भिलाई। नईदुनिया प्रतिनिधि

भोर का वक्त...। दिन शुक्रवार। घड़ी की सुई पांच बजकर पांच मिनट पर पहुंची थी। कोक ओवन की तरफ से कुछ कर्मचारी निरीक्षण के लिए जा रहे थे। अचानक आसमान में धुआं दिखा। दौड़ते हुए करीब पहुंचे। आग की लपटें नजर आई। वहां कोई भी कर्मचारी नजर नहीं आया, जो देखभाल करता। कन्वेयर गैलरी जलकर तबाही मचा रही थी। पॉवर सप्लाई का कंट्रोल केबिल भी जल गया।

कंट्रोल रूम को सूचना दी। आग से कुछ दूरी पर काम कर रहे कर्मचारी-अधिकारी दौड़ पड़े। पहले खुद ही आग बुझाने की कोशिश की। पानी पाइप लाइन को खोजने लगे। पाइप लाइन तो बिछी नजर आई, लेकिन पानी सप्लाई नहीं था। फायर ब्रिगेड के पहुंचने तक आग का दायरा बढ़ चुका था। बारी-बारी से आठ फायर बिग्रेड पहुंचा और घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

कोक ओवन के सीपीपी-2 एरिया में लगी आग ने पूरे सिस्टम की बखिया उधेड़ दी। गैलरी नंबर-11 के चार कन्वेयर बेल्ट नंबर-166, 167, 168, 169 नजरों के सामने जल रहे थे, लेकिन कोई कुछ कर नहीं पा रहा था। इसी रूट से एशिया के सबसे बड़े ब्लास्ट फर्नेस-8 महामाया के लिए कोयला सप्लाई की जाती है। आग वहां तक न पहुंचे, इसकी भी चिंता लोगों को सताने लगी थी। जम्बो रूट कन्वेयर गैलरी से निकलता धुआं कई किलोमीटर तक दिखाई दिया।

नाइलोन का बेल्ट होने से तेजी से आग फैलती गई। गनीमत यह है कि आग की वजह से हॉट मेटल प्रोडक्शन या पॉवर प्लांट-1 में कामकाज प्रभावित नहीं हुआ। वरना, नुकसान काफी बड़ा हो सकता था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग को बुझाने के लिए वे लोग दौड़े, लेकिन कहीं पानी का इंतजाम ही नहीं था। इस कारण आग को बुझाने में कुछ समय लगा। वरना स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता था।

गैलरी में पानी की सप्लाई क्यों नहीं? अजब-गजब जवाब

बीएसपी के सात मिलियन टन एक्सपांशन प्रोजेक्ट के तहत नई गैलरी बिछाई गई है, जो फर्नेस-8 तक पहुंची है।

नियम के तहत गैलरी के साथ ही पानी की पाइपलाइन भी बिछानी है, जिसमें चौबीस पानी की सप्लाई होनी चाहिए।

कर्मचारियों ने बताया कि गैलरी चालू होने के बाद भी पानी की सप्लाई नहीं की गई, जिससे आग बुझाने में दिक्कत हुई।

आग कब लगी थी, इसकी भी जानकारी किसी को नहीं है। करीब तीन किलोमीटर के एरिया में फैली गैलरी की देखभाल करने के लिए किसी की तैनाती ही नहीं है।

मैनपॉवर का टोटा होने से आग की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी। गैलरी के भीतर में आग फैलने के बाद चारो ओर धुआं फैल गया, तभी राज खुल सका।

दूसरे विभाग के कर्मचारियों ने दूर से धुआं देखकर इसकी जानकारी दी। अगर, वह नहीं देखते तो आग का दायरा काफी दूर तक फैल सकता था, क्योंकि नाइट शिफ्ट करने वाले कर्मचारी घर की ओर लौटना शुरू हो चुके थे।

मौके पर ही पानी के कनेक्शन को लेकर कर्मचारियों और अधिकारियों में बहस भी हुई। कोई बोला- पाइप बिछी नहीं है। अधिकारी ने कहा-बिछी है, दब गई। इसी बीच किसी ने बोला-पहले बिछी थी, जिसके ऊपर से ठेकेदार ने कुछ और बना दिया। इसलिए दब गई।

वहीं, यह भी चर्चा रही कि पानी की पाइप लाइन नहीं है। अभी पाइप लाइन बिछाने का काम चल रहा है। इन तमाम दावों में कितनी सच्चाई, यह तो जांच के बाद ही पता चल सकेगा।

