भिलाई। Road Safety: राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-53 पर दिन में वाहनों का दबाव की वजह से हादसे की आशंका रहती है। वहीं रात में यातायात का दबाव कम होने के बाद भी राहत नहीं है। रोड पर बेहतर प्रकाश व्यवस्था के अभाव में खतरा और भी बढ़ जाता है। रोड पर विपरित दिशा से आने वाले वाहनों की लाइट को रोकने डिवाइडर पर पौधों की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। कहीं डिवाइडर से हरियाली गायब है तो कहीं पौधे तो हैं परंतु काफी दूर दूर में। जिससे इसके औचित्य पर ही सवाल लगने लगा है। यही वजह है कि कुल हादसों में 40 प्रतिशत से अधिक हादसे रात में होते हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग अंजोरा बायपास से रायपुर टाटीबंध तक करीब 43 किलोमीटर है। प्रतिदिन औसतन 50 हजार से अधिक भारी वाहन एवं 65 हजार चार पहिया वाहन इस राजमार्ग से आना जाना करते हैं। इससे ही यातायात के भारी दबाव का अंदाजा स्वयं लगा सकते हैं। इसके बाद भी इस मार्ग पर होने वाले हादसों को रोकने को लेकर पर्याप्त इंतजाम को लेकर गंभीरता नदारद है। सड़क सुरक्षा अभियान के तहत तकनीकी पहलुओं के अलावा हादसों को रोकने सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी नईदुनिया की टीम ने निरीक्षण किया। बतौर विशेषज्ञ टीम में रिटायर्ड डीएसपी वीरेंद्र सतपथी शामिल हुए। उन्होंने रात में होने वाले हादसों को रोकने सुझाव भी दिया। इसमें प्रकाश व्यवस्था के साथ ही डिवाइडर पर पौधों लगवाने पर जोर दिया। खासकर ब्लैक स्पाट वाले स्थानों पर तो और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत बताई।

1. आउटर पर पसर जाता है अंधेरा

समस्या

राष्ट्रीय राजमार्ग 53 पर शहर के आएउटर वाले क्षेत्र जैसे दुर्ग एवं भिलाई शहर का सीमावर्ती क्षेत्र नेहरू नगर चौक के आसपास, भिलाई एवं भिलाई-चरोदा का सीमावर्ती क्षेत्र डबरापारा तिराहा, भिलाई-चरोदा एवं कुम्हारी का सीमावर्ती क्षेत्र जंजगिरी मोड़ वाले स्थान के आसपास डिवाइडर पर बिजली पोल तो लगे हैं परंतु अक्सर लाइट बंद रहती है। इन स्थानों पर वाहन का दबाव शहर के भीतर कही अपेक्षा कुछ कम होने की वजह से वाहन चालक स्पीड बढ़ा देते हैं। ऐसे में खतरा और भी ज्यादा हो जाता है।

समाधान

राष्ट्रीय राजमार्ग पर वर्तमान में प्रकाश व्यवस्था की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों पर है। लगातार मेंटेंनेंस न किए जाने की वजह से अक्सर प्रकाश व्यवस्था चौपट रहती है। शहर के भीतर वाले हिस्से में उक्त मार्ग पर तो निकाय के कर्मी ध्यान देते हैं परंतु आउटर पर प्रकाश व्यवस्था को लेकर गंभीरता नहीं नजर आती है। जिम्मेदार नियमित जांच करने के साथ ही सुधार भी कराएं।

2. डबरापारा आरओबी पर ज्यादा खतरा

समस्या

राष्ट्रीय राजमार्ग पर डबरापारा आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) वाले हिस्से में दिक्कत ज्यादा है। यहां पर आरओबी वाले हिस्से में मार्ग सकरा है। यहां पर निर्माण कार्य भी जारी है। बावजूद प्रकाश की व्यवस्था नहीं है। यह आरओबी करीब एक किलोमीटीर लंबा है परंतु आधे से अधिक हिस्से में प्रकाश व्यवस्था नहीं है। इस वजह से अक्सर रात में यहां हादसा होता है। यहां पर दुर्घटना की स्थिति में एक के पीछे एक कई वाहन अक्सर टकरा कर दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। दुर्ग रायपुर लेन और रायपुर दुर्ग लेन दोनों पर ही यही हाल रहता है।

समाधान

डबरापारा आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) के ठीक उपर से बिजली कंपनी की उच्च क्षमता की तीन लाइनें गुजरी है। इस वजह से उक्त हिस्से में डिवाइडर पर बिजली पोल नहीं लगाया गया है। बगल में स्थित आयल डिपों की ओर से रोड पर लाइट की व्यवस्था की गई थी। डिपो बंद होने के बाद यह भी बंद हो गया। इसी ओर से प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा डबरापारा की ओर से भी लाइट लगाई जानी चाहिए।

3. मिडियन पर पौधे गायब

समस्या

राष्ट्रीय राजमार्ग पर विपरित दिशा से आने वाले वाहनों की रोशनी को रोकने के लिए डिवाइडर अथवा मिडियन पर पौधे भी लगाए जाने हैं। जिससे रात के समय एक लेन से आ रहे वाहन की रोशनी से दूसरी लेन के वाहन चालक को परेशानी न हो। परंतु पावर हाउस से भिलाई-3 तक पौधों के नाम उजाड़ की स्थिति है। जहां पौधे लगे भी हैं तो बीच-बीच में जगह खाली है। दो पौधों के बीच इतनी दूरी है कि उसके औचित्य पर सवाल उठ रहे हैं। कुम्हारी में भी कुछ स्थान पर यही हाल है। पावर ग्रिड के पास रायपुर-दुर्ग लेन पर कई हादसे भी इसी के वजह से हुए।

समाधान

डिवाइडर अथवा मिडियन पर कम उंचाई वाले एवं घने पौधे एक निश्चित दूरी पर लगाएं। जिससे रात के समय एक लेन से आ रहे वाहन की रोशनी से दूसरी लेन के वाहन चालक को परेशानी न हो। वाहन चालकों की आंखें रोशनी की वजह की वजह से चौंधियाए नहीं। इसके अलावा इसकी देखरेख भी नियमित की जाए। अवैध मिडिल कट एवं पैदल रोड पार करने वाले स्थान पर अधिकांश जगह पर 15 से 20 फीट तक पौधे नहीं हैं।

नंबर गेम

- 10 माह में दुर्ग जिले में 956 सड़क हादसे

- 250 की मौत 814 लोग हुए घायल

- 390 के करीब दुर्घटनाएं रात में हुई है

- 43 किलोमीटर का क्षेत्र आता है राष्ट्रीय राजमार्ग का

हादसों को नियंत्रित करने के लिए हर तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। सभी स्थानों पर प्रकाश व्यवस्था के लिए निकायों से कहा जाएगा। जहां पौधे नहीं हैं वहां भी पौधारोपण करने कहेंगे।

सतीश ठाकुर, डीएसपी (ट्रैफिक) दुर्ग

Posted By: Ashish Kumar Gupta

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