बिलासपुर। Bilaspur News: कानन पेंडारी चिड़ियाघर प्रबंधन की लापरवाही से गुरुवार को एक रोजी पेलिकन पक्षी की मौत हो गई। पक्षियों को जिस केज में रखा गया है वह जर्जर है। चारों तरफ से बंद इस लोहे की जाली वाले केज में बंदर उत्पात मचा रहे थे। इसी बीच जाली टूट गई और बंदर अंदर घुसकर उत्पात मचाने लगे। इससे पक्षियों में अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान एक पेलिकन पक्षी की मौत हो गई। सुबह जू खुलने के बाद जब जू के कर्मचारी पहुंचे तो पक्षी केज में मृत पड़ा था।

घटना गुरुवार सुबह की बताई जा रही है। स्नेक पार्क के सामने रोजी पेलिकन पक्षियों का केज है। चारों तरफ से लोहे की जाली से पैक इस केज में चार रोजी पेलिकन हैं। केज पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। जालियां सड़ चुकी हैं। इतनी जर्जर स्थिति होने के बाद भी जू प्रबंधन ने मरम्मत ही नहीं की। इसी का खामियाजा पक्षियों को भुगतना पड़ा। गुरुवार को बंदरों का झुंड जू के अंदर घुस गया।

उत्पात मचाते हुए इस केज के ऊपर चढ़ गए। ज्यादा दबाव पड़ने के कारण केज टूट गया और बंदरों का झुंड अंदर घुस गया। अंदर घुसने के बाद भी बंदर उत्पात मचाते रहे। इससे पेलिकन पक्षियों के बीच खलबली मच गई और अंदर इधर-उधर भागने लगे। इसी अफरा-तफरी में एक पेलिकन को गंभीर चोट आई। काफी देर तक बंदर केज के अंदर उत्पात मचाते रहे, लेकिन कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।

सुबह जब जू खुलने से पहले कर्मचारी पहुंचे तो पेलिकन मृत पड़ा था। कर्मचारियों ने तत्काल इसकी जानकारी जू के अधिकारियों को दी। इसके बाद आनन-फानन में अधिकारी पहुंच गए। जू चिकित्सक ने मृत पेलिकन पक्षी का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

चार दिन पहले पीसीसीएफ ने जताई थी नाराजगी

चार दिन पहले वाइल्ड लाइफ प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) पीवी नरसिंह राव जू का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान अन्य केजों की तरह रोजी पेलिकन केज की हालत देखकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने इसकी मरम्मत के निर्देश दिए थे। इस बीच यह हादसा हो गया।

2004 में अहमदाबाद से लाए गए थे चारों पक्षी

रोजी पेलिकन को वर्ष 2004 में अहमदाबाद से लाया गया था। इसमें दो नर और दो मादा हैं, लेकिन जू का वातावरण इनके अनुकूल नहीं होने के कारण इनका कुनबा नहीं बढ़ सका। 16 साल से चार ही पेलिकन केज में थे। हालांकि इस बीच नए केज और अनुकूल वातावरण के लिए योजना बनाई गई। लेकिन इस पर अमल नहीं हो सका। केज के अंदर प़ेड-पौधे, झरना समेत अन्य चीजें इनके अनुकूल होते हैं। इस केज में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।

घटना के बाद मरम्मत

घटना के बाद सकते में आए अधिकारी दिनभर केज की मरम्मत कराने में जुटे रहे। हालांकि यही सतर्कता पहले दिखाई जाती तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती। केज मरम्मत के कारण पर्यटकों के सैर का रास्ता भी बंद कर दिया गया था।

सबसे बड़े समुद्री पक्षियों में एक

पेलिकन धरती के सबसे बड़े समुद्री पक्षियों में से एक है। लंबी चोंच और बड़े गले की थैली विशेषता होती है। जिनकी सहायता से चोंच की थैली में पर्याप्त पानी और भोजन रख सकते हैं। वे पानी की सतह पर उड़कर विशेष चोंच को पानी से टकराकर शिकार पकड़ते हैं। नर पक्षी का वजन नौ से 15 किलोग्राम तक होता है। इतना वजन होने के बावजूद यह मजबूत व तेज उड़ने वाला पक्षी है।

केज जर्जर है। इसलिए बंदर अंदर घुसकर उत्पात मचाने लगे। बंदरों को देख पक्षियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान एक पेलिकन की मौत हो गई।

कुमार निशांत

डीएफओ, बिलासपुर वनमंडल

Posted By: Nai Dunia News Network

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