Bhaiyaji Kahin Column: राधाकिशन शर्मा. बिलासपुर। बुधवार और गुरुवार का दिन जिले के सत्ताधारी दल के नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं के लिए जहां उत्साहजनक रहा, वहीं प्रशासनिक अफसरों के लिए पूरे दो दिन तनाव भरे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के दो दिनी दौरे पर थे। प्रवास था ग्रामीणों से भेंट मुलाकात करना। सीएम ने इस दौरान ग्रामीणों से ठेठ छत्तीसगढ़ी अंदाज में भेंट की। उनका हालचाल जाना और जिसने जो मांगा बिना किसी झिझक वह दिया।

सड़क से लेकर स्कूल और राशन से लेकर पानी। सब-कुछ। चिरपरिचत अंदाज में ग्रामीणों से सरकार की योजनाओं को पूछना और बातों ही बातों में विधायक सहित संगठन के पदाधिकारियों के लोगों के बीच जुड़ाव और काम करने के तरीके की जानकारी जुटा ले गए। पूरे दो दिन के दौरे में शहरी नेता कहीं नजर नहीं आए। कुछ एक खास को छोड़कर। एक खास धीरे से कान में फुसफसाया, सीएम ने आते ही फरमान जो सुना दिया था।

भैया को गुस्सा क्यों आया: लोगाें से आत्मीयता के साथ मिलना, उनकी बातें सुनना और ठहाके लगाकर हंसना। कुछ इस अंदाज में सीएम ग्रामीणों व अपनों के बीच सहज भाव से मिलते-जुलते हैं। बेलपान और खैरी में भेंट मुलाकात में उनका यह अंदाज ग्रामीणों ने भी नजदीक से देखा और अनुभव भी किया। खैरी से वे खपरी पहुंचे। रात्रि का भोजन और विश्राम खपरी रेस्ट हाउस में पहले से ही तय था।

लिहाजा उनकी पंसद के अनुसार रात्रि भोजन के लिए सब्जियां बनी थीं। भोजन के दौरान डायनिंग टेबल पर उनके साथ कुछ खास नेता बैठे हुए थे। कुछ बात निकली और उनको गुस्सा आ गया। आ ही गया तो जमकर आया। पूरे 15 मिनट बिना रुके अपनी बात कहते रहे। जिले के एक नेता की बड़ी-बड़ी बातों पर वे लगाम कस रहे थे। चाटुकारिता को लेकर भी जमकर फटकार पड़ी। बात निकली है तो दूर तक तो जाएगी ही। आगे-आगे देखिए होता है क्या?

नाम के अनुरूप मिले ख्याति: पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय का नामकरण अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के नाम से किया गया है। कोरोना संक्रमणकाल के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने नाम के अनुरूप अब काम भी प्रारंभ कर दिया है। शोध, शिक्षा और अनुसंधान के अलावा व्याख्यान और संगोष्ठियों का अटल बिहारी वाजपेयी और बस्तर विश्वविद्यालय के बीच समझौता हुआ है।

अकादमिक नजरिए से देखें तो दो विश्वविद्यालयों के बीच इस तरह के समझौते से बिलासपुर जिले के शोधार्थियों को लाभ मिलेगा। बस्तर की संस्कृति और जनजातियों के बीच आचार व्यवहार को जानने और समझने का अवसर मिलेगा। अकादमिक के साथ ही शोध और अनुसंधान के क्षेत्र में यह समझौता मील का पत्थर साबित होगा। भरोसा रख सकते हैं कि विश्वविद्यालय को भारत रत्न स्व. वाजपेयी के नाम और उनके काम के अनुरूप ख्याति भी मिलेगी। शोधार्थी देश में नाम रोशन करेंगे।

पुलिस मैदान में बिखरेगी छटा: कोरोना संक्रमण का वह भयावह दौर आज भी लोगों को याद है। ऐसा कोई व्यक्ति नहीं जिसको कोरोना ने दर्द न दिया हो। हर एक के मन में आज भी उस दौर की टिस कायम है। संक्रमण का डर ऐसा कि सब-कुछ बंद। सरकारी कार्यालय से लेकर बाजार में सन्नाटा पसरा रहता था। जहां तक नजर जाती थी सड़कें सुनी दिखाई देती थीं। राष्ट्रीय पर्व में भी स्कूली बच्चों की सहभागिता बंद कर दी गई थी। तीन साल बाद एक बार फिर पुराना दौर लौट आया है।

गणतंत्र दिवस के मौके पर स्कूली बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रम करते नजर आएंगे। पुलिस मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम मचेगी। मैदान में बच्चे अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगे तो दर्शक दीर्घा में माता-पिता के साथ ही स्वजन उत्साहवर्धन करते दिखाई देंगे। पुलिस मैदान में सतरंगी छटा बिखरेगी और कोरोना के भागने का संदेश देंगे। अच्छे दिनों की वापसी होगी और निरंतर जारी रहेगी।

Posted By: Abrak Akrosh

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