भिलाई (नईदुनिया प्रतिनिधि)। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) सहित स्टील अथारिटी आफ इंडिया (सेल) के कर्मचारियों के वेतन समझौता के बाद अब इससे जुड़े भत्ता व अन्य विषयों पर निर्णय होना है। यह काम एनजेसीएस की सब कमेटी को करना है। सब कमेटी का गठन अब तक हो नहीं पाया है परंतु इसे लेकर कर्मचारियों की अपेक्षाएं हैं। वेतन समझौते में विसंगति के आक्रोश के बीच सब कमेटी को लेकर कर्मचारियों की अपेक्षाओं की सूची बढ़ती ही जा रही है। इतना ही नहीं उन यूनियन को भी कोसने में लग गए हैं जिनकी वजह से सब कमेटी गठन में देरी की स्थिति बनी है।

बीएसपी सहित सेल के कर्मचारियों का लंबे इंतजार के बाद वेतन समझौता हो गया है। कर्मचारियों व अफसरों को एरियस का बकाया भी भुगतान कर दिया गया। अब कर्मचारियों की निगाह एनजेसीएस की सब कमेटी के गठन और उसके निर्णय पर लगी हुई है। इसे लेकर चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है।इंटरनेट मीडिया पर कर्मचारी अपनी बातें भी रख रहे हैं।

यह तय हुआ था एनजेसीएस की बैठक में

वेतन समझौता को लेकर एनजेसीएस की बैठक बीते 21 और 22 अक्टूबर को हुई थी। बैठक में 26.5 फीसद पर्क्स (भत्तों) पर सहमति के बावजूद एरियर को लेकर तकरार की स्थिति बन गई थी। अंत में प्रबंधन के ड्राफ्ट पर इंटक, एचएमएस और एटक ने हस्ताक्षर कर दिए थे। वहीं दो यूनियन बीएमएस और सीटू ने हस्ताक्षर से मना कर दिया था। एनजेसीएस की बैठक में ही तय हुआ था कि वेतन समझौता के बाद के अन्य विषयों को सुलझाने के लिए सब कमेटी बनाने का निर्णय हुआ था। एनजेसीएस में शामिल इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू और बीएमएस सभी पांच यूनियन को दो-दो सदस्यों के नाम देने थे, परंतु अब तक बीएमएस ने अपनी ओर से नाम नहीं दिया है। इसके कारण कमेटी का गठन नहीं हो पाया है।

लंबे समय से भत्ता की मांग

कर्मचारियों का रात्रि पाली भत्ता, आवास भत्ता, धुलाई भत्ता, खदान भत्ता, डिस्टर्बंिग भत्ता आदि पर अभी तक निर्णय नहीं हुआ है। इन सभी विषयों को कई बार उठाया गया परंतु पिरणाम सिफर ही रहा। त्योहार अग्रिम, बधाों की शिक्षा के लिए अग्रिम पर भी निर्णय होना है। वहीं कर्मचारियों का कहना है कि सेल के सभी युनिटों में आवासों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। आधुनिक आवश्यकताओ को देखते हुए छोटे आवास पर्याप्त नहीं हैं। हर कर्मी को दो आवास आवंटित किया जाये।

पे स्केल में अंतर बड़ा विषय

सेल कर्मियो के पे स्केल के बीच अंरत काफी कम है। इसके कारण एस6-7 ग्रेड के बाद अधिकतर कर्मियो को पूरा वार्षिक इंक्रिमेंट नही मिल पाता है। उन्हे सिर्फ पे स्केल के अंतिम राशि पर ही तीन फीसद इंक्रिमेंट मिल पाता है। 2007 से यह समस्या है। अब कमेटी से इस विषय पर पहल का इंतजार है।

इस पर भी उठेगा सवाल

कर्मियो को सिर्फ 13 फीसद एमजीबी जो अधिकारियों से फीसद प्रतिशत कम है तथा 26.5 प्रतिशत जो अधिकारियों से 8.5 फीसद कम है दिया गया है। इसके अलावा वेतन समझौता में पेंशन मद मे मात्र छह फीसद कम है। जो अधिकारियो से तीन फीसद कम है। इसे लेकर भी कर्मचारी सवाल उठा रहे हैं।

एनजेसीएस की सब कमेटी का गठन बीते अक्टूबर माह में ही हो जाना था, परन्तु नवंबर बीतने को है और अब तक कमेटी का अता-पता नहीं है। इसे लेकर कर्मचारियों में नाराजगी है। कर्मचारी इंटरनेट मीडिया पर अब उन यूनियनों को कोसने लगे हैं जिनकी वजह से कमेटी गठन की प्रक्रिया में देरी हो रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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