भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र के आवासों में रहने वाले कर्मचारी परेशान है। इन्हें हर साल आवास के मरम्मत कार्य के लिए मिलने वाला भत्ता बीते नौ साल से अपग्रेउ नहीं किया गया है।

वर्तमान में जितना भत्ता प्रबंधन दे रहा है वह पर्याप्त नहीं है। इतना ही नहीं मरम्मत कार्य के लिए शिकायत करने के बावजूद निराकरण नहीं हो पा रहा है। सिविल से जुड़े कार्यों के लिए शिकायत आवेदनों की संख्या पांच से छह हजार तक पहुंच गई है। इसे लेकर कर्मचारियों में आक्रोश है। वही यूनियनों ने भी आवास मरम्मत भत्ता को बढ़ाने की मांग उठानी शुरू कर दी है।

भिलाई इस्पात संयंत्र में टाउनशिप एवं पटरी पार क्षेत्र में करीब 30 हजार बीएसपी के आवास हैं। इसमें लगभग 10 हजार आवासों में संयंत्र के कर्मचारी वर्तमान में निवासरत हैं। टाउनशिप में बीएसपी आवासों का निर्माण संयंत्र के निर्माण के बाद किया गया था, इन आवासों की स्थिति अब धीरे-धीरे खस्ताहाल होने लगी है।

कई सेक्टरों में तो आवास जर्जर हो गए हैं। जहां कर्मचारी अपने परिवार जनों के साथ जोखिम उठाकर रहने विवश है। बावजूद समय पर आवासों की मरम्मत पुताई एवं बिजली संबंधी कार्यों को लेकर को लेकर प्रबंधन गंभीर नहीं दिख रहा है।

2013 में तय किया था भत्ता

बीएसपी कर्मचारियों को आवास के सामान्य मरम्मत कार्य के लिए आवास मरम्मत भत्ता की सुविधा दी गई है। यह भत्ता सालाना के हिसाब से मिलता है। कर्मचारियों ने बताया कि आवास में कमरों के हिसाब से यह भत्ता 1050 से लेकर 1750 रूपये तक दिया जाता है।

भत्ता की उक्त दर अंतिम बार सन 2013 में निर्धारित की गई थी। इसके बाद नौ साल हो गए परंतु अब तक इसे रिवाइज नहीं किया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि उक्त भत्ता मामूली सिविल कार्य, बिजली लाइन का मरम्मत आदि के लिए दिया जाता है। परंतु मंहगाई के इस दौर में इतनी ही राशि में यह कार्य करा पाना संभव नहीं है।

प्रबंधन रंग रोगन भी नहीं करा रहा

कर्मचारियों का कहना है कि हर दो साल में प्रबंधन को आवासों का रंग रोगन कराना है परंतु यह कार्य भी समय पर नहीं हो पा रहा है। यूनियनों द्वारा दबाव डालने पर चार से पांच साल के बाद रंग रोगन का काम कराया जाता है। इसमें भी अफसरों और ठेकेदारों की मनमर्जी चलती है।

कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंधन हर दो साल में रंग रोगन का खर्च कर्मचारियों को ही दे दे। कर्मचारी अपनी सुविधा के मुताबिक स्वयं ही यह कार्य करा लेगा। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि राउरकेला में बेटी-बेटा के शादी के अवसर पर प्रबंधन को आवेदन देने पर वहां बकायदा आवास का रंग रोगन प्रबंधन अपनी ओर से कराता है।

शिकायतों पर सुनवाई नहीं

कर्मचारी यूनियन आवास मरम्मत भत्ता के रूप में 25 हजार रुपये सालाना की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर ज्ञापन भी प्रबंधन को सौंपा जा चुका है। परंतु प्रबंधन चुप्पी साधे हुए है। कर्मचारियों का कहना है कि बिजली संबंधित की शिकायतों के निराकरण में भी अब समय लगने लगा है।

वहीं सिविल संबंधित शिकायत का निराकरण तो भगवान भरोसे है। फ्लोरिंग के कार्य को लटका दिया जाता है। प्लास्टर अथवा छज्जा गिरने जैसी घटना पर ही गंभीरता दिखाई जाती है। सिविल के लगभग पांच से छह हजार आवेदन लंबित हैं।

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-इंटक की ओर से आवास मरम्मत भत्ता 25 हजार सालाना की मांग की गई है। प्रबंधन को पत्र भी सौंपा गया है।

-संजय कुमार साहू, अतिरिक्त महासचिव, इंटक

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कर्मचारी सुविधाओं में लगातार कटौती की जा रही है। आवासों जर्जर हो रहे हैं। प्रबंधन् आवास मरम्मत भत्ता बढाए।

-राजेश अग्रवाल, महासचिव, इस्पात श्रमिक मंच

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Posted By: Nai Dunia News Network

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