टी. सूर्याराव, भिलाई। Inspirational News : नगर के सेक्टर-4 में वनवासी विकास समिति, छत्तीसगढ़ द्वारा संचालित संस्था 'लक्ष्य प्रकल्प' नक्सल प्रभावित क्षेत्र के विद्यार्थियों, मेधावी लेकिन गरीब विद्यार्थियों, यहां तक कि हर जरूरतमंद बच्चों को प्रशासनिक अफसर बनाने के लिए निश्शुल्क कोचिंग देने का काम कर रहा है। संस्था उन्हें मुफ्त में आवास और भोजन भी उपलब्ध कराती है। संस्था के प्रयासों, मार्गदर्शन और विद्यार्थियों की मेहनत की बदौलत वर्ष 2019 में हुई छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा में यहां के 14 विद्यार्थियों का चयन हुआ था। इनमें ज्यादातर विद्यार्थी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के हैं।

वर्ष 2019 में केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूढ़ी ने सेक्टर-4 के सरस्वती शिशु मंदिर में लक्ष्य प्रकल्प का उद्घाटन किया था। शुरुआती दौर में सुविधाएं बहुत कम थीं। लेकिन वक्त के साथ सुविधाएं बढ़ती गईं। आज यहां कोचिंग लेने वाले विद्यार्थियों को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता। प्रत्येक विद्यार्थी पर संस्था सालाना करीब 40 हजार रुपये खर्च करती है।

यहां से चयनित होने वाले विद्यार्थी भी समय-समय निकालकर यहां कोचिंग लेने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाते हैं। अपने अनुभव साझा करते हैं। पहले ही वर्ष यहां से 40 विद्यार्थी राज्य लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें से 14 का चयन मुख्य परीक्षा के लिए हुआ है। समिति कार्यकर्ताओं के माध्यम से विद्यार्थियों का चयन करती है। लक्ष्य प्रकल्प के 26 विद्यार्थियों का चयन विभिन्न पदों के लिए हुआ है।

लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी के लिए देशभर में प्रसिद्घ दिल्ली की संस्था संकल्प इस संस्था का मार्गदर्शन करती है। सेवानिवृत आइएएस, आइपीएस अधिकारी, प्रोफेसर आदि समय-समय पर यहां पहुंचकर बच्चों को कोचिंग देते हैं। उनका मार्गदर्शन करते हैं।

संस्था के अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंघानिया ने बताया कि 2012 में प्रकल्प से भिलाई निवासी सिद्घार्थ जैन का चयन आइपीएस में हो चुका है। वर्तमान में वे दिल्ली में ज्वाइंट कमिश्नर हैं। सचिव शिरीष अग्रवाल ने बताया कि 2019 में पहली बार 14 विद्यार्थियों का चयन पीएससी में हुआ है। संस्था गरीब बच्चों को उच्च शिक्षा देने को समर्पित है।

समाजशास्त्र के सहायक प्राध्यापक गणेश नेताम ने बताया कि अपनी सफलता का श्रेय मैं संस्था को देना चाहूंगा। यहां मिले मार्गदर्शन, सकारात्मक सोच और शिक्षकों के सहयोग से ही मैंने यह पद पाया है। इसके लिए मैं हमेशा ऋणि रहूंगा।

वहीं, नायब तहसीलदार नीलम सिंह पिस्दा ने कहा कि यह संस्था मेरे जीवन में बहुत मायने रखती है। यहां के शिक्षकों ने मुझे जिस तरह से निरंतर अध्ययन कराया, मार्गदर्शन दिया, सोच विकसित की, उसी की बदौलत आज मुझे सफलता मिली है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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