बिलासपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। विवेचना के दौरान साक्ष्य संकलन में कमी और वैज्ञानिक सबूतों की कमी का लाभ अपराधियों को मिलता है। इससे वे न्यायालय से दोषमुक्त हो जाते हैं। पुलिसकर्मियों को तकनीकि ज्ञान से अपग्रेट होते रहना चाहिए। उनकी सोच अपराधियों से आगे की रहेगी तो इसका फायदा मिलेगा। ये बातें आइजी बीएन मीणा ने रेंज स्तरीय साक्ष्य संकलन कार्यशाला में पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए कही।

जल संसाधन विभाग परिसर स्थित प्रार्थना सभा भवन में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए आइजी बीएन मीणा ने कहा कि अपराधों की जांच के लिए रेंज, जिला और थाना स्तर पर साक्ष्य संकलन बाक्स दिया गया है। इसके महत्व को समझकर जांच के दौरान वैज्ञानिक पद्धति से साक्ष्य संकलन किया जाना चाहिए। विवेचक अपनी कमियों को दूरकर साक्ष्य संकलन करें। उन्होंने कहा कि विवेचकों को जागरूक होना चाहिए। अब जांच में कमी पाए जाने पर विवेचकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

इससे बचने के लिए विवेचकों को वैज्ञानिक टूल्स, कंप्यूटर और मोबाइल की जानकारी लें। इसका उपयोग जांच के दौरान करें। अपराधी की सोच से आगे सोच रखकर पुलिस अपना काम करे। कार्यशाला में सीखी बातों को जिले के अन्य विवेचकों तक पहुंचाए। कार्यशाला के दौरान विस्फोटक जांच किट, नारकोटिक जांच किट समेत दुष्कर्म के मामलों की जांच के लिए दिए गए किट की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान डा. टीएल चंद्रा, वैज्ञानिक डा. मोहन पटेल, डा. संदीप वैष्णव ने किट के उपयोग और साक्ष्य की पैकिंग के संबंध में जानकारी दी। कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ वैज्ञानिक संचाली पाध्ये ने डीएनए किट के माध्यम से सैंपल पैकिंग के संबंध में बताया। इस दौरान एएसपी दीपमाला कश्यप, एएसपी सिटी राजेंद्र जायसवाल, सीएसपी आइपीएस पूजा कुमार, एसडीओपी रायगढ़ दीपक मिश्रा, कोरबा सीएसपी विश्वदीपक त्रिपाठी, डीएसपी मुंगेली माधुरी धिरही समेत रेंज के अधिकारी व 120 विवेचक मौजूद रहे।

Posted By: Abrak Akrosh

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