बिलासपुर। Bilaspur News: सड़क हादसों के लिए नियमों को उल्लंघन प्रमुख कारण बनकर सामने आ रहा है। इसे रोकने के लिए यातायात पुलिस कड़ाई से जुर्माना भी वसूल रही है।

इसके बावजूद लोग नियम तोड़ रहे हैं। यही वजह है कि बीते तीन सालों में 946 लोगों को सड़क हादसों में जान गवानी पड़ी है। वहीं, विभाग ने बीते 10 महीने में ही नियमों का उल्लंघन करने पर 11 हजार 198 लोगों से जुर्माना वसूला है।

रोड सेफ्टी सेल के प्रभारी एसआइ उमाशंकर पांडेय ने बताया कि नियमों का पालन करने से दुर्घटनाएं टाली जा सकती हंै। उन्होंने बताया कि बीते 10 महीने में ही 30 लाख 53 हजार 300 स्र्पये जुर्माना वसूला गया है। ये जुर्माना उन धाराओं के तहत किया गया है जो दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बनती है।

इसमें नशे की हालत में वाहन चलाना, दोपहिया में तीन सवारी, तेज गति से वाहन चलाना, हेलमेट नहीं पहनने समेत अन्य गंभीर धाराएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बीते साल नशे की हालत में वाहन चलाते हुए 13 वाहनों की दुर्घटनाएं हुई थीं। इन दुर्घटनाओं में 17 लोगों को जान गई थी। दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट नहीं पहनने पर हर साल कई लोगों को जान गवांनी पड़ती है। बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलने वालों पर यातायात पुलिस भी कार्रवाई करती है।

इसके बावजूद लोग हेलमेट नहीं पहनते हैं। यातायात पुलिस ने लाकडाउन के पहले और बाद में 349 लोगों पर कार्रवाई की है। उनसे एक लाख 74 हजार 500 स्र्पये जुर्माना वसूला गया है।

तेज रफ्तार है बड़ा कारण

साल 2019 में 1292 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं। इसमें 388 लोगों की जान चली गई थी। इनमें 600 से अधिक दुर्घटनाएं तेज रफ्तार वाहनों से हुई थीं।

साल 2020 में तेज गति से वाहन चलाने पर 550 लोगों पर कार्रवाई कर दो लाख 75 हजार जुर्माना वसूला गया है। इसके बावजूद भी लोग तेज गति से वाहन चलाने से बाज नहीं आ रहे हैं।

संसाधनों की भी है कमी

यातायात नियमों का पालन कराने वाली पुलिस के पास संसाधनों की भी कमी है। यातायात थाने को स्वीकृत बल नहीं मिल पाया है। जिले में यातायात सुबेदार के दो पद स्वीकृत हैं, दोनों ही खाली हैं।

वहीं, एसआइ के आठ पद हैं। इसमें चार एसआइ को नियुक्त किया गया है। इसी तरह एएसआइ का एक पद खाली है। यातायात थाने में 18 प्रधान आरक्षक और 42 आरक्षकों की कमी है।

लोग जागरूक हो इसके लिए कर रहें प्रयास

यातायात एएसपी रोहित बघेल ने बताया कि रोड सेफ्टी सेल की ओर से बीते साल शहर के हर स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम किए गए थे। इसमें विद्यार्थियों को यातायात नियमों की जानकारी दी गई थी।

साथ ही उन्हें नियमों के उल्लंघन से होने वाले दुर्घटनाओं के बारे मंे बताया गया। विद्यार्थियों को प्रेरित किया जाता है कि वे परिवार के सदस्यों को भी जागरूक करें।

Posted By: sandeep.yadav

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