बिलासपुर। राज्य सरकार ने प्रदेश में सीबीआइ के प्रवेश पर रोक लगा रखी है। सरकार अब इस बात को लेकर पसोपेश में है कि हाई कोर्ट ने एक हजार करोड़ रुपये घोटाले के आरोपितों के खिलाफ सीबीआइ जांच के निर्देश दिए हैं। सीबीआइ ने डिवीजन बेंच के निर्देश पर अज्ञात के खिलाफ भोपाल में एफआइआर दर्ज कर ली है। शुक्रवार को महाधिवक्ता सतीशचंद्र वर्मा ने डिवीजन बेंच के समक्ष सीबीआइ के बजाय राज्य पुलिस को जांच का जिम्मा सौंपने की मांग की है। महाधिवक्ता ने राज्य पुलिस की जांच हाई कोर्ट के निगरानी में कराने की बात कही ।

समाज कल्याण विभाग में एक हजार करोड़ रुपये के घोटाले की जांच सीबीआइ ने शुरू कर दी है। जस्टिस प्रशांत मिश्रा की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच के निर्देश पर सीबीआइ ने एफआइआर दर्ज कर लिया है। एक नाटकीय घटनाक्रम के चलते डिवीजन बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने महाधिवक्ता कार्यालय के जरिए स्पेशल डिवीजन बेंच के समक्ष बीते दिनों रिव्यू पिटीशन दायर किया था।

शुक्रवार को जस्टिस प्रशांत मिश्रा व जस्टिस पीपी साहू की स्पेशल डिवीजन बेंच में पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई हुई । शासन की ओर से महाधिवक्ता ने इस पर बहस की। स्पेशल डिवीजन बेंच के समक्ष सरकार की तरफ से बात रखते हुए महाधिवक्ता वर्मा ने कहा कि राज्य शासन ने सिर्फ एक मसले पर रिव्यू पिटीशन दायर की है।

महाधिवक्ता ने डिवीजन बेंच के समक्ष अनुरोध किया कि एक हजार करोड़ रुपये के घोटाले की जांच सीबीआइ की जगह राज्य पुलिस को जांच के लिएु मामला सौंपा जाना चाहिए। अपना तर्क देते हुए कहा कि राज्य पुलिस इस मामले में जांच करने की इच्छुक है और पूरी तरह सक्षम भी ।

एडवोकेट जनरल ने यह भी कहा कि राज्य पुलिस द्वारा इस मामले की किए जाने वाली जांच को हाई कोर्ट अपनी निगरानी में रखे। महाधिवक्ता के तर्क के बाद डिवीजन बेंच ने रिव्यू पिटीशन दायर करने के संबंध में पूछते हुए कहा कि ऐसा कौन सा कारण है जिसके चलते इस गंभीर मामले में राज्य शासन को रिव्यू पिटीशन दायर करना पड़ा ।

कोर्ट ने यह भी कहा कि घोटाले से बढ़कर यह सुनियोजित षड़यंत्र है। महाधिवक्ता ने कहा शासन ने रिव्यू पिटीशन दायर करने से पहले यथोचित स्तर पर निर्णय लिए जाने की जानकारी दी । महाधिवक्ता द्वारा दी गई जानकारी और पेश किए गए तर्क को सुनने के बाद स्पेशल डिवीजन बेंच ने रिव्यू पिटीशन पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

दो अफसरों की याचिका खारिज

पूर्व आइएएस बीएल अग्रवाल व राज्य सेवा संवर्ग के अधिकारी सतीश पांडेय द्वारा दायर रिव्यू पिटीशन को स्पेशल डिवीजन बेंच ने खारिज कर दिया है। दोनों अफसरों ने समाज कल्याण विभाग में हुए एक हजार करोड़ रुपये के घोटाले से कोई लेना देना नहीं है। साथ ही इसमें उनकी किसी भी तरह की कोई भूमिका नहीं है।

ढांढ की एसएलपी पर सुप्रीम कोर्ट में 13 को होगी सुनवाई

पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांढ ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की है। उनकी याचिका पर 13 फरवरी को सुनवाई होगी । याचिकाकर्ता कुंदन सिंह ने अपने वकील देवर्षि ठाकुर के जरिए पहले ही सुप्रीम कोर्ट में केविएट दायर कर दिया है। दायर केविएट में मांग की है कि घोटाले से संबंधित दायर होने वाली याचिका में फैसला देने से पहले उनका भी पक्ष सुना जाए ।

Posted By: Nai Dunia News Network