राकेश वर्मा, भिलाई । समाज सेवा का ऐसा जुनून की निकल पड़ी बाइक राइडिंग में...। पांच केंद्र शासित प्रदेशों के साथ ही 11 राज्यों में पहुंचकर ब्रेस्ट व सर्वाइकल कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने। कई बड़े शहरों में कार्यशाला भी लीं और बताया कि अगर हम जागरूक होंगे तो हर चार मिनट में देश में एक महिला को ब्रेस्ट कैंसर की वजह से अपनी जान नहीं गंवानी पड़ेगी।हम बात कर रहे हैं भिलाई निवासी फिजियोथैरिपिस्ट नम्रता सिंह की। नम्रता ने नईदुनिया से चर्चा के दौरान बाइक राइडिंग का अपना अनुभव साझा किया।उन्होंने बताया कि बचपन से ही उन्हें बाइक राइडिंग का शौक रहा है। वे शुरुआत से ही समाज सेवा करना चाहती थी और अब उसे साकार करने में लग गईं हैं। सेक्टर-8 स्थित इंग्लिश मीडियम सीनियर सेकंडरी स्कूली से उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि आगे वे देशभर के सभी राज्यों में जाएंगी।

उनका यह नेशनल अवेयरनेस मिशन मार्च 2020 में समाप्त होगा। समाज सेवा का है शौक पहले वह बुजुर्गों के साथ ही दिव्यांग बच्चों की सेवा करती थीं। इसके बाद उन्होंने महिलाओं की भी सेवा करने का मन बनाया। उन्होंने चर्चा में बताया कि देशभर में ब्रेस्ट कैंसर से हर चार मिनट में एक महिला की मौत हो जाती है।

ऐसे में अगर शुरुआती लक्षण की पहचान हो जाए और तुरंत इलाज शुरू कराने से किसी की भी मौत नहीं होगी। इसके लिए किसी तरह की हाईडोज व कीमोथैरेपी की जरूरत नहीं पड़ती है। उन्होंने कहा कि उनका यह अवेयरनेस प्रोग्राम आगे भी जारी रहेगा।

बाइक राइडिंग की शुरुआत बेंगलुरु से

नम्रता ने बताया कि उन्होंने महिलाओं में ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरुकता लाने बाइक राइडिंग की शुरुआत कर्नाटक के बेंगलुरु से एक सितंबर 2019 से की। उन्होंने कर्नाटका के साथ ही गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, हिमांचल प्रदेश, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में भी अवेयरनेस प्रोग्राम किया।

इसके अलावा उन्होंने पांच केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एंड कश्मीर, दमन एंड दीव, दादर एवं हवेली, दिल्ली व लद्दाख भी बाइक राइडिंग कर पहुंची। वे 20 नवंबर को वापस छत्तीसगढ़ पहुंची हैं। अब आगे की सफर वे जल्द ही शुरू करने वाली हैं।

श्रीनगर के डाउन टाउन में लगा मैं तो मर ही गई

नम्रता के अनुसार जब वे जम्मू एंड कश्मीर के श्रीनगर पहुंची तो उन्हें एक समय ऐसा लगा कि अब मैं नहीं बचने वाली। बाइक पर वे तिरंगा लेकर चल रही थी। ठीक उसी समय ही धारा 370 हटाया गया था। उन्होंने बताया कि जैसे ही श्रीनगर पहुंची और बाइक पर लोगों ने तिरंगा लहराता देखा तो मुझे 10 से 15 की संख्या में लोगों ने घेर लिया और मारपीटर पर उतारू हो गए।

बाइक पर लहरा रहे तिरंगा को भी नुकसान पहुंचाया। किसी तरह से वह वहां से निकली। इस दौरान नेट व मोबाइल सेवा बंद होने से किसी से संपर्क भी नहीं हो पा रहा था। करीब एक सप्ताह बाद किसी तरह उन्होंने अपने घर वालों को सकुशल होने की जानकारी दी।

Posted By: Anandram Sahu