भिलाई। नईदुनिया प्रतिनिधि

बदलते मौसम में नवजात शिशुओं की देखभाल करना सबसे अनिवार्य होता है। इस समय सबसे अधिक खतरा शिशु को रहता है। सबसे अधिक इस समय बच्चों को निमोनिया का खतरा रहता है। इस तरह की परेशानी होने पर बच्चों को चिकित्सकों के पास तत्काल ले जाएं। खुद अपने आप घर से दवाएं न दें। इस दौरान जो बच्चे अस्पतालों में आ रहे हैं, वे ज्यादातर सर्दी-खांसी से ग्रस्त हैं।

लाल बहादुर शास्त्रीय अस्पताल सुपेला के डॉक्टर संजय बालमांदे्र कहते हैं कि निमोनिया के प्रमुख दो लक्षण हैं, पहली खांसी दूसरा सांस चलना। ऐसे बच्चों को बुखार भी अक्सर होता है। निमोनिया यदि तीन माह से छोटे बच्चों में हो तो ज्यादा खतरनाक होता है। ऐसे बच्चों को अस्पताल में भर्ती कर एंटीबायोटिक्स दवाइयों द्वारा उपचार किया जाता है। निमोनिया की वजह से अगर कोई बच्चा दूध नहीं पी रहा हो, या सुस्त हो, उसका तापमान कम हो रहा हो या फिट्स के दौरे भी रहे तो यह अत्यंत गंभीर अवस्था है। तीन माह से ज्यादा उम्र के बच्चों की स्थिति भले ही उतनी गंभीर लगे। लेकिन इन बच्चों पर निगाह के साथ सर्तकता रखनी जरूरी है।

निमोनिया के प्रमुख कारण

निमोनिया, बैक्टीरिया या वायरस के संक्रमण की वजह से होता है। कुछ बच्चों में जन्मजात विकार, सांस की नली में रुकावट या दिल में जन्मजात विकार होने से निमोनिया होता है। इस रोग के ज्यादातर मामले सर्दियों की शुरुआत में या इसके दौरान सामने आते हैं। अधिकांश रोगियों में इसका निदान खून की जांच एवं एक्सरे कराने के बाद ही पता चलता है। बैक्टीरियलनिमोनिया में एंटीबायोटिक्स दवाइयां दी जाती हैं। इसके अलावा यदि बुखार हो तो पेरासिटामॉल दी जाती है। बहुत तेज सांस हो तो भर्ती करने के उपरांत ऑक्सीजन दी जाती है। अगर बच्चे का खाना-पीना ठीक हो तो सलाइन भी चढ़ाना पड़ता है।

इस तरह की शिकायत पर क्या करें

एक साल से छोटे बच्चों को ऊनी कपड़े, मोजे, कैप आदि पहनाकर रखें। रात में ज्यादा ठंड होने पर कमरे को गरम रखने का उपाय करें। सर्दी-खांसी होने पर अगर बच्चा दूध नहीं पी रहा हो या तेज बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें। जिस बच्चों की तेज सांस चल रही हो या सुस्त हो या कमजोर या उल्टियां कर रहा हो इस स्थिति में उसे तत्काल अस्पताल ले जाएं।

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