बिलासपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि) बिलासपुर शहर में एक ऐसा भी मंदिर है जो सिर्फ दशहरे के दिन है पट खुलता है।। राम जानकी हनुमान मंदिर में आस्थावानो की भीड़ लगी रहती है। प्रतिवर्ष विजयदशमी के दिन महज दो घंटे के लिए मंदिर का पेट खुलता है। कोरोना संक्रमणकाल में भी इस मंदिर में दो घंटे की पूजा-अर्चना हुई थी। तब भी सैकड़ों की संख्या में आस्थावानों की भीड़ मंदिर के बाहर अपनी बारी के इंतजार में कतारबद्ध खड़ी हुई थी।

इस बार शहरवासियों व अन्य प्रदेशों से आने वाले आस्थावानों के लिए राहत की बात यह है कि मंदिर प्रबंधन ने समय को दो घंटा आगे बढ़ा दिया है। मंदिर का पट चार घंटे के लिए खुला रहेगा। इस दौरान मन्नत मांगने वाले नारियल चढ़ाएंगे और जिनकी मन्नते पूरी हो गई है वह नारियल फोड़कर आशीर्वाद लेकर अपने गंतव्य की ओर रवाना होंगे।

बिलासपुर शहर में तकरीबन 150 वर्ष पुराना राम जानकी हनुमान मंदिर है,जो सिर्फ दशहरा के दिन ही खुलता है। प्रतिवर्ष मंदिर को दो घण्टे के लिए खोला जाता था। इस वर्ष इसे चार घन्टा कर दिया है। आज विजयदशमी है। शाम पांच से रात नो बजे तक मंदिर खुला रहेगा। सजे बाद पुजारी पूजा अर्चना जरेंगे और मंदिर का पट एक साल के लिए बंद कर देंगे। मंदिर में भगवान राम, माता और परम् रामभक्त हनुमान जी की प्रतिमा है। इनके दर्शन के लिए पूरे साल भक्तों को इंतजार रहता है।

छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों के मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश,हरियाणा, मुंबई से आस्थावान आते हैं। दर्शन व पूजा अर्चना के लिए शाम चार बजे से ही मंदिर के बाहर कतार लगनी शुरू हो जाती है। कास बात ये कतार में अपनी बारी का इंतजार करते श्रद्धालुओं में विवाद की स्थिति नहीं बनती।

मन्नत मानकR बांधते हैं नारियल

मंदिर के पुजारी बुद्धेश्वर शर्मा बताते हैं कि यहां लोगों की मन्नतें पूरी होती है। श्रद्धालू मन्नत मांगने के साथ ही लाल कपड़े में नारियल बांधते हैं। नारियल में विशेष निशान भी बनाते हैं। मन्नते पूरी होने के बाद नारियल को फोड़ने आते हैं। वही निशान पहचान रहता है जिसे बाँधते समय कपड़े में बनाया जाता है। पंडित. शर्मा बताते हैं कि वर्तमान में जहां मंदिर है पहले यहां एक नीम का पेड़ हुआ करता था। पेड़ सूखकर गिर गया। पेड़ के गिरते ही उनके जड़ों से श्रीराम, माता जानकी और हनुमान जी की प्रतिमा निकली थी।

जहां विधि-विधान से मंदिर की स्थापना की गई। मंदिर खुलने और प्रभु की प्रतिमाओं को स्पर्श करने से उस दौर में कई अप्रिय घटनाएं भी घटित हुईं। इसके चलते मंदिर को बन्द रखने का निर्णय लिया गया। विजयदशमी के दिन भगवान खुश रहते हैं और भक्तों की गलतियों को माफ करने के साथ उनकी मनोकामना पूरी करते हैं इसलिए साल में एक बार विजयदशमी के दिन मंदिर का पट खुलता है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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