भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट कोविड-19 के संक्रमण के दौरान हुई कार्मिकों की मौत पर सेल प्रबंधन ने अनुकंपा नियुक्ति देने से पल्ला झाड़ लिया है । इस माह 6 और 7 सितंबर को हुई एनजेसीएस बैठक में इस मामले में प्रबंधन ने श्रमिक नेताओं को स्पष्ट रूप से बताया कि सेल में ऐसे मामलों के निराकरण के लिए एम्पलाई फैमिली बेनिफिट स्कीम (ईएफपीएस )है, जिसके तहत मृत कर्मचारियों के परिजनों के भरण पोषण के लिए प्रतिमाह एक निश्चित राशि दी जाती है । भिलाई इस्पात संयंत्र में 249 कर्मचारी और अधिकारी कोविड-19 के दौरान संयंत्र में सेवा देते हुए संक्रमित होने से अपनी जान का गवां चुके हैं। अब भी उनके परिजन सेल प्रबंधन से अनुकंपा नियुक्ति की मांग कर रहे हैं । वही श्रमिक संगठन भी लगातार प्रबंधन से अनुकंपा नियुक्ति प्रावधानों में परिवर्तन करने की मांग कर रही है।

दिल्ली में एनजेसीएस बैठक के जारी किए गए मिनट्स में प्रबंधन ने बताया है कि कोविड-19 मृत्यु के मामले में कंपनी के पास एम्पलाई फैमिली बेनिफिट स्कीम है। जिसका कर्मचारी के परिजन लाभ उठा सकते है । इसके साथ ही आश्रितों को नौकरी दे देने के मामले पर प्रबंधन ने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है। वहीं अब तक कर्मचारियों के परिजनों ने अनुकम्पा नियुक्ति की आस में फाइनल सेटेलमेंट नही लिया है ।

सन् 2011 में कारपोरेट स्तर पर अपनाई गई अनुकंपा नियुक्ति पालिसी में मेडिकल अनफिट मामलों के साथ कार्यस्थल में हुई दुर्घटना ही अनुकंपा नियुक्ति के दायरे में आती है । सामान्य मृत्यु पर अनुकंपा की नियुक्ति का प्रावधान सन् 1989 में ही सेल में समाप्त की जा चुकी है । अब बिना पालिसी के प्रावधानों में परिवर्तन किए कोविड-19 मामलों का निराकरण संभव नहीं है।

सेल में सन् 1989 में सामान्य व्यक्ति पर अनुकंपा नियुक्ति के प्रावधान को समाप्त करते हुए केंद्रीय स्तर पर एम्पलाई फैमिली बेनिफिट स्कीम को लागू किया गया था । जिसके तहत व्रत कर्मचारी के परिवार को बीएसपी के पास भविष्य निधि और ग्रेजुएटी के पैसे को जमा करना होता है, जिसके बाद मृत कर्मी के बकाया सेवा काल तक कंपनी उसे वर्तमान बेसिक और डीए का प्रतिमाह भुगतान करती है तथा सेवाकाल समाप्ति पर जमा पैसे को बिना ब्याज वापस किया जाता है।

कोविड-19 के दौरान अपनी सेवाएं देते हुए जान गवां चुके सेल कर्मचारियों के परिजन कर्मियों की मौत के लिए प्रबंधन को जिम्मेदार मानते हुए लगातार अनुकंपा नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। इस मामले को लेकर उन्होंने दिल्ली में इस्पात मंत्री तक अपनी मांगों को रखा है लेकिन अब तक कोई निर्णायक फैसला नहीं लिया गया है । वही एनजेसीएस मीटिंग में प्रबंधन ने दो टूक जवाब से सैकड़ों परिवारों की उम्मीदों को धक्का लगा है।

एनजेसीएस की 6 और 7 सितंबर को केंद्रीय स्तर पर भी मीटिंग के फीडबैक में किसी भी केंद्रीय नेता ने इस बात का जिक्र अपने वक्तव्य में नहीं किया कि कंपनी द्वारा जारी मिनट्स में कोविड-19 मामले में अनुकंपा नियुक्ति पर प्रबंधन के नकारात्मक रूप सामने आने से अब कर्मचारी नेताओं से सवाल जवाब कर रहे हैं ।

मृत कर्मचारियों के परिजन बीएसपी प्रबंधन की संवेदनहीनता पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। जहां संक्रमण काल के दौरान प्रशासन की अनुशंसा के बावजूद विकलांग कर्मचारियों को भी वर्क फ्राम होम नहीं दिया गया। वही श्रमिक संगठनों के लगातार दबाव के बावजूद भी रोस्टर सिस्टम लागू नहीं किया गया था। पूरे संक्रमण काल के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी विपरीत परिस्थितियों में काम करते हुए सेंट्रल हुए थे।

कोविड-19 महामारी में मृत बीएसपी कर्मियों के परिजनों ने मुर्गा चौक पर लगातार भूख हड़ताल की थी । अपने कर्मचारियों के परिवार वालों के लगातार गुहार पर भी प्रबंधन का दिल नहीं पसीजा है तथा सेल अपनी अनुकंपा नियुक्ति पालिसी में कोई परिवर्तन करने के मूड में नजर नहीं आ रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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