बिलासपुर। Environment protection: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नगर निगम ने बेहतर काम करना शुरू कर दिया है। लाकडाउन के दौर में जब कामकाज पूरी तरह ठप पड़ा हुआ था तब महापौर रामशरण यादव ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गस्र्वा, घुरवा व बाड़ी योजना की एक महत्वपूर्ण कड़ी गौठान के जरिए गोकाष्ठ निर्माण की योजना बनाई।

इसके लिए अपने मद से राशि स्वीकृत कर मशीन की खरीदी कराई। अब नगर निगम के गौठान में गोकाष्ठ का निर्माण शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में शहर के मुक्तिधामों में लकड़ी की जगह गोकाष्ठ से अंतिम संस्कार होगा। गोकाष्ठ से अंतिम संस्कार की क्रिया पूरी कराने के पीछे एक महत्वपूर्ण संदेश छिपा हुआ है। पर्यावरण को संरक्षित करने के साथ ही पेड़ पौधों की सुरक्षा भी प्रमुख कारण है।

हरियाली बिछी रहेगी तो पर्यावरण अपने आप स्वच्छ रहेगा। प्रदूषण का खतरा काफी हद तक खत्म हो जाएगा। खास बात ये कि लकड़ी पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। शुस्र्आती दौर में मोपका और सकरी के गौठान में गोकाष्ठ का उत्पादन किया जा रहा है।

शहर व ग्रामीण क्षेत्रों के मुक्तिधामों में हर महीने हजारों क्विंल लकड़ी अंतिम संस्कार के लिए लगती है। इसके लिए हरे भरे पेड़ों की बलि चढ़ाई जाती है। हरियाली छिनने का असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। सामान्य जलाऊ लकड़ी की कीमत प्रति क्विंटल 700 स्र्पये है। अंतिम संस्कार के लिए गोकाष्ठ प्रति क्विंटल 400 स्र्पये में बेची जाएगी।

जलाऊ लकड़ी का बेहतर विकल्प

होटलों के अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग और राजकीय राजमार्ग के किनारे संचालित ढाबों में बड़ी मात्रा में कोयला की खपत होती है। सुबह और शाम के वक्त ढाबों की भठ्ठियों में कोयला जलाने के कारण आसमान में धुआं छाया रहता है। पर्यावरण प्रदूषण का एक बड़ा कारण इसे भी माना जा रहा है। गौठानों में जब बड़े पैमाने पर गोकाष्ठ का निर्माण शुरू होगा तब होटलों व ढाबों में भी इसकी आपूर्ति की जाएगी। जलाऊ लकड़ी का गोकाष्ठ बेहतर और प्रभावी विकल्प भी बनेगा।

दो पेड के बराबर लगती है लकड़ी

एक अंतिम संस्कार में औसत पांच से छह क्विंटल लकड़ी की जरूरत पड़ती है। सामान्य आकार के पेड़ से दो-तीन क्विंटल लकड़ी निकलती है। लिहाजा दो पेड़ की जरूरत पड़ती है।

इन्होंने कहा

नगर निगम के दो गौठानों में गोकाष्ठ का निर्माण शुरू हो गया है। जल्द ही शहर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मुक्तिधामों को अंतिम संस्कार के लिए गोकाष्ठ की आपूर्ति की जाएगी। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह बेहतर विकल्प होगा। इसके अलावा हरे भरे पेड़ों की कटाई भी बंद होगी।

रामशरण यादव-महापौर,नगर निगम

Posted By: anil.kurrey

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