बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन, जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस आरसीएस सामंत की फुल बेंच ने विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण कर एचएम के पद में नियुक्त हुए शिक्षाकर्मियों की भर्ती को वैध ठहराया है। कोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश को खारिज कर दिया है।

राज्य शासन ने वर्ष 2009-2010 में प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में एचएम के रिक्त पदों पर शिक्षाकर्मी की भर्ती करने नियम बनाया था। नियम के तहत रिक्त पदों को पहले शिक्षा विभाग के नियमित शिक्षकों को पदोन्नति प्रदान कर भरा जाएगा। इसके बाद रिक्त पदों में भर्ती के लिए जिलावार विभागीय परीक्षा होगी। परीक्षा में ऐसे शिक्षाकर्मी शामिल हो सकते हैं जिनकी सेवा सात वर्ष पूरी हो गई है। इसे सीधी भर्ती माना जाएगा। परदेशी राम वर्मा ने एचएम के पद में सीधी भर्ती नियम के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। डीबी ने याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद बलौदाबाजार जिले में 518, रायगढ़ जिले में 200 से अधिक शिक्षाकर्मियों की एचएम के पद में नियुक्ति की गई। शिक्षाकर्मियों को एचएम बनाने के खिलाफ शिक्षा विभाग के नियमित शिक्षकों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। इसमें कहा गया कि एचएम पदोन्नति से भरे जाने वाला पद है। नियमित शिक्षकों को वरिष्ठता के आधार पर प्रमोशन प्रदान कर एचएम बनाया जाता है। इस नियम से जूनियर कर्मचारी सीनियर के ऊपर हो जाएंगे। शासन की ओर से सिंगल बेंच के समक्ष डीबी के आदेश को भी रखा गया। इसके बावजूद सिंगल बेंच ने शिक्षाकर्मियों को एचएम के पद में नियुक्त किए जाने के आदेश को निरस्त कर दिया। इससे प्रभावित होने वालों ने हाई कोर्ट में रिट अपील पेश की। इसमें कहा गया कि याचिकाकर्ताओं ने हम को पक्षकार नहीं बनाया था। इस आधार पर उन्होंने सिंगल बेंच के आदेश को निरस्त करने की मांग की। डीबी ने सुनवाई उपरांत 2012 में सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगाते हुए प्रकरण न्यायिक अनुशासन से संबंधित होने पर निर्णय के लिए फुल बेंच को प्रेषित किया। मामले की सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन की अध्यक्षता में जस्टिस गौतम भादुड़ी, जस्टिस आरसीएस सामंत की फुल बेंच का गठन किया गया। शुक्रवार को फुल बेंच ने ओपन कोर्ट में निर्णय पारित करते हुए प्रकरण में तीन बिंदु निर्धारित किए। पहला प्रश्न यह उठाया क्या किसी व्यक्ति का पक्ष सुने बिना उसके खिलाफ निर्णय दिया जा सकता है। सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष को नहीं सुना है। इस कारण से सिंगल बेंच का आदेश कानून के विपरीत है। दूसरा प्रश्न यह उठाया कि यदि किसी प्रकारण में बड़े बेंच के आदेश से सिंगल बेंच सहमत नहीं है तो न्यायिक अनुशासन के तहत प्रकरण को कारण बताते हुए फुल बेंच को निर्णय के लिए प्रेषित करना है। इसका भी पालन नहीं किया गया। अंत में उन्होंने कहा कि भर्ती नियम 6(3) में स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी भर्ती में परेशानी है तो सरकार के पास प्रक्रिया बदलने का विकल्प होगा। इसके अलावा शिक्षा विभाग के शिक्षक का पद ड्राइंग कैडर का हो गया है। ऐसे में शिक्षाकर्मियों का विभागीय परीक्षा के माध्यम से एचएम के पद में सीधी भर्ती की जा सकती है। इसके साथ कोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश को खारिज कर दिया है। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एमएल वर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रायन डिसल्वा, वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. निर्मल शुक्ला, अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव, सुनील ओटवानी, सुदीप श्रीवास्तव, दीपाली पांडेय, आरएस पटेल समेत अन्य अधिवक्ताओं ने पैरवी की है।