बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है। इस कारण सोमवार को आदेश की कापी वकील को नहीं मिल पाई। इसके चलते मरवाही के तीन आदिवासियों की रिहाई नहीं हो सकी है। आदेश की कापी मिलने के बाद निचली अदालत से रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी जुर्माने की राशि और मुचलका पेश नाकर पाने के कारण बीते नौ साल से तीन आदिवासी जेल में बंद है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने तीनों आदिवासियों को व्यक्तिगत मुचलका में रिहाई का आदेश जारी कर दिया है। हाई कोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश के कारण सोमवार को आदेश की कापी रजिस्ट्रार जनरल कार्यायल की नकल शाखा से वकील को नहीं मिल पाई है।

आदेश की कापी ना मिलने के कारण रिहाई की प्रक्रिया सोमवार को पूरी नहीं हो सकी है। संभावना जताई जा रही है कि मंगलवार या बुधवार को आदेश की कापी मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी और बिलासपुर सेंट्रल जेल में बंद तीनों आदिवासियों की रिहाई होगी।

मालूम हो कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रदेश की विभिन्न् जेलों में बंद ऐसे बंदियों को जो जुर्माने की राशि और मुचलका पेश न कर पाने के बाद रिहाई आदेश के बाद भी जेल में बंद हैं उनकी सूची बनाने और जेल से रिहाई की प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है।

प्राधिकरण ने ही मामले की दी थी जानकारी

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने इस तरह के प्रकरणों की जानकारी छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को दी थी। हाई कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर पहले करने और ऐसे बंदियों की रिहाई की अनुश्ांसा की थी। कमेटी की अनुशंसा के बाद हाई कोर्ट ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को प्रदेशभर की जेलों में बंद ऐसे बंदियों की जानकारी इकठ्ठा करने और रिहाई के लिए कानूनी प्रक्रिया प्रारंभ करने का आदेश दिया था।

ये है रिहाई की प्रक्रिया

हाई कोर्ट से जारी आदेश की कापी मिलने के बाद वकील इसे निचली अदालत के समक्ष पेश करेंगे। निचली अदालत में मुचलका सहित अन्य प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पूरी प्रक्रिया होने के बाद कोर्ट से संबंधित कैदियों के नाम से रिहाई के लिए वारंट जारी किया जाएगा। जेल अधीक्षक को निचली अदालत का आदेश देना होगा। इसके बाद जेल से बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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