Bilaspur Health News: बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग का पुरुष नसबंदी पखवाड़ा चल रहा है। लेकिन इन 15 दिन के भीतर पुरुषों का नसबंदी कराने में स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पसीने छूट आए है। पखवाड़ा के 13 दिन पूरे हो चुके है। लेकिन अभी तक सिर्फ 12 की ही नसबंदी हो पाया है। वहीं अब इससे जुड़े अधिकारी भी जान चुके है कि पुरुष नसबंदी को लेकर समाज में फैली रूढ़िवादी परंपरा, भ्रांतियां और जागरूकता की कमी इसकी वजह बनी है।

21 नवंबर से चार दिसंबर तक जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से पुरुष नसबंदी पखवाड़ा चलाया जा रहा है। शासन का निर्देश है कि ज्यादा से ज्यादा पुरुष की नसबंदी की जाए। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग शहरी व ब्लाक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने के साथ ही ऐसे परुषों की खोज कर रहा है, जो नसबंदी कराना चाहते है। लेकिन कोई भी पुरुष इसके लिए आगे नहीं आ रहा है। यह रहा है कि जब भी कोई स्वास्थ्य कार्यकर्ता व मितानिन पुरुष नसबंदी के लिए किसी से संपर्क कर रहे है, वैसे ही उन्हें न शब्द सुनने को मिल रहा है। जहां पुरुष व उनके स्वजनों का कहना है कि पुरुष नसबंदी कराते ही नहीं है। वहीं यह भी कहना है कि पुरुष नसबंदी के अक्सर गलत परिणाम आते है। ऐसे में पुरुष नसबंदी कराना सही साबित नहीं होता है। जबकि स्वास्थ्य कार्यकर्ता फैली भ्रांतियों को दूर करने की तमाम कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद भी कोई नसबंदी के लिए तैयार नहीं हो रहा है। इन्हीं कारणों से पुरुष नसबंदी अभियान चलाने के बाद भी इस दौरान सिर्फ 12 की ही नसबंदी हो सकी है।

पुरुष नसबंदी पखवाड़ा में स्वास्थ्य विभाग की इज्ज़त दाव पर लगी हुई है। क्योंकि इसकी रिपोर्ट तैयार कर शासन को सौपना है। यदि उसमें नसबंदी की संख्या कम रहती है तो शासन स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को जमकर फटकार लगेगी। ऐसे में नसबंदी कराने की कोशिश की जा रही है। नसबंदी के लिए ऐसे 12 पुरुष मिले है, जो आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। जिन्हें तीन हजार का प्रोत्साहन राशि दिया गया है और नसबंदी कराई गई है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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