बिलासपुर। अचानकमार टाइगर रिजर्व में चुनाव के ठीक एक दिन पहले सांभर का शिकार हुआ। पर टाइगर रिजर्व प्रबंधन को इस घटना की भनक तक नहीं लगी। नौ दिन भी यह तब सामने आई, जब ट्रैप कैमरे से चिप निकालकर कंप्यूटर पर अपलोड किया। सामने नजारा देख अधिकारियों के होश उड़ गए। हथियारों से लैस सात शिकारियों की तस्वीर थी। इससे विभाग में हड़कंप मच गया।

आनन- फानन में शिकारियों की पहचान के लिए अमला जुट गया। पांच को दूसरे दिन ही पकड़ लिया। सभी के कब्जे से शिकार में इस्तेमाल हथियार को बरामद भी कर लिया गया। पकड़े गए आरोपितों के खिलाफ अपराध दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया। जहां से सभी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

घटना 19 नवंबर की है। दूसरे दिन 20 नवंबर को दूसरे चरण का मतदान होना था। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के निर्देश पर अभी अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों की गणना चल रही है। इसके लिए हर रेंज के कोर जोन में ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। कैमरे चिप लगे हुए हैं। कैमरे से गुजरने वाली कोई भी चीजों को आटोमेटिक कैमरा कैद कर लेता है। चार से पांच दिन में अमला हर कैमरों की चिप निकालकर उसे कम्प्यूटर पर में अपलोड़ करता है। दरअसल यह विधि बाघों की तस्वीर कैद करने के लिए है।

27 नवंबर को अमला हर रेंज की तरह सुरही रेंज में लगे अलग- अलग कैमरों के चिप निकाले गए। इसके बाद उसे कार्यालय लाकर कम्प्यूटर में देखा गया। पहले से कुछ वन्यप्राणी की तस्वीर नजर आई। लेकिन थोड़ी देर में एक बाद शिकारियों की तस्वीर नजर आई। सभी के हाथ में हथियार थे। पूरा मामला स्पष्ट हो गया।

शिकार कर ले जाते वन्यप्राणी भी तस्वीर भी दिखी। इस घटना ने विभाग में खलबली मचा दी। आनन- फानन में टाइगर रिजर्व के अलावा मुख्यालय के अफसरों को इसकी सूचना दी। उनसे दिशा- निर्देश मिलने के बाद गोपनीय ढंग से दूसरे ही दिन जांच शुरू कर दी गई। मुखबिर या मैदानी अमले की मदद से पता लगाया गया कि कैमरे में कैद शिकारी किस गांव के हैं। हालांकि इसमें उन्हें कुछ खास मशक्कत नहीं करनी पड़ी।

एक बाद एक सातों की पहचान हो गई। एक को छोड़कर अन्य सुरही रेंज के राजक गांव के हैं। उनके घरों में दबिश देकर पकड़ा गया। पांच को गिरफ्तार करने में सफलता भी मिल गई। हिरासत में लेने के बाद पूछताछ में उन्होंने सांभर का शिकार करना स्वीकार कर लिया। उनके बयान के आधार पर लमनी रेंज के कक्ष क्रमांक 337 में जाकर जांच की गई।

तो मौके से मृत सांभर के शरीर के बाल, वह बल्ली में जिसे मारने के बाद टांगा गया था। साथ ही खून के धब्बे में मिले। शिकारियों ने इसी जगह पर शिकार करने करने की पुष्टि की। जब्त अवशेष की फारेसिंक जांच के लिए भेजा जाएगा। सभी के खिलाफ वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अपराध दर्ज किया गया।

इन्हें किया गया गिरफ्तार

- रामदास पिता दशाराम

- राजसिंह पिता चेतन

- पहलाद पिता सहदेव

- राजकुमार पिता बजारू

- गोंदिया पिता सोनू

फरार आरोपित, जिनकी तलाश जारी

- रंजकी निवासी चतुर

- रोहित पिता बजारू

तीर- धनुष व कुल्हाड़ी से किया शिकार

सांभर का शिकार तीर- धुनष व कुल्हाडी से किया गया। तस्वीर में स्पष्ट हथियार नजर आ रहे थे। इसके अलावा जांच के दौरान उनके कब्जे से हथियार में बरामद हो गए। कुल्हाडी व बल्ली में खून के धब्बे भी थे।

सुरक्षा में बड़ी चूक

इस घटना ने टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। बैगा शिकारी की भेष में भीतर घुसे और एक से दूसरे रेंज में बड़ी आसानी से पहुंचकर घटना को अंजाम भी दिया। लेकिन इस बीच विभाग के एक भी अमले की नजर उन पर नहीं पड़ी। इससे साफ है कि मैदानी अमले की जंगल के अंदर तैनात नहीं रहते हैं। अधिकारी भी जांच को लेकर गंभीर नहीं है। इस पूरे मामले में जांच भी हो रही है। जिम्मेदार अधिकारी से लेकर कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

- सांभर का शिकार हुआ था। ट्रैप कैमरे में शिकारियों की तस्वीर आने के बाद सभी को पकड़ने के निर्देश दिए गए थे। टीम ने पांच को पकड़ लिया है। सभी के खिलाफ अपराध दर्ज कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेल दिया गया। - पीके केशर, फील्ड डायरेक्टर, अचानकमार टाइगर रिजर्व

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