बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि। सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) संसाधन व फैकल्टी की कमी के कारण यहां के पीजी सीट में प्रवेश लेने की रूचि छात्र-छात्राओं में कम हो गई है। इसी कारण से यहां पीजी की 30 प्रतिशत सीट खाली रह गई। बायोकेमेस्ट्री, माइक्रोबायोलाजी, फार्माकोलाजी, पीएसएम, स्कीन और गायनिक के 11 सीटे यहां खाली रह गई। जबकि इसके लिए तीन राउंड की काउंसिलिंग के बाद भी केवल 28 ने पीजी सीट में प्रवेश लिया है। कुल 44 पीजी सीट में पांच पर प्रवेश की अनुमति ही नहीं मिली थी। वहीं काउंसीलिंग के बाद भी 11 सीटें खाली रह गई है।

सिम्स में पदस्थ चिकित्सकों से मिली जानकारी के अनुसार नान क्लीनिकल में प्राइवेट अभ्यास का कोई स्कोप नहीं होता। इन विषयों से एमडी डाक्टर केवल जनरल प्रैक्टिशनर की तरह इलाज कर सकते हैं। इसलिए एमबीबीएस के बाद डाक्टर ऐसे विषयों में प्रवेश लेना ही नहीं चाहते। मालूम हो कि सिम्स सहित प्रदेश के मेडिकल कालेजों में पीजी कोर्स में प्रवेश दो दिसंबर तक पूरा हुआ। तीन राउंड की काउंसिलिंग के बाद आखिरी चरण के लिए सिम्स में पीजी के 11 सीटे खाली रह गई है।

ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट के नियमानुसार अब इन खाली बचे 11 सीट पर भी इस शिक्षा सत्र में प्रवेश नहीं हो सकता है। वहीं अब इन सीटों को लैप्स मान लिया गया है। साफ है कि पीजी की एक-एक सीट में प्रवेश के लिए आपाधापी मची रहती है। लेकिन सिम्स में प्रवेश प्रक्रिया के बाद भी सीट का खाली होने से साफ है कि सिम्स के प्रति छात्र-छात्राओं को रूझान कम हुआ है।

एमबीबीएस की 20 सीट भी नहीं बढ़ी

सिम्स में वर्तमान में 180 सीटों पर एमबीबीएस में भी पढ़ाई हो रही है। ऐसे में सिम्स प्रबंधन ने 2022-23 शिक्षा सत्र के लिए सिम्स में 20 एमबीबीएस सीटे और बढ़ाने के लिए एनएमसी को प्रस्ताव भेजा था। लेकिन 2022-23 शिक्षा सत्र के लिए एमबीबीएस का भी प्रवेश प्रक्रिया पूरा हो गया। सिम्स को इस वर्ष भी 200 सीटों पर एमबीबीएस की मान्यता नहीं मिल पाई है। अब प्रबंधन का कहना है कि दिसंबर माह के दूसरे या तीसरे सप्ताह में एमबीबीएस के 20 सीटों की मान्यता के लिए एनएमसी की टीम निरीक्षण पर आ सकती है।

व्यवस्थाओं के अभाव के कारण रूचि नहीं

सिम्स के प्रोफ्रेसरों का कहना है कि पिछले कुछ सालों से नान क्लीनिकल विषयों की सीटें खाली रह रही हैं। ऐसा ट्रेंड केवल प्रदेश में नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी है। हालाकि कहा जा सकता है कि जिन विषयों की मांग ज्यादा है, उनमें एडमिशन सबसे पहले हो रहा है। डाक्टरों की टीचिंग में रुचि पहले की तुलना में कम हो रही है और प्रैक्टिस पर ध्यान ज्यादा है। इसके अलावा सिम्स मेडिकल कालेज में फैकल्टी की कमी के कारण भी यहां ज्यादातर छात्र-छात्राएं पीजी की पढ़ाई करना नहीं चाहते है। इसी वजह से सरकारी मेडिकल कालेज में नान क्लीनिकल सीट में प्रवेश के इच्छुक कम मिल रहे हैं।

ये सीट रह गई खाली

बायोकेमेस्ट्री में तीन

माइक्रोबायोलाजी में तीन

फार्माकोलाजी में दो

पीएसएम में एक

स्कीन में एक

गायनोकोलाजी में एक सीट

क्या कहता है प्रबंधन

कई छात्रों को कुछ विषयों का च्वाइस नहीं रहता है। इसलिए कई सीटें खाली रह जाती है। सिम्स मेडिकल कालेज में कुल 39 पीजी की सीटों में एडमिशन होना था। लेकिन 28 सीटों में ही एडमिशन हो पाया। 11 पीजी की सीटें खाली रह गई।

केके सहारे, डीन, सिम्स

Posted By: Abrak Akrosh

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