बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिले का सबसे बड़ा बैराज अरपा-भैंसाझार से रविवार को पहली बार नहरों में पानी छोड़कर जांच की गई। पानी को सफलतापूर्वक नहर में 22 किलोमीटर आगे पहुंचाकर देखा गया। फिलहाल कहीं भी पानी रुकने या बहाव कमजोर होने का मामला सामने नहीं आया है। अब विभाग यहां रोज सुबह से शाम 15 दिनों तक पानी छोड़कर जांच करेगा। इसी के साथ नहर से कोपरा जलाशय और ग्रामीण तालाबों को भी भरने की योजना है।

जिले की सबसे बड़ी निर्माणाधीन सिंचाई परियोजना का ज्यादातर काम पूरा हो गया है। इस बारिश सीजन में पहली बार बैराज को भरकर देखा गया है। सिंचाई विभाग ने सात जुलाई से इसके सभी गेट बंद कर दिए थे। इसके बाद ज्यादा पानी आने से बैराज के चार गेट भी खोल दिए गए थे। मुख्य ढांचे की जांच के बाद अब इसकी नहरों का भी परीक्षण किया जा रहा है। बैराज से नहर में पानी छोड़कर देखा जा रहा है कि पानी का बहाव कैसा है और कहीं रुकावट तो नहीं हो रही है। इसके लिए विभाग 15 दिनों तक सुबह से शाम तक नहर का गेट खोलेगा और रात में उसे बंद कर दिया जाएगा। नई नहर होने के कारण फिलहाल कम पानी छोड़ा गया है। पहले दिन अधिकारियों ने नहर में 22 किलोमीटर दूर तक पानी पहुंचाने की बात कही है। अब उनका लक्ष्य 25 किलोमीटर तक पहुंचाने का है। जहां कोपरा जलाशय को बैराज के पानी से भरा जाएगा। सिंचाई अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल पानी की मांग नहीं है। अगर कोई किसान नहर से पानी लेना चाहे तो कोई दिक्कत नहीं है। नहर में पानी चालू होने से माना जा रहा है कि इस खरीफ सीजन में किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल जाएगा। अधिकारियों ने दावा किया है कि इस सीजन में वे 10 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई के लिए पानी देंगे। बैराज की क्षमता 25 हजार हेक्टेयर की है। नहर का काम अधूरा होने से पूरी क्षमता से सिंचाई विभाग किसानों को पानी नहीं दे पाएगा।

यहां है नहर बनाने में दिक्कत

सिंचाई विभाग की नहर का काम यहां अधूरा है। बिल्हा हाईकोर्ट के पीछे चिचिरदा गांव में जमीन विवाद के कारण भूमि अधिग्रहण नहीं हो पा रहा है। यहां लोगों ने कालोनी बनाने के लिए जमीन खरीद रखी है जो नहर बनाने का विरोध कर रहे हैं। इससे भी पानी आगे पहुंचाने में समस्या है। इसी तरह तुर्काडीह के पास नेशनल हाईवे फोरलेन सड़क बनाने का काम चल रहा है। उनके निर्माणाधीन काम से नहर का निर्माण रुक गया है।

150 करोड़ का भूमि अधिग्रहण रुका

नहर के लिए अरपा-भैंसाझार परियोजना के तहत 40 प्रकरण एसडीएम कार्यालयों में पेंडिंग हैं। लोगों को अब भी 150 करोड़ रुपये का मुआवजा भुगतान नहीं हुआ है। राजस्व विभाग की लेटलतीफी भी भू अधिग्रहण नहीं हो पाने का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

अरपा-भैंसाझार बैराज से रविवार को सुबह नहर में पानी छोड़कर देखा गया। 22 किलोमीटर तक पानी बिना किसी अवरोध के पहुंच गया है। अब रोज 15 दिनों तक इसी तरह सुबह से शाम तक नहर में पानी छोड़कर देखा जाएगा। इस सीजन में हमने 10 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी देने का लक्ष्य रखा है। इसके बाद जैसे ही आगे नहर का निर्माण होते जाएगा,सिंचाई क्षेत्र बढ़ाते जाएंगे।

एके तिवारी

कार्यपालन अभियंता, कोटा डिवीजन

Posted By: Nai Dunia News Network