भिलाई (ब्यूरो)। विश्व की सबसे लंबी 260 मीटर रेलपांत बनाने की तैयारी में लगे बीएसपी को रेलवे ने परिवहन के नाम पर झटका दिया है। रेलवे ने इस रेलपांत के परिवहन के लिए स्पेशल भिलाई रेक (लंबी रेलपांत की ढुलाई करने वाली रेक) की व्यवस्था कर पाने से हाथ खड़े कर दिए हैं।

इसके लिए रेलवे द्वारा सेल व इस्पात मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि इसके लिए स्पेशल रेक की व्यवस्था सेल ही कराए। वर्तमान में रेलवे के पास भिलाई में कुल 16 रेक ही है। वहीं बीएसपी की यूनिवर्सल रेल मिल में उत्पादन शुरू होने पर कम से कम 60 रेक और चाहिए होगी।

भिलाई इस्पात संयंत्र में आधुनिकीकरण व विस्तारीकरण का कार्य चल रहा है। यहां इसके तहत 289 करोड़ की लागत से यूनिवर्सल रेल मिल (यूआरएम) स्थापित की गई है। इसमें ही 130 मीटर लंबे रेलपांत का निर्माण किया जाएगा। वहीं इस रेल मिल में अत्याधुनिक वेल्ड मशीन भी लगाई गई है, जिसमें 130 मीटर लंबे रेलपांत को जोड़कर 520 मीटर तक लंबा किया जा सकेगा। फिलहाल इस पर 130-130 मीटर के दो रेलपांत को जोड़ने का ट्रायल किया जा रहा है।

स्पेशल मालगाड़ी से परिवहन

बीएसपी द्वारा वर्तमान में 13, 26 व 65 मीटर लंबी रेलपांत बनाई जा रही है। इस रेलपांत के परिवहन के लिए बीएसपी की मांग पर रेलवे ने स्पेशल रैक बनाई है। इसी से वर्तमान में 13, 26 व 65 मीटर रेलपांत की ढुलाई भी होती है। इस स्पेशल रेक को रेलवे के भिलाई एक्सचेंज यार्ड में ही डिजाइन कर बनाया गया है। इस वजह से इसका नाम भी स्पेशल भिलाई रेक दिया गया है। वर्तमान में रेलवे के पास इस तरह की कुल 16 रेक उपलब्ध है। भविष्य में बीएसपी के उत्पादन व मांग की संभावना के अनुसार रेक की संख्या भी बड़ानी होगी।

यह दिक्कत बनी वजह

रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक बीएसपी में लंबी रेलपांत का उत्पादन शुरू होने के बाद उसकी मांग के अनुरूप रेक उपलब्ध करा पाना आसान नहीं होगा। कम से कम 60 रेक उपलब्ध कराना होगा। वहीं इन रेक के लिए यार्ड एवं मेंटेनेंस की व्यवस्था भी करनी होगी। रेलवे के पास वैसे भी मैनपावर कम है इस परिस्थिति में रेक उपलब्ध करा पाना संभव नहीं होगा। इस वजह से रेलवे चाहता है कि न सिर्फ विशेष रेक की व्यवस्था सेल करे, साथ ही इसके मेन्टेनेन्स की व्यवस्था भी उसी की जिम्मेदारी हो। इन्हीं तथ्यों को लेकर सेल को पत्र भेजा गया है।

अब आगे क्या

रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में पत्र भेजे जाने के बाद संयंत्र प्रबंधन की ओर से किसी तरह का जवाब नहीं मिला है। बीएसपी इन रेक के खर्च से बचना चाहेगा। यही स्थिति रेलवे की भी है। ऐसे में रेल प्रशासन बीएसपी से इसके एवज में राशि ले सकता है। वहीं मेन्टेनेन्स के नाम पर समझौता की स्थिति बन सकती है।

इसलिए जरूरी है

सेल द्वारा बनाए जा रहे रेलपांत का सबसे बड़ा खरीदार रेलवे ही है। रेलवे की कई बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं वहीं कई शुरू होने वाली है। इसमें लंबी रेलपांत का उपयोग होना है। बीएसपी में लंबी रेलपांत उत्पादन के तुरंत बाद इसकी आपूर्ति शुरू की जानी है। परिवहन के लिए रेक की व्यवस्था न होने पर परियोजनाएं प्रभावित होंगी।

एक नजर में सबकुछ

-16 रेक रेलवे के पास वर्तमान में है

-15 रेक प्रतिमाह बीएसपी की मांग है

-36 घंटे लगते हैं रेक लोड होने में

-35 दिन का टर्न होता है एक रेक का

-40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलती है

-100 रेक बीएसपी को अब लगेगा प्रतिमाह

रेलवे ने भेजा पत्र

'बीएसपी की वर्तमान आवश्यकता के लिए 16 विशेष रेक हमारे पास है। लंबी रेलपांत निर्माण शुरू होने के बाद कम से कम 100 रेक की जरूरत बीएसपी को होगी। इन अतिरिक्त रेक की व्यवस्था के लिए उच्च प्रबंधन द्वारा बीएसपी, सेल व इस्पात मंत्रालय को पत्र भेज दिया गया है।'

-विकास कश्यप, एरिया रेल मैनेजर, भिलाई

अब तक रेलवे ने ही रेक उपलब्ध कराया

'बीएसपी के यूआरएम की कमिशनिंग का कार्य जारी है। उत्पादन जल्द शुरू होगा। 130 मीटर व उससे अधिक लंबा रेलपांत का परिवहन रेलवे द्वारा ही किया जाएगा। अब तक रेलवे ने ही रेक उपलब्ध कराया है। रेलवे द्वारा भेजे गए पत्र की जानकारी फिलहाल मुझे नहीं है।'

-विजय मैराल, डीजीएम, पीआर, बीएसपी

Posted By:

NaiDunia Local
NaiDunia Local