बिलासपुर। Bilaspur News: जमीन में गहराई तक पंप खुदाई करके बड़े पैमाने पर भू-जल का दोहन कर व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। भू-जल आयोग से जिले के सिर्फ 21 उद्योगों ने अनुमति ली है। लेकिन इनके द्वारा टैक्स नहीं दिया जा रहा है। टैक्स वसूली के लिए ऐसे 70 से अधिक उद्योगों की पहचान की गई है। अब सिंचाई विभाग सर्वे कर कार्रवाई के लिए अभियान चलाने का निर्णय लिया है।

केंद्रीय भू-जल आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सिंचाई विभाग हरकत में आ गया है। आयोग से मिली सूची के आधार पर 21 चिन्हित उद्योगों को टैक्स जमा करने के लिए सूचित किया गया है। इन उद्योगों को सिंचाई विभाग से अनुबंध के बिना पानी निकालने के कारण तीन गुना जुर्माना जमा करने के लिए कहा गया है। इधर जिले में 70 से अधिक ऐसे उद्योग भी हैं जिन्होंने केंद्रीय जल आयोग से अनुमति ही नहीं ली है।

इसकी जानकारी जुटाने के लिए सिंचाई विभाग को सर्वे करने कहा गया है। सिंचाई विभाग इन उद्योगों को चिन्हित करेगा और फिर उन्हें टैक्स जमा करने के लिए नोटिस जारी किया जाएगा। खारंग जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता आरपी शुक्ला ने बताया कि भू-जल टैक्स वसूली के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए जिले में संचालित उद्योगों का सर्वे कराया जाएगा। फिर उनसे केंद्रीय भू-जल बोर्ड से अनुमति लेने के लिए निर्देशित किया जाएगा। इसके साथ ही उनसे टैक्स की वसूली भी की जाएगी।

मुफ्त था भू-जल

सिंचाई विभाग अब तक केवल नहर, एनीकट और डायवर्सन से नहर के जरिए पानी देने पर ही जल कर लेता था। बड़े और गहराई तक पंप करके भू-जल का दोहन करने वालों पर कोई टैक्स नहीं लगता था। नए नियम के बाद अब भू-जल भी टैक्स के दायरे में आ गया है।

एनओसी लेना आवश्यक

कार्यपालन यंत्री शुक्ला का कहना है कि नए नियम के बाद अब किसी भी तरह से भू-जल का उपयोग करने के लिए उद्योगों को केंद्रीय भू-जल बोर्ड से एनओसी लेना आवश्यक है। अब अनुमति नहीं लेने वाले उद्योगों का सर्वे किया जाएगा। फिर उन्हें चिन्हित कर नियमानुसार जुर्माना वसूली सहित अन्य कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: anil.kurrey

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