बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि) लंपी वायरस की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरतना शुरू कर दिया है। कलेक्टर व जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार ने एक आदेश जारी कर जिले के सभी मवेशी बाजार के संचालन पर रोक लगा दी है। बिलासपुर जिले के सभी ब्लाकों में सप्ताह में एक दिन मवेशी बाजार का संचालन किया जाता है।

साप्ताहिक मवेशी बाजार में आसपास के किसान अपने मवेशियों को बेचने के लिए या फिर कृषि कार्य में जरूरत के हिसाब से खरीदारी करने के लिए आते हैं। गुजरात और राजस्थान में फैले वायरस के संक्रमण को देखते हुए जिला प्रशासन ने सतर्कता बरती शुरू कर दी है। कलेक्टर ने आदेश जारी कर साप्ताहिक मवेशी बाजार के संचालन पर फिलहाल रोक लगा दी है। जारी आदेश में कहा गया है कि वायरस को देखते हुए सावधानी बरती जा रही है। संक्रमण समाप्त होते ही साप्ताहिक बाजार को पुन: संचालित किया जाएगा। पशु चिकित्सा विभाग भी इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है।

गांव-गांव में जाकर मवेशियों में टीकाकरण किया जा रहा है। इसके अलावा स्वास्थ्य का परीक्षण भी किया जा रहा है। पशु चिकित्सक गांव में पहुंचकर ग्रामीणों को लंपी वायरस की पहचान के बारे में भी बता रहे हैं। मवेशियों में किस तरह के लक्षण दिखने पर तत्काल समीप के पशु चिकित्सालय से संपर्क करने व मवेशियों को टीकाकरण कराने कहां जा रहा है। इसके अलावा पशु चिकित्सकों द्वारा लक्षणों के साथ ही बचाव के उपाय भी बताए जा रहे हैं। चिकित्सकों के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर जन जागरण अभियान भी चलाया जा रहा है।

ये हैं लक्षण

- गौवंश में फैलने वाला वायरस जनित रोग है। इस बीमारी में गायों के पूरे शरीर पर दर्दनाक गांठे हो जाती हैं। जो बाद में फूटकर घाव में परिवर्तित हो जाती हंै।

- तेज बुखार, नाक व मुंह से पानी का गिरना, भूख नहीं लगना दूध गिरावट आदि लक्षण दिखाई देते हैं।

- पशुओं में इस बीमारी का फैलाव 15-20 प्रतिशत तक है। घरेलू गौवंश में मृत्यु दर दो प्रतिशित है एवं कमजोर व निराश्रित गौवंश में मृत्यु दर पांच प्रतिशत है।

इन कारणों से होता है बीमारी का फैलाव

- इस बीमारी के फैलाव का मुख्य कारण मक्खी, मच्छर के माध्यम से होता है।

- पशुओं की लार, दूषित चारा व पानी से भी फैलता है।

ऐसे करें बचाव

- गोशालाएं व पशुपालक अपने बीमार गौवंश को बाहर चराने के लिए नहीं भेजे।

- बीमार पशुओं को स्वस्थ्य पशुओं से अलग रखें।

- उपचार के लिए नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करें।

- पशुओं के बाड़े को साफ-सुथरा व सुखा रखें।

- बाड़े में नियमित रूप से मक्खी व मच्छर रोधी दवा का छिड़काव करें व नीम एवं गूगल की पत्तियों का धुआं करें।

- पशुओं में सामान्य लक्षण दिखाई देने पर दर्द एवं बुखार रोधी दवा अवश्य दें

- पशुओं को फिटकरी या लाल दया से दिन में दो बार स्नान कराएं।

- बीमार पशुओं को पौष्टिक आहार एवं पीने के लिए स्वच्छ पानी उपलब्ध कराएं।

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