भिलाई। स्लाटर हाउस का मामला राज्यपाल तक पहुंच गया है। तमाम विरोध व एनजीटी के नोटिस के बाद भी भिलाई निगम द्वारा स्लाटर हाउस का निर्माण कराया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर इसका जमकर विरोध हो रहा है। लाकडाउन की आड़ में स्लाटर हाउस के निर्माण को गाइड लाइन का उल्लंघन बताते हुए छत्तीसगढ़ की राज्यपाल को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया गया है।

बता दें कि भिलाई के राधिका नगर में साडा कालीन स्लाटर हाउस है। 2018 में भिलाई निगम द्वारा इसे अत्याधुनिक नवनिर्माण किया जा रहा है। इसे लेकर एनजीटी ने भिलाई निगम पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। भिलाई निगम का कहना है कि विवाद पुराने स्लाटर हाउस को लेकर है। नए स्लाटर हाउस के लिए तो केंद्र सरकार ने 17 करोड़ रुपये दिए हैं। चूंकि अब स्लाटर हाउस के आसपास घनी बस्तियां बस चुकी है, लिहाजा इस स्लाटर हाउस का जमकर विरोध हो रहा है।

स्लाटर हाउस के निर्माण को लेकर स्थानीय समाजसेवी मदन सेन ने एनजीटी को पत्र लिखकर हस्ताक्षेप की मांग की थी। एनजीटी ने पत्र के आधार पर भिलाई निगम पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। जिसकी ब्याज की राशि बढ़कर तीन करोड़ रुपये हो चुकी है। नोटिस के खिलाफ भिलाई निगम ने कोर्ट में याचिका दायर की है।

राधिका नगर विकास समिति तथा समाजसेवी ने स्लाटर हाउस के विरोध के तमाम दस्तावेज के साथ छत्तीसगढ़ की राज्यपाल को पत्र भेजकर हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि मामले में भिलाई निगम द्वारा काम बंद करने के बजाए गुपचुप तरीके से काम कराया जा रहा है।

-सभी जगह शिकायत हुई है। एनजीटी ने दो करोड़ का जुर्माना भी लगाया है, बावजूद स्लाटर हाउस का निर्माण गुपचुप तरीके से किया रहा है। हमने इस अवैध स्लाटर हाउस की राज्यपाल से शिकायत की है।

मदन सेन, शिकायत कर्ता

राधिका नगर भिलाई

नए स्लाटर हाउस का निर्माण केंद्र सरकार के निर्देश पर हो रहा है। विवाद पुराने स्लाटर हाउस को लेकर है। जिसे लेकर एनजीटी ने जुर्माना लगाया है, हमने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

अशोक द्विवेदी, उपायुक्त

नगर निगम भिलाई

Posted By: Nai Dunia News Network

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