Chhattisgarh News : गणेश मिश्रा बीजापुर। नईदुनिया न्यूज । नक्सली संगठन अब अपने लड़ाकों को विश्वास में लेने में नाकाम होता दिख रहा है। परिणामस्वरूप वर्षों तक जंगल की खाक छानने और वारदातों को अंजाम देने के बाद लड़ाके अब संगठन छोड़कर घर लौटने लगे हैं। पहली बार ऐसा हो रहा है कि ऐसे नक्सली आत्मसमर्पण करने की बजाय सीधे घरों को लौट रहे हैं।

माना यह जा रहा है कि वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि नक्सलियों के निशाने पर ना रहें, क्योंकि आत्मसमर्पण करने वालों की उनके साथी नक्सली ही हत्या कर देते हैं। वहीं इससे वापसी का रास्ता भी बना रहता है। जबकि पुलिस कह रही है कि उसके पास ऐसे 12 नक्सलियों की सूची है, जिन्हें आत्मसमर्पण तो करना ही होगा।

पुलिस उनके साथ संवेदनशीलता का परिचय भी देगी। बीजापुर जिले में पिछले दो माह में करीब 20 मामले ऐसे आए हैं, जिसमें नक्सली संगठन छोड़कर परिवार के साथ रह रहे हैं। पुलिस के पास भी ऐसे 12 नाम हैं। पुलिस का मानना है कि जंगल में होने वाली परेशानियों को देखते नक्सली संगठन छोड़ रहे हैं।

चर्चा है कि ऐसे नक्सलियों को दोबारा बुलाया भी जा रहा है, लेकिन ये जाने से इन्कार कर रहे हैं। कुछ को जबरिया ले भी गए थे, लेकिन वे भाग आए हैं। पुलिस के अनुसार नक्सलियों के बटालियन से पांच, प्लाटून से तीन और एरिया कमेटी से चार माओवादियों ने संगठन का साथ छोड़ दिया है। अन्य 10 लोगों के नाम की भी पड़ताल की जा रही है। स

मर्पण के बाद ही मिलेगी सुविधा

एसपी कमलोचन कश्यप ने बताया कि नक्सली संगठन से परेशान होकर संगठन की एक लड़की को लेकर घर लौटने वाले एक सदस्य की नक्सलियों ने बाद में हत्या कर दी थी, परंतु अभी 11 नक्सली अपने गांवों में जीवनयापन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण करने के बाद ही पुनर्वास नीति के तहत सुवि;घळर्-ऊि्‌झ।ाएं मुहैया कराई जाएंगी।

इन नक्सलियों ने छोड़ा संगठन

बटालियन सदस्य लखु, मासे, लखमी आयत उर्फ मोटू, नागेश उर्फ सोना, प्लाटून नंबर आठ से लिंगा, नंदे, दीपक और जगरगुंडा एरिया कमेटी से माडा, गंगालूर एरिया कमेटी से प्रमिला, जैनी व मट्टीमरका की रहने वाली पामेड़ एरिया कमेटी की महिला सदस्य शामिल हैं। इनमें से नागेश उर्फ सोना की घर वापसी के बाद माओवादियों ने हत्या कर दी है।

विशेषज्ञ का पक्ष

अगर उनके नाम अपराध दर्ज है तो मामला न्यायिक प्रक्रिया का बन जाता है। नक्सल संगठन में बहुत से लोग ऐसे हैं जो किसी मजबूरी से वहां गए। ऐसे लोगों को आत्मसमर्पण कर राज्य सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ लेना चाहिए। यहां स्किल के मुताबिक काम दिया जाता है ताकि सरेंडर करने वाले आत्मनिर्भर बन सकें। अगर सरेंडर नहीं करेंगे तो आज नहीं तो कल पुलिस उन्हें गिरफ्तार करेगी या वे मुठभेड़ में मारे जाएंगे। और कोई विकल्प नहीं है। - नवीन ठाकुर, वरिष्ठ अधिवक्ता, जगदलपुर

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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