मोहम्मद ताहिर खान

बीजापुर। केतुलनार में चुनाव पार्टी पर 12 अप्रैल को बारूदी विस्फोट की घटना को अंजाम नक्सलियों ने बड़ी चालाकी से दिया। फोर्स को इस इलाके में नक्सलियों के सक्रिय रहने व किसी घटना को अंजाम देने की जानकारी पहले से ही थी। नक्सली मंसूबों को देखते हुए फोर्स ने पोलिंग पार्टियों को कुटरू में ही रोक लिया था। फोर्स कुटरू से गुदमा के बीच सड़क की निगरानी लगातार कर रही थी, जिसमें उसने केतुलनार के पास ही एक रात पहले नक्सलियों के एंबुश को भेदने में सफलता पाई थी। फोर्स की तमाम चौकसी व सतर्कता के बावजूद नक्सली रणनीति में उनसे आगे निकल गए और एक नाबालिग नक्सली के जरिए घटना को अंजाम देने में सफल रहे।

घटना को नक्सलियों ने बड़ी चालाकी से फोर्स की मौजूदगी में अंजाम दिया। घटना स्थल के दोनों ओर खेत है जहां जंगल काफी कम है। गांव के नजदीक होने के कारण यहां घटना होने की आशंका फोर्स को नहीं थी। लगभग 100 मतदान कर्मियों को कंट्रोल यूनिट के साथ फोर्स की एक पार्टी कुटरू से पैदल लेकर निकली। आधे घंटे बाद कुटरू में रुके 17 मतदान कर्मी दो बसों में सवार होकर बीजापुर के लिए निकले थे। मतदान दलों के आने के दौरान बकायदा रोड ओपनिंग पार्टी रास्ते भर लगी हुई थी। फोर्स के पास बम का पता लगाने वाला एक्सप्लोजिव डिटेक्टर भी था लेकिन यह घटना स्थल पर बम का पता लगाने में नाकाम रहा। मतदान दल की पैदल पार्टी फोर्स के साथ घटना स्थल केतुलनार को पार कर गुदमा तक पहुंच चुकी थी। इस दौरान बचे हुए मतदानकर्मियों को लेकर निकली दोनों बसों में से एक बस जिसमें 7 लोग सवार थे घटना स्थल को पार कर गई। इसके ठीक पीछे 10 मतदान कर्मियों को लेकर आ रही दूसरी बस को नक्सलियों ने बारूदी विस्फोट से उड़ा दिया। सामने की बस में बैठे मतदानकर्मियों ने बताया कि जिस जगह विस्फोट हुआ उसके आसपास फोर्स तैनात थी। मतदानकर्मियों के मुताबिक जिस जगह से विस्फोट किया गया वहां एक तेरह-चौदह साल का लड़का पेड़ के पास 200 मीटर की दूरी पर बैठा था। फोर्स ने भी उस बच्चे को वहां देखा लेकिन सामान्य बालक समझकर उसके इरादों को समझने की भूल की। घटना के बाद बाल नक्सली तुुरंत गायब हो गया। इस संबंध में डीएसपी नक्सल ऑपरेशन सुखनंदन राठौर ने नईदुनिया को बताया कि नक्सली ऐसे कामों के लिए बच्चों का भी इस्तेमाल करते हैं। यह भी हो सकता है कि ट्रिगर ऑपरेट करने में बाल संघम का हाथ रहा हो। केतुलनार घटना में नक्सलियों द्वारा बिछाई गई बारूद पांच से छह साल पुरानी मानी जा रही है। आज के हालात में नैमेड़ से कुटरू मार्ग सुरक्षा के लिहाज से काफी सुरक्षित माना जाता है इसलिए इस मार्ग पर रात में भी लोगों की आवाजाही रहती है। लैंडमाइंस से जोड़े गए वायर भी नक्सलियों ने काफी चालाकी से जमीन के अंदर 6 इंच गढ्ढा कर दो सौ मीटर तक बिछाया था जिसका पता लगाने में सर्चिंग पार्टी नाकाम रही।

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