बिलासपुर। भगवान जगन्नाथ यात्रा के लिए 16 फीट लम्बा, 17 फीट ऊंचा रथ बनकर तैयार है। अभी भगवान जगन्नाथ महास्नान के बाद बीमार पड़ गए हैं। उन्हें स्वास्थ्य के लिए काढ़ा पिलाया जा रहा है। ठीक होने के बाद रथ यात्रा निकाली जाएगी। 101 फीट की रस्सी से तैयार की जा रही है। इसके बाद धूमधाम से रथ यात्रा निकाली जाएगी। समिति के सदस्य ने बताया कि जगन्नाथ स्वामी का सेहत खराब है। भैया बलदाऊ, बहन सुभद्रा और सुदर्शन चक्र देखभाल कर रहे हैं। रथ 16 फीट लंबा, 17 फीट ऊंचा और 12 फीट चौड़ा बनाया गया है। रथ को बनाने में एक लाख रुपए खर्च हो रहे हैं।

रथ को केवल कपड़े से सजाना बचा हुआ है। भारी संख्या में भक्त रथ को खीचेंगे। इसके लिए 101 फीट की रस्सी भी तैयार की जा रही है। 29 जून को नेत्रोत्सव के साथ पट खुलेगा। सुबह 9.30 से 10.30 बजे तक पूजा-अर्चना होगी। मंदिर में नया ध्वज चढ़ाया जाएगा। 30 जून को भगवान भक्तों को दर्शन देंगे। भगवान के रथ प्रतिष्ठा 30 जून की शाम छह बजे होगी। एक जुलाई को रथयात्रा निकाली जाएगी। गुंडिचा यात्रा में छेरापहरा की रस्म दोपहर एक बजे डा. एपी पटनायक अदा करेंगे। दोपहर दो बजे से रथ यात्रा शुरू होगी। नो जुलाई को भगवान की घर वापसी के लिए बहुड़ा यात्रा निकलेगी। भगवान नाराज माता लक्ष्मी को मनाते हुए अपने घर वापसी करेंगे।

जगन्नाथ मंदिर की स्थापना 1996 में हुई थी

रेलवे क्षेत्र में भगवान जगन्नाथ के मंदिर की स्थापना 26 नवंबर 1996 को हुई थी। स्थापना के बाद एक बार मंदिर में स्थापित प्रतिमाएं बदली जा चुकी हैं। जो लोग पुरी दर्शन करने नहीं जा पाते, उन्हें भगवान के दर्शन शहर हो जाता है। 26 साल से शहरवासियों को पुरी का दर्शन मिलता है।

तीन मंदिरों से रथ यात्रा निकलती है

शहर के प्रमुख तीन मंदिरों से रथयात्रा निकलकर व्यंकटेश मंदिर पहुंचती है। जहां विधि-विधान से पूजा अर्चना होती है। इसके बाद भेंट देकर भगवान को विदा किया जाता है। सिम्स चौक में परासा मंदिर है। परासा मंदिर से शहर में सबसे पहले रथयात्रा निकालते थे। यात्रा पहले बैलगाड़ी पर निकालती थी। बैलो को सजाया जाता था। अब समय के हिसाब से बदल गया है। अब किराए का रथ में निकाली जाती है। गोल बाजार, सदर बाजार, तेलीपारा भ्रमण करते हुए व्यंकटेश मंदिर पहुंचते थे।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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