बीजापुर। जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत गंगालूर अब कृषि के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। परंपरागत कृषि के स्थान पर गंगालूर के 18 किसानों ने अपने 24 एकड़ कृषि भूमि पर धान नही लगाने का निर्णय लिया। क्योंकि किसान शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं को समझने लगे है। जिससे उनकी आमदनी में कई गुना इजाफा होने वाला है।

विभागीय अमला द्वारा निरंतर शासन की विभिन्ना किसान हितैषी नीतियों का और उनके लाभ का किसानों के बीच प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। जिसमें राजीव गांधी किसान न्याय योजना, मुख्यमंत्री पौधरोपण प्रोत्साहन योजना धान के बदले अन्य फसल लेने की योजना और उसका सकारात्मक परिणाम जिले के किसानों को मिल रहा है। गंगालूर के किसानों ने बताया कि हम पहले केवल एक फसल धान खरीफ सीजन में लेते थे। जिससे प्रति एकड़ 15-20 हजार अधिकतम आमदनी होती थी। लेकिन धान के बदले फलदार पौधरोपण से आमदनी में कई गुना वृद्धि होगी।

बीजापुर के उद्यानिकी विभाग के अधिकारी नरवरिया ने बताया कि पहले किसान सिंचाई और तकनीकी मार्गदर्शन के अभाव में केवल एक ही फसल खरीफ में धान लेते थे। जिसमें अधिकतम 15 से 20 हजार की आमदनी होती थी, लेकिन अब सीताफल की खेती से मुख्यमंत्री पौधरोपण प्रोत्साहन योजना के तहत प्रति एकड़ प्रति तीन वर्षों तक 10-10 हजार र्स्पए कृषि अदान सहायता के रुप में मिलेंगे। गंगालूर के कृषक अब एक साल में तीन फसल लेंगेः मंगल राना कृषक मंगल राना ने बताया कि अब किसान सीताफल के अलावा एक साल में तीन फसल लेंगे, अभी बरबट्टी और भिंडी लगाएं हैं।

जिसका दो माह बाद उत्पादन शुरु हो जाएगा। इंटरकार्प विधि से 10-10 फीट मे ंसीताफल का रोपण किया गया है और बीच कतार में भिंडी और बरबट्टी लगाए है। इसी तरह रबी के मौसम में गोभी वर्गीय सब्जी, फूल गोभी, पत्तागोभी, मूली, प्याज और विभिन्नाा प्रकार के भाजी लगाएंगे। जायद सीजन में करेला, बरबट्टी लौकी तोरई सहित विभिन्ना सब्जी लगाएंगे। पहले साल में एक बार खेती होती थी अब तीन बार फसल लेंगे। गंगालूर के कृषक मंगल राम राना ने बताया कि साग सब्जी के इस अर्न्तवर्तीय फसल में प्रति सीजन प्रति एकड़ 60 से 70 हजार रुपए की आमदनी होगी।

इस प्रकार एक वर्ष में एक लाख अस्सी हजार से 2 लाख रुपये तक आमदनी प्राप्त कर सकेंगे। तीन वर्ष बाद जब सीताफल का फसल तैयार होगा, तब प्रति एकड़ तीन लाख 50 हजार रुपये तक की आमदनी सीताफल से प्राप्त होगी। इस तरह तीन वर्ष के बाद प्रति एकड़ पांच लाख से अधिक की आमदनी होगी। इस तरह से 24 एकड़ खेत में प्रति वर्ष एक करोड़ 20 लाख की आमदनी होने की संभावना है। जिला प्रशासन ने क्षेत्र के किसानों की प्रेरित करने का काम कर रही है।

दो लाख रुपये तक आमदनी

जो भी आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है। जिसमें पूरे 24 एकड़ में फसलों की सुरक्षा हेतु डीएमएफ मद से तार फेसिंग, 4 नग ट्यूबवेल ड्रीप सिस्टम, मल्चींग, विद्युत ट्रांसफार्मर, ह्वीएनआर किस्म मधुर हाइब्रीड बीज के अलावा तकनीकी मार्गदर्शन विभागीय अधिकारियों द्वारा कृषकों को नियमित रूप से दिया जा रहा है। गंगालूर के किसान मंगलराम राना के साथ अन्य कृषक नरेन्द्र पाण्डे, रामचंद पाण्डे, रामनाथ भोयर, चमरु पाण्डे, मानबती पाण्डे, सुखदेव पाण्डे, रामबती राना, रविन्द्र राना, जनमती राना, और दीपेन्द्र राना ने बताया कि किसानों को इस महत्वाकांक्षी योजनाओं से बहुत अच्छे ढंग से विभागीय अधिकारी द्वारा जानकारी दी जा रही है। सभी कृषकों ने कहा कि हम सभी पूरी लगन और मेहनत से कृषि कार्य को करेंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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