सीमा सीमित कर 300 दिन करने का विरोध किया था। इसमें कहा गया था कि कर्मचारियों को पूर्ववत 310 दिन का लाभ मिले।

परिणाम- संयंत्र कर्मचारियों को इस समय सेवानिवृत्त होने के बाद 300 दिन का ही अवकाश नगदीकरण का लाभ दिया जा रहा है, जबकि श्रम न्यायालय ने बीएसपी को तलब कर फिर से विचार करने कहा था।

ई-0 प्रमोशन- इस्पात श्रमिक मंच, भिलाई इस्पात श्रमिक यूनियन और मेटल माइंस वर्कर्स यूनियन (इंटक) नंदिनी माइंस में बीएसपी कर्मचारियों को ई-0 प्रमोशन के लिए परिवाद दायर किया था। संयुक्त रूप से इन यूनियनों ने कहा था कि प्रमोशन दिया जाए।

परिणाम- श्रम न्यायालय ने तीनों यूनियनों द्वारा दी गई दलीलों को सुनने के बाद कहा था कि इस मामले में नियमानुसार ई-0 प्रमोशन दिया जाए, लेकिन बीएसपी ने सेल स्तर का मामला बता दिया।

वर्सन- यूनियन नेताओं ने कहा

एचआरए जल्द मिलेगा

संयंत्र कर्मचारियों को एचआरए जल्द मिलेगा। इसके लिए प्रक्रि या जारी है। हमने एचआरए का आवेदन लेने का आग्र ह किया था, जिसे लिया जा रहा है।

-एसपी डे, अध्यक्ष सीटू

मामलों की फिर से सुनवाई हो

बीएसपी कर्मचारियों के मामलों की सुनवाई बंद हो गई है। इसे फिर से शुरू किया जाना चाहिए। वहीं डिप्टी सीएलसी जेल में बंद है, नए की नियुक्ति होनी चाहिए।

-बृजबिहारी मिश्रा, महासचिव, भिलाई इस्पात श्रमिक यूनियन

आईडी एक्ट दरकिनार

बीएसपी को श्रम न्यायालय ने आदेश दिए थे कि आईडी एक्ट का उल्लंघन कर अवकाश नगदीकरण को बंद किया गया है, उसे फिर से शुरू करें, पर नहीं किया गया।

-विनोद सोनी, महासचिव एटक

---

Posted By:

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

जीतेगा भारत हारेगा कोरोना
जीतेगा भारत हारेगा कोरोना