कर्मचारियों ने दिखाया जज्बा

अधिकारियों का कहना है कि भोर में चार बजे तक कन्वेयर गैलरी की बेल्ट चल रही थी, माल सप्लाई हो रही थी। आग की घटना होते ही सबसे पहले कर्मचारी दौड़ पड़े। हर विभागों के कर्मचारी मौके पर पहुंचकर आग को बुझाने में जुटे रहे। फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंचने के बाद कर्मियों के साथ वे भी पानी की पाइप लेकर उᆬंचाई पर चढ़ते रहे। मकसद किसी तरह आग को नियंत्रित किया जा सके। इसके बाद ऑपरेशन, मैकेनिकल की टीम पहुंची। इसी बीच सीईओ और ईडी वर्क्स भी पहुंचे।

इच्छा शक्ति की देनी पड़ेगी दाद

कार्मिकों ने आग की घटना की वजह से हाथ पर हाथ धरने के बजाय सक्रियता दिखाई। कन्वेयर गैलरी का दो रूट जला है। एक रूट को चालू करने की कवायद शुरू कर दी गई है। बेल्ट बदलने का काम भी शुरू कर दिया गया है। चार गैलरी की बेल्ट जली है, जो जलने से बच गई, उसको निकाला जा रहा है। काटकर निकालने के बाद एक रूट में लगाया जाएगा। कोल स्टार्ट यार्ड से पॉवर प्लांट-1 के लिए एक गैलरी और दूसरी फर्नेस-8 के लिए सीडीआई कोयला भेजती है। बताया जा रहा है कि करीब 200 मीटर का बेल्ट जली है।

बंकर में स्टोर है मटेरियल, इसलिए प्रोडक्शन पर असर नहीं

ब्लास्ट फर्नेस-8 और पॉवर प्लांट-1 में दो बंकर बनाए गए हैं। यहां कोल स्टार्ट यार्ड से माल लाकर डंप किए जाते हैं। माल को स्टोर करके रखा गया है। बताया जा रहा है कि करीब तीन-चार दिन का स्टाक यहां एडवांस में रहता है। दोनों प्वाइंट पर बंकर बने हैं। सड़क मार्ग से भी कोल को वहां पहुंचा सकते हैं। इसलिए प्रोडक्शन पर खासा असर नहीं पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि एक रूट की गैलरी दो-तीन दिन दिन के भीतर चालू की जा सकती है।

यहां भी एक दिन पहले हुई थी वेल्डिंग...

विभागीय अधिकारी बताते हैं कि गुरुवार को कल फर्स्ट शिफ्ट में मैकेनिकल का काम हुआ था। वेल्डिंग आदि काम के दौरान चिंगारी निकलती है। आशंका है कि इसी चिंगारी से कन्वेयर में कहीं आग सुलगी होगी। लेकिन आग दूसरे दिन सुबह फैली। इस बात को लेकर भी तरह-तरह की चर्चा है। बता दें कि कोल डस्ट इंजेक्शन-सीडीआई में ज्वलनशील पदार्थ लिग्नाइट होता है। सीसीडी बारीक होता है। यह एयर के साथ जलता है। कोक की खपत को कम करने में यह मददगार साबित होता है। ज्वलनशील तत्व लिग्नाइट से आग तेजी से फैलती है।

2003 में भी जल चुकी है गैलरी

कोक ओवन के वरिष्ठ कर्मचारी बताते हैं कि कन्वेयर गैलरी में आमतौर पर अक्सर छोटी-छोटी आग लगती रही है। जिसे समय रहते काबू में पा लिया जाता रहा है। साल 2003 में भीषण आग लगी थी। कन्वेयर गैलरी को काफी नुकसान हुआ था। इसके बाद बड़ी घटना शुक्रवार को हुई है। आग को बुझाने के लिए आठ दमकल से कई राउंड पानी की बौछार की गई है। इससे हर तरफ कीचड़ हो गया है। कोक और डस्ट पर पानी पड़ने से वह गैलरी से नीचे गिरा। गैलरी के नीचे से सड़क गुजरी है। इस सड़क को क्रॉस करके कोक ओवन की गैलरी बैटरी-11 और फर्नेस-8 को जाती है।

Posted By: Nai Dunia News Network