Bilaspur Dhirendra Sinha Column: धीरेंद्र सिन्हा, बिलासपुर नईदुनिया। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय से संबद्ध कालेजों में प्रवेश के नाम पर खेल हो रहा है। मेधावी वंचित और चहेतों का दाखिला हो रहा है। सरकारी, अनुदान प्राप्त से लेकर निजी कालेजों में एकसमान स्थिति है। आदेश के बाद भी पारदर्शिता नहीं है। कालेज प्रशासन अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। विश्वविद्यालय भी इन संस्थाओं के आगे नतमस्तक है। दरअसल माजरा यह है कि विश्वविद्यालय में बैठे अधिकारियों की लंबी सेटिंग है।

इसी का परिणाम है कि विश्वविद्यालय शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं करता। आंखों के सामने छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है। कम अंक वालों का दाखिला और अधिक वालों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। फिर भी अधिकारी मौन हैं। शासन का डर न नियमों की चिंता! अब तो विद्यार्थी नाराजगी जाहिर करते हुए कहते हैं कि इससे अच्छा होता कि कालेज अपने गेट पर विषयवार रेट लिस्ट चस्पा कर देते।

पर्यटन की ओर बढ़े युवा: कोरोना महामारी के बीच युवाओं के सामने बेरोजगारी ने मुसीबत और बढ़ा दी। छत्तीसगढ़ के ज्यादातर युवा अब सरकार के सामने नौकरी की आस लगाए बैठे हैं। निजी कंपनियों में भी दरवाजे बंद हो चुके हैं। लिहाजा राहत की खबर यह है कि अनलाक के बाद अब ज्यादातर युवाओं को पर्यटन के क्षेत्र में करियर नजर आ रहा है। बिलासपुर के कई युवा आसपास पर्यटन क्षेत्रों में अपना भविष्य देख रहे हैं।

तभी तो महामारी के काबू में आते ही पर्यटन की ओर कदम बढ़ाने लगे हैं। दुकान से लेकर टीशर्ट, पेन, कापी, कैलेंडर, टूर मैनेजमेंट, पिकनिक स्टाल आदि में स्टार्ट अप के जरिए किस्मत आजमाने को तैयार हैं। युवाओं को नवंबर से लेकर मार्च के बीच अच्छी कमाई का भरोसा है। बकायदा कालेज और विश्वविद्यालयों से सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स भी किया है। उनकी मानें तो सबकुछ ठीक रहा तो ग्रामीण अंचल के लोगों को भी वे रोजगार देंगे।

क्रिकेटरों ने दिया दीपावली गिफ्ट: बिलासपुरवासियों के लिए यह दीपावली कई खुशियां लेकर आई है। कोरोना का प्रकोप अब लगभग खत्म हो चुका है। बाजार गुलजार होने लगे हैं। स्कूल-कालेजों में चहल-पहल बढ़ी है। इस बीच यहां के होनहार क्रिकेटरों ने भी शानदार गिफ्ट दिया है। कूचबिहार ट्राफी के लिए घोषित छत्तीसगढ़ की अंडर 19 क्रिकेट टीम में यहां के छह खिलाड़ियों का चयन हुआ है। शहर के मयंक यादव को कप्तानी की जिम्मेदारी भी मिली है।

जिला क्रिकेट संघ के पदाधिकारी भी फूले नहीं समा रहे हैं। भला हो भी क्यों न, कोरोनाकाल के बीच बिना प्रशिक्षण और कोच केे खिलाड़ियों ने अपने बलबूते पर मुकाम हासिल किया है। घर में रहने के बाद भी कड़ी मेहनत करना नहीं छोड़ा। इसी का नतीजा है कि आधा दर्जन प्रतिभावान युवाओं का नंबर लगा है। अब तो इन क्रिकेटरों के साथ बिलासपुर भी चमक गया है। भिलाई में एक महीने का प्रशिक्षण चालू हो चुका है।

अब पढ़ाई भी चाहिए सरकारी: अभी तक सरकारी नौकरी पहली पसंद है। वहीं सरकारी अस्पताल और स्कूल का नाम सुनते ही कदम ठहर जाते थे। लेकिन, कोरोना महामारी के बाद जिस तरह सरकारी स्कूलों में पढ़ाई हो रही है निजी स्कूल फिसड्डी साबित हो रहे हैं। सरकारी स्कूलों में आफलाइन कक्षाओं के साथ छमाही परीक्षा जारी है। जबकि निजी स्कूल अभी अभिभावकों से रायशुमारी के नाम पर दिन काट रहे हैं। क्योंकि उनके पास संसाधन के साथ स्टाफ की भारी कमी है।

कोरोनाकाल में कई शिक्षकों की छुट्टी की गई थी। अब उनमें से कई शिक्षक स्वामी आत्मानंद स्कूल में बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं। भले ही नौकरी अस्थाई है पर पढ़ाई शानदार करवा रहे हैं। अभिभावक तो अब यहां तक कहने लगे हैं कि हमें बच्चों की पढ़ाई भी सरकारी ही चाहिए। निजी संस्थाओं में लूट-खसोट व बेईमानी से भी बचेंगे। आत्मानंद में प्रवेश के लिए अभी से तैयारी शुरू हो गई है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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