भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र में उत्पादन की अहम इकाइयों में से एक एसएमएस-2 (स्टील मेल्टिंग शाप) भी है। इस शाप के स्लैब कास्टर-1 का कैपिटल रिपेयर सात सालों के बाद किया गया। यह कैपिटल रिपेयर 57 दिनों तक चला।

इस दौरान खासबात यह रही कि कास्टर-1 में अतिरिक्त पिंच रोल सेगमेंट तैयार किया गया। रिपेयर के बाद कास्टर-1 ने उत्पादन के पहले ही दिन 8 हीट का कास्ट किया।

भिलाई इस्पात संयंत्र के एसएमएस-2 की कंटीन्यूअस कास्टिंग शाप में छह कास्टर हैं जिनमें से 2 ब्लूम कास्टर और 4 स्लैब कास्टर हैं। एसएमएस-1 को बंद करने के बाद, ब्लास्ट फर्नेस में उत्पादित हाट मेटल के बड़े हिस्से को क्रूड स्टील में बदलने के लिए एसएमएस-2 को भेजा जाता है।

यह उल्लेखनीय है कि एसएमएस-2 स्लैब एवं ब्लूम दोनों का उत्पादन करता है जो क्रमशः प्लेट के उत्पादन के लिए प्लेट मिल, रेल के उत्पादन के लिए रेल और स्ट्रक्चरल मिल को भेजे जाते हैं। फ्लैट उत्पादों की बढ़ी हुई मांगों के कारण, एसएमएस-2 के उत्पाद मिश्रण में स्लैब एक प्रमुख घटक है।

कास्टर-1 के कैपिटल रिपेयर का कार्य सात साल पहले वर्ष 2017 में किया गया था। विदित हो कि कास्टर के रखरखाव की समय-समय पर योजना बनाई व निष्पादित की जाती है। कैपिटल रिपेयर में उन कार्यों को शामिल किया जाता है जिनमें लंबी अवधि लगती है।

जैसे बंकर बदलना, स्टीम एग्जास्टर का सम्पूर्ण ओवरहालिंग, पानी, लुब्रिकेशन और हाइड्रोलिक्स लाइन का रखरखाव, मोल्ड आक्सीलेशन मेकानिज्म और सभी पिंच रोल सेगमेंट का प्रतिस्थापन जैसे सभी बड़े कार्यों की योजना बनाकर निष्पादित किया जाता है।

चुनौतीपूर्ण कार्य को अंजाम दिया

सीसीएस बिरादरी ने ईडी (वर्क्स) अंजनी कुमार के नेतृत्व में एवं सीजीएम (एसएमएस-2) सुशील कुमार, तत्कालीन सीजीएम (एमएंडयू) अरविंद कुमार व सीजीएम (मेकेनिकल) एसके गजभिये के मार्गदर्शन में कैपिटल रिपेयर के इस चुनौतीपूर्ण कार्य को अंजाम दिया गया।

यह पहली बार था कि कैपिटल रिपेयर के दौरान ही अतिरिक्त पिंच रोल सेगमेंट तैयार किए गए। कास्टर के कैपिटल रिपेयर में कास्टर के भू-स्थानिक कान्फिगुरेशन की सटीक बहाली सबसे बड़ी चुनौती है। सर्वे टीम व सीएचएम टीम ने शाप (मेकेनिकल) टीम की सहायता से सभी 22 पिंच रोल सेगमेंट को बदलकर बड़ी सूक्ष्‌मता व सटीकता के साथ भू-स्थानिक कान्फिगुरेशन की बहाली के इस जटिल कार्य को पूरा किया।

कैपिटल रिपेयर के बाद कास्टिंग रेडियस को 12000 मिमी तक 0.5 मिमी के टालरेंस लेवल के साथ बहाली की गई। सेकेंडरी लेक्लर कूलिंग सिस्टम को भी उसकी मूल स्थिति में स्थापित करने में सफलता पाई। सभी ग्रीस लाइन, हाइड्रोलिक लाइन व उपकरण कूलिंग लाइनों को डिजाइन स्तरों पर संचालित करने के लिए बहाल किया गया। यह चुनौतीपूर्ण कैपिटल रिपेयर का कार्य मशीन शाप्स, इंस्ट्रुमेंटेशन, सीआर एंड एम ग्रुप, सीएचएम, पीएलईएम, बियरिंग इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट, मैटेरियल्स मैनेजमेंट, कांटैक्ट्रैक्ट सेल और कई ठेका श्रमिकों के समूहों द्वारा किए गए समन्वित प्रयास के कारण पूरा किया जा सका।

अधिकतम क्षमता पर उपयोग

यह कैपिटल रिपेयर सीसीएस को शाप्स से अच्छी गुणवत्ता वाले स्लैब के उत्पादन को तय करने, उच्च विश्वसनीयता, उपलब्धता व उपयोगिता बनाए रखने में सक्षम बनाएगी। कैपिटल रिपेयर का कार्य 12 नवम्बर से बीते 7 जनवरी तक चला।

कैपिटल रिपेयर के दौरान, शेष कास्टर की उपलब्धता व विश्वसनीयता सुनिश्चित की गई थी, जिससे हाट मेटल की उपलब्धता के अनुसार अधिकतम क्षमता पर सभी कास्टर काम करने में सक्षम हो पाए। रिपेयर के बाद पहले दिन कास्टर -1 ने 8 हीट के अनुक्रम को पहली बार में ही सफलतापूर्वक कास्ट किया गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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