बीजापुर। शनिवार को केतुलनार में मतदान दल पर नक्सलियों के बारूदी विस्फोट घटना में मारे गए सात मतदानकर्मियों की मौत से जिले में मातम है। आक्रोश और गमगीन माहौल के बीच अंतिम संस्कार में लोगों की भारी थी। जिले में अलग-अलग जगहों पर एक साथ रविवार को पांच अर्थियां उठीं। तोयनार में शिक्षक एमैया झाडी के अंतिम संस्कार में काफी तादाद में लोग जमा हुए। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पुत्र उदित कुमार ने मुखाग्नि दी। इस दौरान परिजनों व गांव वालों के आंसू थम नहीं रहे थे।

बोरजे में अंगनपल्ली पाण्डू के अंतिम संस्कार में सैकड़ों लोग शामिल हुए। स्थानीय रीति रिवाजों के अनुसार पाण्डू का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में किया गया। उनके पुत्र अंगनपल्ली विकास ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। दोनों जगहों पर प्रशासन व विभाग के अधिकारी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। भोपालपटनम में शिक्षक यालम रामचन्द्रम व शिक्षक विजय सोनला का अंतिम संस्कार किया गया जिसमें क्षेत्र के सैकड़ों लोग शामिल हुए। अंतिम संस्कार के दौरान पूरे भोपालपटनम में गम का माहौल था। भद्रकाली में शिक्षक शंकर कुरसम का अंतिम संस्कार परिजनों ने किया।

फरसेगढ, सोमनपल्ली व बेदरे के मतदान कर्मियों ने चुनावी व्यवस्था की दास्तान गुस्से में बयान कर आयोग व प्रशासन को जमकर कोसा। कुटरू एरिया में 31 मतदान दल के करीब 150 मतदान कर्मचारी रुके हुए थे जिन्हें 20-20 किमी पैदल चलकर थकान से चूर होने के बावजूद न तो खाना मिला न ही सोने की जगह। इन मतदान दलों को ईवीएम जमा कराने के बाद सुरक्षाकर्मियों ने अपने खाने व सोने की व्यवस्था खुद करने को कहा।

व्यवस्था से नाराज मतदानकर्मियों ने परिचितों के यहां जाकर खाना खाया और जिसे जहां जगह मिली रात बिताई। सारी अव्यवस्था से परेशान मतदानकर्मियों के पास इतनी भी ताकत नहीं बची थी कि वे फिर कुटरू से नैमेड़ तक 25 किमी पैदल चल सकें। शनिवार की सुबह भूखे प्यासे मतदानकर्मियों को सुरक्षा बलों ने फिर पैदल चलने का निर्देश दिया। इसके बाद कुछ मतदानकर्मियों का हौसला टूट गया और उन्होंने बस से जाने का रास्ता चुना जो उनके लिए आखिरी सफर साबित हुआ।

सोना-खाना भी नसीब नहीं

कुटरू एरिया में पांच सेक्टर के मतदान दलों को 10 अप्रैल के चुनाव के बाद अपने-अपने मतदान केन्द्रो में रूकने का निर्देश दिया गया। इस दौरान मतदानकर्मियों को नहीं पता था कि उन्हें वापस पैदल जाना है। 11 अप्रैल को फोर्स ने मतदानकर्मियों को कुटरू तक पैदल चलने का निर्देश दिया। फोर्स के निर्देश पर फरसेगढ, सोमनपल्ली, बेदरे, मुरूमवाडा, जाटलूर व बोटेर के मतदानकर्मी परेशान हो गए लेकिन सुरक्षा के दृष्टि से मजबूरी में उन्हें 20 किमी से ज्यादा पैदल चलकर कुटरू आना पड़ा। इन दलों में कुछ मतदान कर्मी काफी बुजुर्ग थे तो कुछ बीमारियों से पीड़ित थे। इस एरिया के सेक्टर अधिकारियों ने मतदानकर्मियों की परेशानियों को जानना व समझना तक मुनासिब नहीं समझा उल्टे उन्हें अपने हाल पर छोड़कर सेक्टर अधिकारी बीजापुर वापस आ गए।

वादा कर नहीं लौटे एमैया

मृतक एमैया झाड़ी चुनाव के दौरान प्रशिक्षण के नाम पर लगातार घर से बीजापुर आना-जाना कर रहे थे। इस दौरान उन्हें नहीं पता था कि धुर नक्सल प्रभावित माड़ एरिया के बोटेर में मतदान के लिए पैदल जाना पड़ सकता है। चुनाव के लिए जाने से एक दिन पहले एमैया को मतदान केन्द्र बोटेर जाने की जानकारी मिली। घर आकर तोयनार में एमैया ने अपने घर वालों को अगले दिन बोटेर जाने की जानकारी दी। घर वालों की चिंता पर एमैया ने उनसे कहा कि मुझे क्या होगा? मैं अच्छे से आ जाऊंगा। एमैया की यही आखिरी शब्द दोहराते हुए उनकी पत्नी पुष्पा के आंसू थम नहीं रहे थे। एमैया के साथ गए मतदानकर्मियों ने बताया कि मतदान के बाद उन्हें बुखार था।

Posted By: